×
जिस पर देशकरता है भरोसा

जहां महाकाल राजा, वहां कौन हैं रानी? जानिए उज्जैन का रहस्य

मंदिर का इतिहास सम्राट विक्रमादित्य के समय से पुराना है. माना जाता है कि युद्ध से पहले सम्राट विक्रमादित्य नगरकोट माता का आशीर्वाद जरूर लेने आते थे और उन्हीं के काल में मंदिर का निर्माण बड़े पैमाने पर किया गया था.

जहां महाकाल राजा, वहां कौन हैं रानी? जानिए उज्जैन का रहस्य
Image Credits: File Photo
Advertisement

उज्जैन को बाबा महाकाल की नगरी माना जाता है. बाबा महाकाल को उज्जैन का राजा कहा जाता है और भक्त बाबा के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से आते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उज्जैन में बाबा को जहां 'राजा' की उपाधि दी गई है, वहीं उज्जैन की 'रानी' कौन हैं? 

कौन हैं उज्जैन की रानी? 

उज्जैन में ही नगर कोट माता का मंदिर स्थित है, जो सिर्फ आध्यात्मिक नजरिए से ही खास नहीं है, बल्कि मंदिर का अपना इतिहास है.

उज्जैन शहर की उत्तर-पूर्व दिशा में गोवर्धन सागर के पास मां नगरकोट माता का मंदिर स्थित है. मां को उज्जैन की रक्षक के रूप में पूजा जाता है और उज्जैन की रानी भी कहा जाता है. स्थानीय मान्यता है कि जब उज्जैन में बाबा महाकाल भी नहीं थे, उससे पहले से नगर कोट माता उज्जैन की सीमा पर तैनात उज्जैनवासियों की रक्षा कर रही हैं. यहां नगर मतलब शहर और कोट मतलब परिधि है, मतलब सीमा की रक्षा करने वाली माता.

Advertisement

नवरात्र में विशेष महत्व

स्कंद पुराण में भी मां के नगर कोट स्वरूप के बारे में बताया गया है, जिसे मां दुर्गा का 7वां रूप माना गया है. यहां में हाथ में अस्त्र लिए हर संकट को काटने के लिए विराजमान हैं. यही कारण है कि मंदिर सिर्फ उज्जैन में ही नहीं बल्कि पूरे देश में विश्व प्रसिद्ध है. उज्जैन में नवरात्र मां नगर कोट माता के बिना अधूरी है.

चैत्र और शारदीय नवरात्र में मंदिर का महत्व अपने आप बढ़ जाता है। नवरात्र में नौ दिन मां का अद्भुत शृंगार किया जाता है और भक्त मंदिर में मौजूद कुंड में चमत्कारी जल से मां का अभिषेक करते हैं. स्थानीय मान्यता है कि उज्जैन में जब किसी सरकारी पद पर अधिकारी की तैनाती होती है तो उसे पहले नगरकोट माता का आशीर्वाद लेना जरूरी माना गया है.

Advertisement

ऐतिहासिक जुड़ाव

यह भी पढ़ें

मंदिर का इतिहास सम्राट विक्रमादित्य के समय से पुराना है. माना जाता है कि युद्ध से पहले सम्राट विक्रमादित्य नगरकोट माता का आशीर्वाद जरूर लेने आते थे और उन्हीं के काल में मंदिर का निर्माण बड़े पैमाने पर किया गया था. मंदिर में माता नगरकोट की रक्षा के लिए भैरव और भगवान विष्णु की प्रतिमा भी मौजूद है. भक्त मनोकामना पूर्ति और संकट से मुक्ति पाने के लिए मां के दर्शन जरूर करते हैं.

टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें