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दुश्मनों की अब खैर नहीं... भारत रूस से खरीदेगा 288 S-400 मिसाइलें, ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को किया था बर्बाद
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने रूस से 288 S-400 मिसाइलों की खरीद को आवश्यक स्वीकृति दी है. इनकी अनुमानित लागत 10,000 करोड़ रुपये है. यह फैसला मई 2025 के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में उपयोग हुए स्टॉक को फिर से भरने के लिए लिया गया है.
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देश की सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने रूस से 288 नई S-400 मिसाइलों की खरीद को आवश्यक स्वीकृति दे दी है. इन मिसाइलों की अनुमानित लागत लगभग 10,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है. यह फैसला मई 2025 में चले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इस्तेमाल हुए स्टॉक को फिर से भरने और देश की हवाई सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए लिया गया है.
सूत्रों के अनुसार स्वीकृत प्रस्ताव में 120 छोटी दूरी और 168 लंबी दूरी की मिसाइलें शामिल हैं. इनकी खरीद फास्ट ट्रैक प्रोसीजर के तहत की जाएगी, ताकि आपूर्ति में देरी न हो और वायु रक्षा प्रणाली लगातार सक्रिय बनी रहे. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सीमाओं पर सतर्कता और तकनीकी बढ़त दोनों की आवश्यकता महसूस की जा रही है.
S-400 ऑपरेशन सिंदूर में रही विशेष भूमिका
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‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान S-400 सिस्टम की भूमिका बेहद अहम रही. भारतीय सशस्त्र बलों ने इन मिसाइलों का व्यापक उपयोग किया और दुश्मन के लड़ाकू विमानों, अर्ली वार्निंग एयरक्राफ्ट और सशस्त्र ड्रोन को सफलतापूर्वक निशाना बनाया. सबसे चर्चित घटना तब हुई जब 314 किमी दूर पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में एक बड़े विमान को मार गिराया गया. इसके बाद पाकिस्तान ने अपने कई ऑपरेशनल विमानों को अफगानिस्तान और ईरान के पास के एयरबेस की ओर स्थानांतरित कर दिया. अदमपुर और भुज सेक्टर में तैनात S-400 सिस्टम के प्रभाव के कारण 9 और 10 मई को पाकिस्तानी वायुसेना की ओर से कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई.
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भारत ने पहले भी किए कई डील
भारत को पहले से अनुबंधित दो और S-400 सिस्टम इसी वर्ष जून और नवंबर में मिलने वाले हैं. इसके साथ ही वायुसेना छोटी दूरी की रक्षा प्रणाली Pantsir-S1 को खरीदने का प्रस्ताव भी तैयार कर रही है. यह प्रणाली ड्रोन और कामिकेज़ ड्रोन जैसे नए खतरों से निपटने में कारगर मानी जाती है. रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया भी बहुस्तरीय और सख्त निगरानी वाली होती है. ‘स्टेटमेंट ऑफ केस’ से शुरू होकर प्रस्ताव रक्षा खरीद बोर्ड और फिर रक्षा अधिग्रहण परिषद तक पहुंचता है. इसके बाद कीमत पर बातचीत होती है और अंतिम मंजूरी सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति देती है. इसी प्रक्रिया के तहत गुरुवार को करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई. इनमें Dassault Rafale फाइटर जेट, कॉम्बैट मिसाइल, हाई एल्टीट्यूड स्यूडो-सैटेलाइट, एंटी-टैंक माइन्स ‘विभव’, BMP-II वाहनों का ओवरहाल और Boeing P-8I Poseidon समुद्री टोही विमान शामिल हैं.
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बताते चलें कि रक्षा मंत्रालय द्वारा हाल में लिए इन फैसलों से भारत की वायु रक्षा क्षमता नई ऊंचाई पर पहुंचेगी. बदलते युद्ध के स्वरूप में जहां ड्रोन, मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं, वहां S-400 जैसे आधुनिक सिस्टम देश की ढाल बनकर खड़े हैं. आने वाले समय में यह मजबूती भारत की रणनीतिक स्थिति को और सशक्त करेगी.