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भारत बनेगा एयर पावर किंग, चीन-पाकिस्तान की बढ़ेगी बेचैनी... मिडिल ईस्ट तनाव के बीच रूस का भारत को 'सुपर हथियार' ऑफर
मॉडर्न वॉर में स्टील्थ फाइटर जेट्स की अहमियत तेजी से बढ़ी है, क्योंकि ये रडार से बचकर मिशन पूरा कर सकते हैं. दुनिया के बड़े देश 5th और 6th जेनरेशन टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं, वहीं पाकिस्तान के चीन से जेट खरीदने की खबरों के बीच भारत भी AMCA प्रोजेक्ट के जरिए अपनी वायु शक्ति मजबूत करने में जुटा है
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आज के आधुनिक दौर में दो देशों के बीच युद्ध पहले जैसा नहीं रहा. युद्ध के मैदान में अब सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि तकनीक सबसे बड़ा हथियार बन चुकी है. इसी बदलते दौर में स्टील्थ टेक्नोलॉजी वाले फाइटर जेट्स की अहमियत तेजी से बढ़ी है. दुनिया की बड़ी ताकतें अब ऐसे लड़ाकू विमानों पर फोकस कर रही हैं, जिन्हें रडार पकड़ ही न सके. यही वजह है कि पांचवीं और छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स को लेकर वैश्विक स्तर पर होड़ तेज हो गई है. ऐसे में अभी पूरी दुनिया ने ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध को देखा, इस बीच रूस ने भारत को अपने अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट Su-57 देने का प्रस्ताव दिया है.
स्टील्थ टेक्नोलॉजी क्यों बनी गेमचेंजर?
स्टील्थ फाइटर जेट्स की सबसे बड़ी खासियत उनका कम रडार क्रॉस सेक्शन (RCS) होता है. इसका मतलब है कि ये विमान दुश्मन के रडार पर बेहद मुश्किल से दिखाई देते हैं. एडवांस रडार सिस्टम भी इन्हें आसानी से ट्रैक नहीं कर पाते. ऐसे में ये जेट्स दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर सीधे अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं. अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों के पास पहले से ही पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट मौजूद हैं. ये विमान सिर्फ तेज नहीं, बल्कि स्मार्ट भी हैं. ये हवा में लड़ाई से लेकर जमीन पर सटीक हमला करने तक हर मिशन में सक्षम होते हैं. यही वजह है कि अब दुनिया का फोकस छठी पीढ़ी के और भी एडवांस जेट्स पर है.
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पाकिस्तान की कोशिश पर भारत की बड़ी तैयारी
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हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान अपने सहयोगी चीन से पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट खरीदने की कोशिश में है. यह खबर भारत के लिए चिंता का विषय बन सकती है, क्योंकि इससे क्षेत्र में शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है. इसी खतरे को देखते हुए भारत भी अब तेजी से अपनी वायु शक्ति को मजबूत करने में जुट गया है. स्वदेशी AMCA प्रोजेक्ट इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसका मकसद भारत को पांचवीं और छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स से लैस करना है. हालांकि, इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में अभी लंबा समय लग सकता है.
रूस का बड़ा ऑफर
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इसी बीच रूस ने भारत को अपने अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट Su-57 देने का प्रस्ताव दिया है. इस ऑफर के तहत भारत को दो स्क्वाड्रन यानी करीब 36 से 40 विमान मिल सकते हैं. अगर यह डील इस साल के अंत तक फाइनल होती है, तो 2027-28 से इसकी डिलीवरी शुरू हो सकती है और 2030-31 तक सभी विमान भारतीय वायुसेना में शामिल हो सकते हैं. ऐसे में Su-57 भारत के लिए एक इंटरिम सॉल्यूशन बन सकता है, जब तक AMCA पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता.
Su-57 क्यों है यह खास?
Su-57 को रूस का सबसे एडवांस स्टील्थ फाइटर जेट माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी मल्टी-रोल क्षमता है. यह एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड दोनों तरह के मिशन आसानी से पूरा कर सकता है. इसमें सुपरक्रूज क्षमता है, यानी यह बिना आफ्टरबर्नर के भी सुपरसोनिक स्पीड से उड़ सकता है. इसके अलावा इसमें AESA रडार और एडवांस सेंसर लगे हैं, जो दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर रखते हैं. इस जेट की 360 डिग्री सिचुएशनल अवेयरनेस पायलट को हर दिशा की जानकारी देती है. थ्रस्ट वेक्टरिंग इंजन की मदद से यह हवा में बेहद तेज और जटिल मोड़ लेने में सक्षम है, जिससे यह डॉगफाइट में बेहद खतरनाक बन जाता है.
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इंजन अपग्रेड
फिलहाल Su-57 में AL-41F1 इंजन का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन रूस एक नए एडवांस इंजन पर काम कर रहा है, जिसे Izdeliye-30 कहा जाता है. यह इंजन ज्यादा ताकतवर और ईंधन के मामले में ज्यादा किफायती होगा. रूस ने भारत को भरोसा दिया है कि भविष्य में इन जेट्स को नए इंजन से अपग्रेड किया जा सकता है. इससे इनकी क्षमता और भी बढ़ जाएगी. रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन Su-57 के उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है. लक्ष्य है कि 2027 तक हर साल 16 से 20 विमान बनाए जाएं. हालांकि, इस प्रोग्राम को कुछ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है. खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सेंसर सिस्टम में बदलाव के कारण उत्पादन में थोड़ी गिरावट आई थी. लेकिन इसे रूस की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
मेक इन इंडिया और HAL की बेहद अहम भूमिका
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भारत इस डील को सिर्फ खरीद तक सीमित नहीं रखना चाहता. सरकार चाहती है कि इसमें ‘मेक इन इंडिया’ का भी फायदा मिले. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने आकलन किया है कि वह अपने मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा हिस्सा Su-57 के निर्माण के लिए इस्तेमाल कर सकती है. हालांकि, इसके लिए रूस से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर यानी ToT बेहद जरूरी होगा. भारत अब हर रक्षा सौदे में आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दे रहा है, इसलिए अंतिम फैसला तकनीकी और वित्तीय शर्तों पर ही निर्भर करेगा.
आगे कैसी चुनौती?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत इस ऑफर को स्वीकार करेगा. एक तरफ यह वायुसेना की ताकत को तुरंत बढ़ा सकता है, वहीं दूसरी तरफ यह देश के स्वदेशी प्रोजेक्ट AMCA को भी प्रभावित कर सकता है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को संतुलित रणनीति अपनानी होगी. यानी जहां एक तरफ तुरंत जरूरतों को पूरा किया जाए, वहीं दूसरी तरफ लंबी अवधि के लिए स्वदेशी तकनीक पर भी फोकस रखा जाए. मौजूदा वैश्विक हालात में एयर पावर किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है. ऐसे में पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि रणनीतिक बढ़त का प्रतीक बन गए हैं.
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बताते चलें कि के सामने इस समय एक बड़ा फैसला है. Su-57 का ऑफर एक अवसर भी हो सकता है और एक रणनीतिक चुनौती भी. आने वाले समय में भारत जो भी फैसला लेगा, वह न सिर्फ उसकी वायु शक्ति बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करेगा.