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कब है विश्वकर्मा पूजा? तारीख से लेकर शुभ मुहूर्त और विधि तक जानें सब कुछ

धार्मिक मान्यताओं में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के दिव्य निर्माणकर्ता के रूप में वर्णित किया गया है. उन्हें शिल्प, निर्माण और वास्तुकला का अधिष्ठाता देव माना जाता है.

Image Credits: IANS/AI
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हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार और दिव्य वास्तुकार माना जाता है. निर्माण, वास्तुकला, शिल्प और तकनीकी कौशल से जुड़े लोगों के लिए विश्वकर्मा पूजा का खास महत्व है. इस दिन कारखानों, दुकानों, वर्कशॉप और अन्य कार्यस्थलों पर मशीनों, औजारों और उपकरणों की पूजा की जाती है. मान्यता है कि ऐसा करने से काम में सफलता, तरक्की और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है.

 कब है विश्वकर्मा पूजा?

अगर आप भी इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि विश्वकर्मा पूजा कल है या परसों, तो इस साल यह पर्व 17 सितंबर 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा. विश्वकर्मा पूजा को विश्वकर्मा जयंती के नाम से भी जाना जाता है. यह पर्व कन्या संक्रांति के अवसर पर मनाया जाता है.

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पूजा का शुभ मुहूर्त

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विश्वकर्मा पूजा के लिए सुबह 7:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक शुभ समय है. वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा.

इस दिन औजारों और मशीनों की भी पूजा की जाती है

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धार्मिक मान्यताओं में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के दिव्य निर्माणकर्ता के रूप में वर्णित किया गया है. उन्हें शिल्प, निर्माण और वास्तुकला का अधिष्ठाता देव माना जाता है. यही वजह है कि इस दिन सिर्फ भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर की पूजा नहीं होती, बल्कि काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों और मशीनों की भी पूजा की जाती है.

फैक्ट्री में लगी मशीन हो, दुकान के उपकरण हों, वर्कशॉप के औजार हों या वाहन- उन्हें साफ करके पूजा में शामिल किया जाता है. यह पर्व मेहनत, हुनर और काम के प्रति सम्मान का भी प्रतीक माना जाता है.

कैसे करें पूजा 

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पूजा के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें. सबसे पहले पूजा स्थल और कार्यस्थल की अच्छी तरह सफाई करें. मशीनों, औजारों और अन्य उपकरणों को भी साफ कर लें. इसके बाद एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें.

इस दिन लोग हवन भी करते हैं

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पूजा में दीपक जलाएं और भगवान को रोली, अक्षत, चंदन, फूल, माला, फल, मिठाई और नैवेद्य अर्पित करें. गंगाजल से पूजा स्थल का शुद्धिकरण किया जा सकता है. इसके बाद भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए मंत्र जाप करें. औजारों और मशीनों पर भी रोली-अक्षत लगाकर फूल चढ़ाएं. अंत में भगवान की आरती करें और भोग लगाकर सभी में प्रसाद बांटें. इस दिन कुछ लोग हवन भी करते हैं.

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