×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

Masik Shivaratri 2025: कल है मासिक शिवरात्री, करें इन मंत्रों का जाप, खुलेंगे सौभाग्य के द्वार

आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मासिक शिवरात्रि है. आर्द्रा नक्षत्र के साथ शूल और गण्ड योग बन रहा है. वहीं, आज चंद्रमा मिथुन राशि में विराजमान रहेंगे. पंचांग के अनुसार, इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 से 12:52 तक रहेगा और राहुकाल दोपहर के 03:53 से 05:38 तक रहेगा.

Masik Shivaratri 2025: कल है मासिक शिवरात्री, करें इन मंत्रों का जाप, खुलेंगे सौभाग्य के द्वार

आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मासिक शिवरात्रि है. आर्द्रा नक्षत्र के साथ शूल और गण्ड योग बन रहा है. वहीं, आज चंद्रमा मिथुन राशि में विराजमान रहेंगे. पंचांग के अनुसार, इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 से 12:52 तक रहेगा और राहुकाल दोपहर के 03:53 से 05:38 तक रहेगा. कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ नहीं मानी जाती है. कृष्ण चतुर्थी मुहूर्त 23 की रात 10:09 से 24 जून की शाम 06:59 तक रहेगा.


हर साल फाल्गुन मास में महाशिवरात्रि मनाई जाती है, वहीं हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है. आप चाहें तो इस दिन व्रत भी रख सकते हैं. इस दिन भगवान की पूरे मनोभाव से पूजा की जाती है. माना जाता है कि कुंवारी लड़कियां मासिक शिवरात्रि का व्रत रखें तो महादेव की कृपा से उन्हें अच्छे वर की प्राप्ति होती है. वहीं, विवाहित महिलाएं इस व्रत को रखती हैं तो वैवाहिक जीवन बेहतर होता है.


पुराणों में शिवरात्रि व्रत का उल्लेख मिलता है. शास्त्रों के अनुसार देवी लक्ष्मी, इन्द्राणी, सरस्वती, गायत्री, सावित्री, सीता, पार्वती तथा रति ने भी शिवरात्रि का व्रत किया था. जो श्रद्धालु मासिक शिवरात्रि का व्रत करना चाहते हैं, वे इसे महाशिवरात्रि से आरम्भ करके एक वर्ष तक निरन्तर कर सकते हैं.
मान्यताओं के अनुसार मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से जीवन की मुश्किलें कम होती हैं. शिवरात्रि पूजन मध्य रात्रि के समय किया जाता है. मध्य रात्रि को निशिता काल के नाम से जाना जाता है तथा यह दो घटी के लिए प्रबल होती है. जून माह में इसका शुभ मुहूर्त 23 की रात 12:03 से 24 जून की 12:44 तक है.

यह भी पढ़ें


मासिक शिवरात्रि के भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, फिर मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें और गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें. एक चौकी पर सफेद कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा को स्थापित करें, गंगाजल से अभिषेक करें और बिल्वपत्र, चंदन, अक्षत, फल और फूल चढ़ाएं. भगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र के जाप से भी लाभ मिलता है. 11 बार रुद्राक्ष की माला से मंत्र जाप करें. शिवलिंग के सम्मुख बैठ राम-राम जपने से भी भोलेनाथ की कृपा बरसती है.

टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें