Advertisement

Loading Ad...

खाड़ी जंग के बीच भारत ने पाकिस्तान की उड़ा दी नींद, भैरव फोर्स के बाद PAK-चीन सीमा पर ड्रोन प्लाटून अश्नि की तैनाती

भारतीय सेना ने पाकिस्तान और चीन की खाड़ी जंग के बीच नींद उड़ा दी है. सेना ने LoC पर  ड्रोन प्लाटून की तैनाती कर दी है. इसके तहत सेना ड्रोन, एंटी ड्रोन और निगरानी टेक्नोलॉजी से लैस होगी.

Drone Platoon Ashni (File Photo)
Loading Ad...

खाड़ी में जंग और बदलते युद्ध के तौर-तरीकों के बीच भारत ने भी अपनी कमर कस ली है. वॉरफेयर के तकनीकों और जरूरतों पर अपनी पूरी स्ट्रैटेजी ही बदल दी है. जिस तरह यूक्रेन छोटा होते हुए भी रूस से ड्रोन के जरिए लड़ रहा है, ईरान ने पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी-इजरायली सेना ठिकानों पर शाहेद ड्रोन के जरिए तबाही मचाई, उसके बाद भारतीय सेना ने भी ड्रोन वॉरफेयर के जरिए चीन-पाकिस्तान की नींद उड़ाने की तैयारी कर ली है.

पाक-चीन सीमा पर ड्रोन प्लाटून अश्नि की तैनाती!

आपको बता दें कि पाकिस्तान से सटी सीमा पर ड्रोन प्लाटून अश्नि की तैनाती शुरू की गई है. ख़बर के मुताबिक तीन महीने के अंदर कश्मीर से गुजरात तक 3323 किलोमीटर लंबी सीमा पर इसकी तैनाती प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. सूत्रों के मुताबिक अश्नि प्लाटून को ड्रोन वॉरफेयर के साथ-साथ एंटी ड्रोन वॉरफेयर टेक्नोलॉजी से लैस किया जाएगा. सरकार ने इसके लिए सेना को इस संबंध में हरी झंडी बीते साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महसूस हुई जरूरतों के बाद ही दे दी थी. भारतीय सेना का ना सिर्फ आधुनिकीकरण किया जा रहा है बल्कि रक्षा तैयारियों को मजबूत किया जा रहा है. हालांकि ईरान-इजरायल युद्ध के बीच इसमें तेजी देखी जा रही है. 

Loading Ad...

ऑपरेशन सिंदूर में वैसे तो भारतीय सेना और हमारे कोऑर्डिनेटेड एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान की तरफ से आए हर एक मिसाइल हमले को नाकाम कर दिया, लेकिन ड्रोन से निपटने में और तैयारी की जरूरत महसूस की गई. उसी के तहत सेना के अंदर एक भैरव फोर्स का गठन किया गया था. इसी लिहाज से सेना अब सबसे ज्यादा ड्रोन और एंटी ड्रोन सिस्टम की तैनाती पर अपना ध्यान लगा रही है.

Loading Ad...

मालूम हो कि अश्नि प्लाटून सेना की एक स्पेशल ड्रोन यूनिट है, जिसकी तैनाती पैदल सेना की हर बटालियन में  25-30 जवानों को मिलाकर की जाएगी. ये सभी ड्रोन,  निगरानी, जासूसी और हमले करने में दक्ष होंगे. इसी सिलसिले में पाकिस्तान सीमा पर इंफ्रेंट्री बटालियनों में इन यूनिटों को तैनाती की जाने लगी है.

Loading Ad...

वहीं दूसरे चरण में चीन सीमा पर भी बटालियनों को अश्नि प्लाटून से लैस किया जाएगा. वहीं तीसरे चरण में इसके बाद देश के अन्य हिस्सों में भी तैनात इंफ्रेंट्री को भी अश्नि प्लाटून से लैस किया जाएगा. अब सेना खुद भी ड्रोन और ड्रोन ऑपरेशन की पूरी तैयार कर रही है.

ड्रोन वॉरफेयर को लेकर तैयार भारतीय सेना

मालूम हो कि ड्रोन आधुनिक युद्ध (मॉडर्न वॉरफेयर) में सबसे घातक हथियार के रूप में उभरकर सामने आया है. चाहे रूस-यूक्रेन युद्ध हो या ईरान के साथ इजरायल और अमेरिका का संघर्ष-हर जगह ड्रोन की अहम भूमिका देखी गई है. पाकिस्तान के खिलाफ भारत का ऑपरेशन सिंदूर भी ड्रोन वॉरफेयर का एक सजीव उदाहरण है. इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने न सिर्फ ड्रोन का प्रभावी इस्तेमाल किया, बल्कि पाकिस्तान के ड्रोन को भी मार गिराया.

Loading Ad...

भारतीय सेना पहले से ही इस नए युद्धक उपकरण के लिए खुद को तैयार कर रही थी. सेना ने तेजी से अपने ‘ड्रोन वॉरियर’ तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, जिसका पहला चरण अब पूरा हो चुका है. रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, सेना ने बेसिक ड्रोन ट्रेनिंग पूरी कर ली है. यानी अब इंफेंट्री बटालियन के हर जवान को ड्रोन की बुनियादी जानकारी और संचालन की ट्रेनिंग दी जा चुकी है.

ड्रोन की बेसिक ट्रेनिंग यूनिट स्तर पर शुरू की गई थी. दूसरे चरण में स्पेशलाइज्ड एडवांस ट्रेनिंग भी जारी है, जिसके लिए विशेष ड्रोन ट्रेनिंग नोड तैयार किए गए हैं और उनकी संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है. इसके साथ ही ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम की खरीद और तैनाती भी तेजी से बढ़ाई जा रही है.

Loading Ad...

सेना की हर इंफेंट्री बटालियन में ड्रोन प्लाटून का गठन!

सेना ने इंफेंट्री की हर बटालियन में एक ड्रोन प्लाटून स्थापित किया है, जिसे ‘अश्नी प्लाटून’ नाम दिया गया है. अब तक इंफेंट्री की 380 बटालियनों में ये प्लाटून स्थापित होकर ऑपरेशनल हो चुके हैं. इन प्लाटून के पास विभिन्न प्रकार के ड्रोन उपलब्ध हैं.

इसके अलावा, ड्रोन सेंटर ट्रेनिंग अकादमी भी स्थापित की जा रही है. देहरादून स्थित आईएमए, महू का इन्फैंट्री स्कूल, और चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) में ऐसी सुविधाएं पहले ही स्थापित की जा चुकी हैं. सेना के जवानों के साथ-साथ यूनिट के अधिकारियों को भी ड्रोन ऑपरेट करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है.

Loading Ad...

सेना ने दिया ‘ईगल इन द आर्म’ नाम!

भारतीय सेना के इस ड्रोन कॉन्सेप्ट को ‘ईगल इन द आर्म’ नाम दिया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य है कि हर सैनिक ड्रोन ऑपरेट करना सीख सके. जिस तरह सैनिक अपने हथियारों को संचालित करते हैं और हमेशा अपने साथ रखते हैं, उसी तरह वे ड्रोन का भी प्रभावी उपयोग कर सकें.

रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यूनिट या सैनिक की भूमिका के अनुसार ड्रोन के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी जा रही है. जै- कॉम्बैट, सर्विलांस, लॉजिस्टिक्स और यहां तक कि मेडिकल एवाक्यूएशन के लिए भी सैनिकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है. ड्रोन ऑपरेशन के साथ-साथ दुश्मन के ड्रोन को निष्क्रिय (काउंटर) करने की क्षमता भी विकसित की जा रही है.

Loading Ad...

यह भी पढ़ें

इससे एक बहु-स्तरीय (लेयर्ड) सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जो मानव रहित प्लेटफॉर्म्स के उपयोग और उन्हें निष्क्रिय करने दोनों में सक्षम होगा. सेना का लक्ष्य है कि साल 2027 तक इंफेंट्री यूनिट के 100 प्रतिशत जवान ड्रोन ऑपरेशन में दक्ष हो जाएं.

अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...