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27 अक्टूबर पंचांग: तुला राशि में सूर्य, मेष में चंद्रमा, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त और ग्रहों की स्थिति

मंगलवार को यमगंड काल सुबह 9:22 से 10:46 बजे तक रहेगा. यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है. इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु, या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है.

27 अक्टूबर पंचांग: तुला राशि में सूर्य, मेष में चंद्रमा, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त और ग्रहों की स्थिति
Image Credit: AI Generated
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हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है. कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है. पंचांग हिंदू काल-गणना की एक पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है. 

27 अक्टूबर का पंचांग

कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि सोमवार को सुबह 9:41 बजे से शुरू होकर मंगलवार सुबह 7:01 बजे तक रहेगी. इसके बाद कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि शुरू हो जाएगी, जो 28 अक्टूबर तड़के 4:07 बजे तक रहेगी. मंगलवार को सुबह 6:33 बजे सूर्योदय और शाम 5:48 बजे सूर्यास्त होगा. वहीं, शाम 6:36 बजे चंद्रोदय और अगले दिन सुबह 8:39 बजे चंद्रास्त होगा.

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पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में रहेंगे. ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करते हैं या इस नक्षत्र में स्थित होते हैं, तो इसके विशेष और गहरे प्रभाव देखने को मिलते हैं. स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव (वायु) हैं और स्वामी राहु हैं. इस नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश से लोगों में पुरानी परिस्थितियों और बंधनों से निकलकर स्वतंत्र रूप से कार्य करने की भावना प्रबल होती है.

सुबह 10:52 बजे तक रहेगा सिद्धि योग

मंगलवार सुबह 10:52 बजे तक सिद्धि योग रहेगा, इसके बाद व्यतिपात योग शुरू हो जाएगा. ज्योतिष के अनुसार, सिद्धि योग 27 नक्षत्रों या योगों में से 16वां योग माना जाता है. इस योग के स्वामी देवता भगवान गणेश माने जाते हैं. इस योग में किए गए कार्य बिना किसी बड़ी बाधा के पूर्ण और सफल माने जाते हैं. किसी भी नए काम की शुरुआत के लिए इसे अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है.

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इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा. यह दिन का सबसे शुभ और फलदायी समय माना जाता है. आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवां मुहूर्त) होता है. माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव या दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं. जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर रहते हैं, तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है.

सुबह  11:15 से रहेगा अमृतकाल रहेगा

मंगलवार को सुबह 11:15 से दोपहर 12:43 बजे तक अमृतकाल रहेगा. ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) है. इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है. इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है. यह समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना गया है.

इस दिन राहुकाल दोपहर 2:59 बजे से 4:23 बजे तक रहेगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है, जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है. राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है, जो हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है. स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है. इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है.

मंगलवार को यमगंड काल सुबह 9:22 से 10:46 बजे तक रहेगा. यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है. इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु, या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है. इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है. नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए. इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने और पैसों के लेनदेन से भी बचना चाहिए.

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इस दिन गुलिक काल दोपहर 12:10 बजे से 1:35 बजे तक रहेगा. गुलिक काल को 'विषैला समय' भी कहा जाता है. यह एक उपग्रह है, जिसे अशुभ माना जाता है. माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं. इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है. जो काम बार-बार करने हों, वे इस काल में किए जा सकते हैं. बैंक में पैसे जमा करना, दान देना, या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है.

तुला राशि में रहेंगे सूर्य 

मंगलवार को सूर्य तुला राशि में रहेंगे. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य जब तुला राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे सूर्य का नीच होना या नीचस्थ स्थिति कहा जाता है. सूर्य अग्नि तत्व का कारक है, जबकि तुला राशि वायु तत्व और शुक्र ग्रह के अधीन आती है, जो सूर्य के स्वभाव के विपरीत है. सूर्य को अहंकार, आत्मविश्वास और नेतृत्व का प्रतीक माना जाता है. तुला राशि में आने से आत्मबल या ऊर्जा थोड़ी कमजोर महसूस हो सकती है. इस स्थिति में किसी भी फैसले पर पहुंचना मुश्किल हो सकता है.

इस दिन चंद्र देव मुख्य रूप से मेष राशि में रहेंगे; रात 9:06 बजे वृषभ राशि प्रवेश करेंगे. ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा के मेष राशि में होने से व्यक्ति के स्वभाव, भावनाओं और कार्यशैली पर गहरा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि मेष राशि का स्वामी मंगल है. व्यक्ति ऊर्जावान, साहसी और आत्मविश्वासी होता है. इनमें आगे बढ़कर नेतृत्व करने और त्वरित निर्णय लेने की प्राकृतिक क्षमता होती है.

उत्तर दिशा में यात्रा करना टाल दें

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मंगलवार को दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है.

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