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कहां है ये चमत्कारी मंदिर, भगवान हनुमान की दृष्टि मात्र से सारे कष्ट और रोगों का होता है नाश

मंदिर के गर्भगृह में हनुमान की दोमुख वाली प्रतिमा मौजूद है, जिसमें एक मुख प्रभु श्री राम, मां सीता और लक्ष्मण की तरफ है, जबकि दूसरा मुख दर्शन करने आने वाले भक्तों की तरफ है. माना जाता है कि शारीरिक रोगों से परेशान भक्त इस मंदिर में रोगों से मुक्ति पाने के लिए आते हैं

कहां है ये चमत्कारी मंदिर, भगवान हनुमान की दृष्टि मात्र से सारे कष्ट और रोगों का होता है नाश
Image Credits: Unamancheri Kodandarama Swamy/ Instagram/strs_temple
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शारीरिक कष्टों से मुक्ति पाने के लिए प्रार्थना और दवा दोनों का सहारा लिया जाता है. शारीरिक कष्टों से छुटकारा पाने के लिए भक्त अलग-अलग मंदिरों में जाते हैं. 

कहां है उनामंचेरी कोदंडरामा स्वामी मंदिर

तमिलनाडु के चेंगलपट्टू जिले में भगवान राम का ऐसा मंदिर है, जहां दर्शन मात्र से शरीर के पुराने से पुराने रोगों से मुक्ति मिल जाती है. हम बात कर रहे हैं उनामंचेरी कोदंडरामा स्वामी मंदिर की, जहां हनुमान अद्भुत रूप में विराजमान हैं. 

ऐसी प्रतिमा दुनिया में किसी मंदिर में नहीं है

तमिलनाडु के चेंगलपट्टू जिले में तांबरम के पास प्राचीन उनामंचेरी कोदंडरामा स्वामी मंदिर है, जिसे स्थानीय लोग श्री कोठंडा रामास्वामी मंदिर के नाम से भी जानते हैं. यह मंदिर अपने भव्य गोपुरम और सुंदर वातावरण के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर के गर्भगृह में प्रभु श्रीराम, मां सीता और लक्ष्मण विराजमान हैं. खास बात यह है कि मंदिर में हनुमान की दुर्लभ और प्राचीन प्रतिमा स्थापित है. कहा जाता है कि ऐसी प्रतिमा दुनिया में किसी मंदिर में नहीं है.

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भगवान हनुमान की दृष्टि मात्र से सारे कष्ट और रोगों का होता है नाश

मंदिर के गर्भगृह में हनुमान की दोमुख वाली प्रतिमा मौजूद है, जिसमें एक मुख प्रभु श्री राम, मां सीता और लक्ष्मण की तरफ है, जबकि दूसरा मुख दर्शन करने आने वाले भक्तों की तरफ है. माना जाता है कि शारीरिक रोगों से परेशान भक्त इस मंदिर में रोगों से मुक्ति पाने के लिए आते हैं. हनुमान की दृष्टि मात्र से सारे कष्ट और रोगों का नाश होता है. मंदिर के गर्भगृह में भरत और शत्रुघ्न की प्रतिमा भी मौजूद हैं. भरत और शत्रुघ्न दोनों कोनों में हाथ जोड़कर नमस्कार मुद्रा में विराजमान हैं. यह देश का पहला मंदिर है, जहां प्रभु श्री राम अपने तीनों भाइयों, मां सीता और अपने प्रिय भक्त हनुमान के साथ हैं.

किसने कराया था इस मंदिर का निर्माण

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मंदिर से जुड़ी प्रचलित किंवदंती की मानें तो इसका निर्माण विजयनगर वंश के अच्युत राय के आदेश के बाद हुआ था, जिन्हें स्वयं भगवान विष्णु ने दर्शन दिए थे. माना जाता है कि अच्युत वर्मा राय दिव्यांग थे और शारीरिक कष्टों से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की थी. भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर सपने में अच्युत राय को दर्शन दिए थे और राम मंदिर बनाने का आदेश दिया था. 

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