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DRDO की बड़ी सफलता: हवा में ही ढेर होंगी दुश्मन की बैलेस्टिक मिसाइल, मल्टी लेयर्ड डिफेंस सिस्टम का सफल टेस्ट
मिसाइल खतरों से निपटने के लिए DRDO ने डिफेंस प्रणाली और रुद्रम-II मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. भारत ऐसा करने वाला 5वां देश बन गया है.
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DRDO Tests Multi-Layer Ballistic Missile Defence System: भारत अपनी रक्षा प्रणाली को हर ओर हर छोर से मजबूत कर रहा है. डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने दुश्मन के अलग-अलग तरह के खतरों के खिलाफ देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने वाली कई अहम तकनीकों का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है. जिसमें लंबी दूरी की मल्टी लेयर्ड बैलिस्टिक डिफेंस सिस्टम भी शामिल है.
भारत ने 10 और 11 जून 2026 को लगातार तीन फ्लाइट टेस्ट किए हैं. इस दौरान मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (बीएमडी) क्षमता का भी सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया.
इंटरसेप्टर्स अपने-अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेदने में कामयाब रहे.
ICBM को रोकने की तकनीक वाला 5वां देश बना भारत
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इन सिस्टम्स को मिसाइल से जुड़े नए खतरों का सामना करने के लिए आधुनिक तकनीकों से डिजाइन और विकसित किया गया है. इन परीक्षणों ने देश को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया है, जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (आईसीबीएम) तक को रोकने की क्षमता वाली बीएमडी प्रणाली मौजूद है. इससे पहले यह तकनीक अमेरिका, रूस, इजराइल और चीन के पास थी.
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नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (एनएसएम-एमआर) का पहला फ्लाइट टेस्ट भी सफलतापूर्वक किया गया. इन फ्लाइट टेस्ट को डीआरडीओ और रक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने देखा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन अहम तकनीकों का सफल प्रदर्शन करने पर DRDO को बधाई दी है.
रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने इन परीक्षणों पर बारीकी से नजर रखी और डीआरडीओ और इंडस्ट्री की मिली-जुली कोशिशों की सराहना की. DRDO और भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने वायु से सतह पर मार करने वाली अत्याधुनिक रुद्रम-II मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया था.
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यह परीक्षण हवाई प्लेटफॉर्म से किया गया, जिसने मिसाइल की सटीकता, विश्वसनीयता और उन्नत तकनीकी क्षमताओं को सफलतापूर्वक साबित कर दिया. DRDO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी देते हुए बताया कि रुद्रम-II मिसाइल का परीक्षण बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और महत्वपूर्ण प्रक्षेप पथ के तहत किया गया. इन परीक्षणों के दौरान मिसाइल की सभी प्रमुख उपप्रणालियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और निर्धारित मानकों पर पूरी तरह खरी उतरीं.
परीक्षण के दौरान दागी गई सभी मिसाइलों ने अपने पूर्वनिर्धारित लक्ष्यों को बेहद सटीकता के साथ भेदा. ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) में तैनात अत्याधुनिक ट्रैकिंग और रेंज उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों ने पुष्टि की कि परीक्षण के सभी निर्धारित उद्देश्य पूरी तरह सफल रहे. रुद्रम-II मिसाइल को DRDO की हैदराबाद स्थित अनुसंधान केंद्र (आरसीआई) ने स्वदेशी तकनीक से विकसित किया है.
क्या है मल्टी लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल का काम?
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मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (Multi-Layered Ballistic Missile Defence - BMD) सिस्टम एक उन्नत रक्षा प्रणाली है, जो दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों (खासकर लंबी दूरी की ICBM या IRBM) को कई स्तरों (layers) पर रोकने और नष्ट करने के लिए बनाई गई है.
यह अटैकिंग नहीं बल्कि डिफेंसिव सिस्टम है. जो बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ मल्टी-लेयर्ड डिफेंस सिस्टम है. भारत के संदर्भ में DRDO इसी को ‘मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस’ कहता है.
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आसान भाषा में कहें तो यह एक बहु-स्तरीय ढाल है जो दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइल हमले को हवा में ही रोक देती है. आज की युद्ध परिस्थिति को देखते हुए यह भारत के लिए बेहद जरूरी थी. इस परीक्षण के बाद भारत अब लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों, यहां तक कि इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल के खतरों का भी मुकाबला कर सकता है. इस क्षमता से 5 हजार किलोमीटर की दूरी से आ रही मिसाइल को भी मार गिराया जा सकता है. समुद्री स्ट्राइक और डिफेंस स्किल को मजबूत करने की दिशा में यह एक बड़ी उपलब्धि है.