11 जुलाई का पंचांग: जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति
दिशाशूल की बात करें तो शनिवार को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है, खासकर जब यात्रा बहुत जरूरी न हो. अगर किसी कारण से यात्रा करनी पड़े तो उचित उपाय करके आगे बढ़ने की परंपरा है.
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पंचांग हिंदू धर्म की एक प्राचीन और महत्वपूर्ण कालगणना पद्धति है, जिसके आधार पर तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का आकलन किया जाता है. यही कारण है कि विवाह, गृहप्रवेश, नामकरण, मुंडन, नए व्यापार की शुरुआत या किसी लंबी यात्रा जैसे शुभ कार्यों से पहले पंचांग देखकर ही शुभ मुहूर्त तय किया जाता है. बात अगर 11 जुलाई की करें, तो यह दिन कई खास संयोग लेकर आएगा.
11 जुलाई की तिथि और पंचांग विवरण
11 जुलाई शनिवार को पड़ रहा है. पंचांग के अनुसार, इस दिन आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि सुबह 5:23 बजे तक रहेगी. इसके बाद द्वादशी तिथि का आरंभ होगा, जो रात 2:04 बजे तक रहेगी.
नक्षत्र, योग और करण की स्थिति
शनिवार को सूर्योदय सुबह 5:16 बजे होगा जबकि सूर्यास्त शाम 6:53 बजे होगा. वहीं, चंद्रमा का उदय रात 1:34 बजे और चंद्रास्त दोपहर 3:53 बजे होगा. इस दिन कृत्तिका नक्षत्र सुबह 11:04 बजे तक रहेगा. इसके बाद नक्षत्र में परिवर्तन होगा. पंचांग के अनुसार, गंड योग रात 12:06 बजे तक रहेगा जबकि बालव करण सुबह 5:22 बजे तक प्रभावी रहेगा.
शुभ कार्यों के लिए अभिजित मुहूर्त
अगर आप इस दिन कोई शुभ या महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने की योजना बना रहे हैं तो अभिजित मुहूर्त सुबह 11:37 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा. इस समय को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है. हालांकि, दिन में राहुकाल का भी ध्यान रखना जरूरी होता है. 11 जुलाई को राहुकाल सुबह 8:40 बजे से 10:22 बजे तक रहेगा. मान्यता है कि इस अवधि में नए कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए.
इसके अलावा गुलिक काल सुबह 5:16 बजे से 6:58 बजे तक और यमघण्टकाल दोपहर 1:46 बजे से 3:28 बजे तक रहेगा. पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा वृष राशि में स्थित रहेंगे.
ग्रहों की स्थिति और दिशाशूल
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दिशाशूल की बात करें तो शनिवार को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है, खासकर जब यात्रा बहुत जरूरी न हो. अगर किसी कारण से यात्रा करनी पड़े तो उचित उपाय करके आगे बढ़ने की परंपरा है.