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कंटेंट क्रिएटर्स को मिले उनका हक, अश्विनी वैष्णव ने उठाई निष्पक्ष कमाई की मांग

आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया कंपनियां कंटेंट के जरिए भारी मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन उस कंटेंट को तैयार करने वाले लोगों को अक्सर उनका उचित हिस्सा नहीं मिल पाता. इसलिए अब समय आ गया है कि पूरे डिजिटल इकोसिस्टम में पारदर्शी और न्यायसंगत राजस्व साझेदारी का सिद्धांत लागू किया जाए.

Image Source: Social Media

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में डिजिटल प्लेटफॉर्म और कंटेंट क्रिएटर्स के बीच राजस्व (कमाई) के निष्पक्ष बंटवारे की आवश्यकता पर जोर दिया. उनका कहना है कि आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया कंपनियां कंटेंट के जरिए भारी मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन उस कंटेंट को तैयार करने वाले लोगों को अक्सर उनका उचित हिस्सा नहीं मिल पाता. इसलिए अब समय आ गया है कि पूरे डिजिटल इकोसिस्टम में पारदर्शी और न्यायसंगत राजस्व साझेदारी का सिद्धांत लागू किया जाए.

कंटेंट क्रिएटर्स के अधिकार और उचित हिस्सेदारी

मंत्री ने स्पष्ट किया कि कंटेंट बनाने वाले केवल बड़े मीडिया हाउस या नामी पत्रकार ही नहीं हैं, बल्कि दूर-दराज के इलाकों में काम कर रहे क्रिएटर्स, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, प्रोफेसर, शोधकर्ता और अकादमिक विशेषज्ञ भी इसमें शामिल हैं। ये सभी लोग अपने ज्ञान, अनुभव और रचनात्मकता के माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म को समृद्ध बनाते हैं. प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता और कमाई का बड़ा हिस्सा इन्हीं के कंटेंट पर आधारित होता है।
उनका मानना है कि जब प्लेटफॉर्म इन रचनाओं से विज्ञापन और अन्य माध्यमों से आय अर्जित करते हैं, तो कंटेंट निर्माताओं को भी उसका उचित और निष्पक्ष हिस्सा मिलना चाहिए. इससे न केवल क्रिएटर्स का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि डिजिटल क्षेत्र में गुणवत्ता और विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।

डिजिटल अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता की आवश्यकता

मंत्री के अनुसार, राजस्व वितरण की प्रक्रिया पारदर्शी और स्पष्ट होनी चाहिए.यदि कमाई के मॉडल और उसके बंटवारे का तरीका साफ-सुथरा होगा, तो विवाद कम होंगे और डिजिटल इकोसिस्टम में विश्वास बढ़ेगा. भारत तेजी से डिजिटल कंटेंट का बड़ा बाजार बन रहा है, इसलिए यहां निष्पक्ष व्यवस्था लागू करना और भी जरूरी हो जाता है.
सरकार पहले से ही डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है; इसी दिशा में नियमों को और सख्त करने की पहल की जा रही है, ताकि प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी तय हो सके और उपयोगकर्ताओं के हितों की रक्षा हो.

एआई और डीपफेक से निपटने के लिए प्रस्तावित नियम

डिजिटल दुनिया में एआई से तैयार कंटेंट और डीपफेक का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. इसे ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने आईटी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है. इन प्रस्तावित नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को एआई से तैयार या सिंथेटिक कंटेंट को स्पष्ट रूप से लेबल करना होगा.
मसौदे के अनुसार, किसी भी वीडियो या तस्वीर में एआई-जनित सामग्री होने पर उसके कम से कम 10 प्रतिशत दृश्य हिस्से में पहचान चिह्न दिखाना अनिवार्य होगा। ऑडियो सामग्री के मामले में, शुरुआत के 10 प्रतिशत हिस्से में यह जानकारी देना जरूरी होगा. साथ ही, जो मेटाडेटा जोड़ा जाएगा उसे बदला या हटाया नहीं जा सकेगा.

बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी

भारत में 50 लाख से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ताओं वाले प्रमुख सोशल मीडिया मध्यस्थों जैसे Facebook, YouTube और स्नैपचैट को इन नियमों का सख्ती से पालन करना होगा. यदि कोई प्लेटफॉर्म जानबूझकर बिना लेबल या गलत तरीके से घोषित एआई-जनित कंटेंट को अनुमति देता है, तो इसे आईटी एक्ट के तहत लापरवाही माना जाएगा और उस पर कार्रवाई हो सकती है,


सरकार का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म को अधिक जिम्मेदार, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है. एक ओर जहां कंटेंट क्रिएटर्स को उनकी मेहनत का उचित आर्थिक लाभ दिलाने की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर एआई और डीपफेक जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस नियम बनाए जा रहे हैं. यदि ये कदम प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो भारत की डिजिटल कंटेंट अर्थव्यवस्था और अधिक सशक्त और संतुलित बन सकती है.

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