धर्म के लिए अपोलोजेटिक नहीं, वोकल है आज का हिंदू...सनातन संस्कृति को खुलकर अपना रहे भारत के 'Gen Z', रिपोर्ट में खुलसा
भारत में हिंदू अब हिंदुत्व को लेकर अपोलोजेटिक नहीं हैं. पहले जो हिंदू अपने धर्म की बात करने से झिझकते थे, आज वे खुलकर अपनी पहचान स्वीकार कर रहे हैं, खुलकर, गर्व के साथ अपनी सनातनी संस्कृति को जाहिर कर रहे हैं
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भारत, उसकी संस्कृति और सभ्यता सबसे प्राचीन रही है. दुनिया भर में सनातन धर्म के बारे में कहा गया है कि वह सबसे पुराना धर्म है. हालांकि लगातार विदेशी आक्रमण और शिक्षा पद्धति में बदलाव ने न सिर्फ हिंदुओं को अपने ही धर्म के प्रति हीन ग्रंथि का शिकार कर दिया, बल्कि यह कोशिश भी हुई कि देश के युवा अपने ही धर्म पर सवाल उठाने लगें, धर्म से दूर हो जाएं और सेक्युलरिज़्म की आड़ में पूरे धर्म को ही बैकफुट पर धकेल दिया जाए.
हालांकि ऐसा लग रहा है कि भारत में धर्म का फिर से जन-जागरण हो रहा है. युवा फिर से अपनी संस्कृति की खोज करने लगे हैं. उन्हें लगने लगा है कि जहां वे धर्मनिरपेक्षता का चोला ओढ़े चल रहे हैं, वहीं दूसरे पंथ-मजहब खुलकर अपने रीति-रिवाजों को फॉलो कर रहे हैं, बल्कि उसका प्रचार और प्रसार भी कर रहे हैं. ऐसे में भारत के युवा अब खुलकर अपनी सनातनी पहचान जाहिर कर रहे हैं. धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन कर रहे हैं. वे मॉडर्निटी को भी नहीं छोड़ रहे, बल्कि उसमें भी अपनी आस्था का समावेश कर रहे हैं. इसी वजह से तो दुनिया आज कहने लगी है कि अब हिंदू अपोलोजेटिक नहीं है.
अपोलोजेटिक नहीं है आज का हिंदू!
जी हां, भारत में हिंदू अब हिंदुत्व को लेकर अपोलोजेटिक नहीं हैं. यानी पहले जो हिंदू अपने धर्म की बात करने से झिझकते थे, आज वे खुलकर अपनी पहचान स्वीकार कर रहे हैं, खुलकर, गर्व के साथ अपनी सनातनी संस्कृति को जाहिर कर रहे हैं, जी रहे हैं, अपना रहे हैं. और तो और, उस पर गर्व भी कर रहे हैं.
हिंदुओं की अपने धर्म के प्रति सोच को लेकर क्या कहती है प्यू रिसर्च!
इसी संबंध में एक रिपोर्ट भी सामने आई है, जो बताती है कि एक ओर जहां दूसरे देशों के जेन-जी अपनी ही सरकार और संस्कृति को उखाड़ फेंक रहे हैं, भारत को भी उथल-पुथल के दौर में धकेलना चाह रहे हैं, वहीं भारत के सनातनी युवा अपनी संस्कृति को खुलकर अपनाने लगे हैं. एक अमेरिकी संगठन Pew Research ने एक सर्वे किया, जिसमें बताया गया कि लगभग 97% हिंदू भगवान पर विश्वास करते हैं और लगभग 64% हिंदू मानते हैं कि “सच्चा भारतीय होने के लिए हिंदू होना बहुत महत्वपूर्ण है.”
इतना ही नहीं, लगभग 59% हिंदू कहते हैं कि हिंदी भाषा भारतीयता की पहचान है और 66% हिंदू मानते हैं कि वे मुसलमानों से काफी अलग हैं. यह दर्शाता है कि हिंदू अब अपनी संस्कृति, इतिहास और पहचान को लेकर शर्मिंदा नहीं हैं, बल्कि गर्व महसूस कर रहे हैं.
बदल रहा भारत का जेन-जी!
1947 के बाद कई दशकों तक हिंदुओं को अपनी धार्मिक पहचान के लिए अनअपोलोजेटिक होने में कई साल लगे. दशकों तक उन्हें दबाया गया, लेकिन 2014 के बाद यह बदलाव तेज़ी से आया, जब प्रधानमंत्री मोदी ने खुलकर यह कहा कि भारत की सभ्यता की जड़ें हिंदू संस्कृति में गहराई से जुड़ी हुई हैं. पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार ने सनातन धर्म की परंपराओं से किनारा नहीं किया, बल्कि उसे अपनाया. मोदी ने धर्म विशेष को खुश करने के लिए, तुष्टिकरण के लिए, धर्म, धार्मिकता और पूजा-पाठ से दूरी नहीं बनाई, बल्कि उसे खुलकर जिया, उसे बढ़ावा भी दिया. ऐसी कल्पना पूर्व सरकारों में मुश्किल थी. सालों तक यह थ्योरी पढ़ाई गई कि धर्म का स्टेट में और स्टेट का धर्म में कोई रोल नहीं होना चाहिए.
भगवाधारी सीएम की स्वीकार्यता-सनातन के प्रति सनातनियों की स्वीकारोक्ति!
यह सनातन का जनरलाइजेशन तब और ज्यादा हुआ, जब योगी आदित्यनाथ की मुख्यमंत्री के तौर पर ताजपोशी हुई. एक भगवाधारी सीएम बना. न सिर्फ राज्य की सत्ता संभाली, बल्कि डंके की चोट पर अपनी आस्था और धर्म का पालन करना जारी रखा. यह भी बताया कि आज के भारत में भगवाधारी भी सीएम हो सकता है, और सीएम भी भगवाधारी हो सकता है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार हिंदू संस्कृति पर गर्व, एकता और आध्यात्मिक विरासत की बात करते हैं. राम मंदिर, कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों को बढ़ावा देना इसका बहुत बड़ा उदाहरण है. राम मंदिर के लिए दशकों तक संघर्ष किया गया, कारसेवकों पर गोलियां चलीं, फिर भी मंदिर नहीं बन पाया.
योगी आदित्यनाथ ने कहा, “मंदिर बनेगा, भव्य बनेगा, उद्घाटन होगा, गोली तो दूर की बात है, कोई मंदिर की तरफ आंख उठाकर भी नहीं देखेगा.” इसके बाद 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री मोदी ने रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की. पहले ही दिन 5 लाख श्रद्धालु पहुंचे और पूरे साल में 13 करोड़ से ज्यादा लोगों ने दर्शन किए.
धर्म-कर्म की ओर बढ़ा युवाओं का झुकाव!
नए साल पर जहां लोग क्लबिंग करने जाते थे, वहीं इस साल लगभग 4 लाख से ज़्यादा लोग अयोध्या राम मंदिर दर्शन के लिए गए. लगभग 5 लाख लोग काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे और लाखों लोग मथुरा-वृंदावन दर्शन के लिए भी पहुंचे. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि हिंदू अब अनअपोलोजेटिक हैं. अपने धर्म और संस्कृति पर उन्हें अब गर्व है. राम मंदिर, कुंभ जैसे बड़े आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि हिंदू एकता और आध्यात्मिक चेतना को भी मजबूत कर रहे हैं.
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PEW रिसर्च की रिपोर्ट संक्षेप में
- 97% हिंदू मानते हैं कि उनका ईश्वर में विश्वास है.
- 80% हिंदुओं ने कहा कि वो रोज पूजा-पाठ करते हैं.
- 59% हिंदी भाषा को भारतीयता की पहचान बताते हैं.
- 66% हिंदुओं ने माना कि उनकी सोच-संस्कृति मुसलमानों से काफी अलग है.
- 81% लोगों को गंगा की पवित्रता पर विश्वास.
- 77% ने कर्म को प्रधानता दी.
- 90% को अपनी धार्मिक पहचान और संस्कृति पर गर्व है.
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