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UP में कहां है श्री वेणी माधव मंदिर, 'त्रिवेणी रक्षक' के दर्शन बिना अधूरी मानी जाती है यहां की तीर्थयात्रा, सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फल देती है

मान्यता है कि तभी से वेणी माधव को प्रयागराज का प्रमुख देवता और त्रिवेणी का रक्षक माना जाता है. इसी कारण इस मंदिर का धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा है.धार्मिक ग्रंथों, विशेषकर पद्म पुराण में भी उल्लेख मिलता है कि तीर्थराज प्रयाग में भगवान विष्णु वेणी माधव के रूप में विराजमान हैं.

UP में कहां है श्री वेणी माधव मंदिर, 'त्रिवेणी रक्षक' के दर्शन बिना अधूरी मानी जाती है यहां की तीर्थयात्रा, सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फल देती है
Image Credits: Veni madhav mandir/ Uttarpradeshtourism/Instagram
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संगम नगरी प्रयागराज अपनी धार्मिक और पौराणिक महत्ता के लिए विशेष पहचान रखती है. गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम स्थल को ‘तीर्थराज’ कहा जाता है. इसी पवित्र नगरी की रक्षा करने वाले देवता के रूप में भगवान विष्णु के वेणी माधव स्वरूप को पूजा जाता है. मान्यता है कि प्रयागराज की तीर्थयात्रा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती, जब तक श्रद्धालु ‘त्रिवेणी रक्षक’ श्री वेणी माधव के दर्शन न कर लें.

 नारायण के दर्शन-पूजन से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है

वर्तमान में जगत के स्वामी नारायण को प्रिय पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) चल रहा है. विशेष अवसर पर इस मंदिर का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है. मान्यता है कि अधिक मास में नारायण के दर्शन-पूजन से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है. ऐसे में हम आपको भगवान वेणी माधव मंदिर के बारे में बताते हैं, जिसका कनेक्शन त्रेतायुग से माना जाता है.

श्री वेणी माधव मंदिर का संबंध त्रेतायुग से जुड़ा है 

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पौराणिक मान्यताओं और पुराणों के अनुसार, श्री वेणी माधव मंदिर का संबंध त्रेतायुग से जोड़ा जाता है. कहा जाता है कि उस समय राक्षस गजकर्ण के अत्याचार से तीनों लोकों में भय और अशांति फैल गई थी. तब भगवान विष्णु ने धर्म की रक्षा के लिए उसका अंत किया और त्रिवेणी (गंगा, यमुना और सरस्वती) की सुरक्षा सुनिश्चित की. इसके बाद त्रिवेणी की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने प्रयाग में वेणी माधव के रूप में स्थायी रूप से निवास करने का वरदान दिया.

क्यों इस मंदिर का धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा है

मान्यता है कि तभी से वेणी माधव को प्रयागराज का प्रमुख देवता और त्रिवेणी का रक्षक माना जाता है. इसी कारण इस मंदिर का धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा है.धार्मिक ग्रंथों, विशेषकर पद्म पुराण में भी उल्लेख मिलता है कि तीर्थराज प्रयाग में भगवान विष्णु वेणी माधव के रूप में विराजमान हैं. मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और पौराणिक इतिहास का जीवंत प्रतीक भी माना जाता है.

मंदिर को और किन नामों से जाना जाता है

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श्री वेणी माधव मंदिर में भगवान विष्णु की श्याम वर्ण शालिग्राम शिला से बनी प्रतिमा गर्भगृह में स्थापित है. इसके साथ ही त्रिवेणी देवी की प्रतिमा भी यहां स्थापित है. दोनों प्रतिमाएं काले शालिग्राम पत्थर से निर्मित हैं. भगवान वेणी माधव अपने हाथों में शंख और चक्र धारण किए हुए दर्शाए जाते हैं. मंदिर को ‘नगर देवता’ और ‘लक्ष्मी नारायण मंदिर’ जैसे नामों से भी जाना जाता है. मंदिर के मुख्य द्वार पर ‘नगर देवता’ और ‘माधो सकल काम साधो’ जैसे पवित्र वाक्य अंकित हैं, जो इसकी आध्यात्मिक महत्ता को दिखाते हैं.

इतिहास और भक्ति परंपरा में यह भी उल्लेख मिलता है कि महान संत चैतन्य महाप्रभु ने अपने प्रयाग प्रवास के दौरान इस मंदिर में समय बिताया था और यहां भजन-कीर्तन किया करते थे. इससे इस स्थान का आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है.

प्रयागराज में भगवान विष्णु को कितने स्वरूपों में पूजा जाता है

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प्रयागराज में भगवान विष्णु के कुल 12 स्वरूपों को ‘द्वादश माधव’ के रूप में पूजा जाता है, जिनमें वेणी माधव को मुख्य माना गया है. अन्य स्वरूपों में चक्र माधव, गदा माधव, पद्म माधव, अनंत माधव, बिंदु माधव, मनोहर माधव, असि माधव, संकट हरण माधव, आदि वेणी माधव, आदि वट माधव और शंख माधव शामिल हैं. मान्यता है कि चक्र माधव ज्ञान और विद्या प्रदान करते हैं, जबकि आदि वट माधव को सृष्टि और प्रलय से जोड़कर देखा जाता है.

मंदिर के दर्शन करने कैसे आए 

श्री वेणी माधव मंदिर प्रयागराज जंक्शन से लगभग सात किलोमीटर दूर दारागंज क्षेत्र के पास स्थित है. यहां पहुंचने के लिए रेलवे स्टेशन से ऑटो, रिक्शा और टैक्सी की सुविधा आसानी से उपलब्ध है. मंदिर सड़क मार्ग से भी अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, जिससे श्रद्धालुओं को पहुंचने में कोई कठिनाई नहीं होती.

मंदिर के दर्शन करने का समय क्या है

मंदिर के दर्शन का समय भी निर्धारित है. यह सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहता है. विशेष अवसरों जैसे कृष्ण जन्माष्टमी, पूर्णिमा, एकादशी और अनंत चतुर्दशी पर यहां विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं.

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सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फल देती है

पुरुषोत्तम मास के दौरान इस मंदिर में भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है. श्रद्धालु यहां आकर न केवल भगवान वेणी माधव के दर्शन करते हैं, बल्कि अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना भी करते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फल देती है.

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