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20 फरवरी का पंचांग: सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग का शुभ संयोग, जानें शुभ-अशुभ समय और सावधानियां

शुक्रवार माता लक्ष्मी और शुक्र ग्रह को समर्पित है. इस दिन माता लक्ष्मी की भक्ति भाव से व्रत-पूजन करने से सुख-शांति और धन-धान्य की प्राप्ति होती है.

20 फरवरी का पंचांग: सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग का शुभ संयोग, जानें शुभ-अशुभ समय और सावधानियां
Source:IANS
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सनातन धर्म में पंचांग के आधार पर दिन का शुभ-अशुभ समय तय किया जाता है. 20 फरवरी को शुक्रवार है, जो कई महत्वपूर्ण योगों का संयोग लेकर आ रहा है. इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है, जो कार्यों की सफलता और शुभ फल देने वाला माना जाता है. हालांकि, पूरे दिन पंचक और भद्रा का प्रभाव भी रहेगा, जिसके कारण कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं. 

20 फरवरी का पंचांग

दृक पंचांग के अनुसार, 20 फरवरी को तृतीया तिथि शाम 2 बजकर 38 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर पूरे दिन तृतीया ही मानी जाएगी. नक्षत्र उत्तर भाद्रपद शाम 8 बजकर 7 मिनट तक रहेगा, उसके बाद रेवती नक्षत्र लग जाएगा. योग साध्य शाम 6 बजकर 23 मिनट तक प्रभावी रहेगा. करण गर दोपहर 2 बजकर 38 मिनट तक रहेगा.

शुभ मुहूर्त

सूर्योदय 6 बजकर 55 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 15 मिनट पर होगा. शुभ मुहूर्त की बात करें तो शुक्रवार को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 14 मिनट से 6 बजकर 5 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 28 मिनट से 3 बजकर 14 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 12 मिनट से 6 बजकर 38 मिनट तक रहेगा. अमृत काल दोपहर 3 बजकर 28 मिनट से शाम 5 बजकर 1 मिनट तक है.

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वहीं, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और रवि योग का संयोग शाम 8 बजकर 7 मिनट से अगले दिन सुबह 6 बजकर 54 मिनट तक रहेगा. यह समय नए कार्य, पूजा-पाठ, विवाह या अन्य शुभ कार्यों के लिए विशेष रूप से उत्तम है.

अशुभ समय

अशुभ समयों की बात करें तो राहुकाल सुबह 11 बजकर 10 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक, यमगंड दोपहर 3 बजकर 25 मिनट से 4 बजकर 50 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 8 बजकर 20 मिनट से 9 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. भद्रा रात 1 बजकर 51 मिनट से अगले दिन सुबह 6 बजकर 54 मिनट तक और पंचक पूरे दिन मान्य रहेगा. पंचक और भद्रा के कारण अग्नि कार्य, यात्रा या नई शुरुआत से बचना चाहिए.

 

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शुक्रवार माता लक्ष्मी और शुक्र ग्रह को समर्पित है. इस दिन माता लक्ष्मी की भक्ति भाव से व्रत-पूजन करने से सुख-शांति और धन-धान्य की प्राप्ति होती है.

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