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चुनाव में उद्धव ठाकरे की एक बड़ी चूक, जिसने छीन ली BMC की गद्दी, अब पछता रहे होंगे शिवसेना-यूबीटी चीफ!

BMC Election results 2026: बीएमसी चुनाव के नतीजे आ गए हैं जिसमें बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. वहीं, शिवसेना-यूबीटी की एक गलती ने उसे अर्श से फर्श पर ला दिया है.

बीएमसी चुनाव में बीजेपी ने अपनी जीत का भगवा परचम लहराते हुए अपना वनवास खत्म कर दिया है. यानी, क़रीब 29 साल बाद बीएमसी में कोई भाजपा का मेयर बनने जा रहा है. इस चुनाव में बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है. वहीं, दूसरी तरफ़ बीजेपी के चिर प्रतिद्वंदी उद्धव ठाकरे को महज़ 65 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा. ये आंकड़ा साल 2017 की तुलना में बहुत कम है. उद्धव की शिवसेना को 2017 में कुल 84 सीटें मिली थीं. इस लिहाज से 2026 में उद्धव की भले ही हार हुई है, लेकिन साख बचाने में शिवसेना-यूबीटी सफल रही है. वहीं, अगर उद्धव एक गलती नहीं करते तो शायद आज अंजाम कुछ और ही होता है. 

एक बड़ी चूक और अर्श से फर्श पर आ गए उद्धव

बीएमसी की कुर्सी पर उद्धव ठाकरे का कब्जा था. मुंबई को ठाकरे परिवार और शिवसेना का अभेद किला माना जाता था. बीजेपी पहले शिवसेना के साथ छोटे भाई की भूमिका में गठबंधन में रहती थी. बीएमसी पर पिछले 28-29 सालों से अविभाजित शिवसेना का एकछत्र राज था, लेकिन साल 2026 में सबकुछ बदल गया. उद्धव ठाकरे अर्श से सीधे फर्श पर आ गए. अब सवाल ये है कि उद्धव ने आख़िर कौन सी चूक कर दी, जिसने बीएमसी में उनकी बादशाहत को ही खत्म कर दिया? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उद्धव ठाकरे अगर अपने भाई के साथ हाथ ना मिलाकर कांग्रेस से हाथ मिला लेते तो शायद उन्हें इतनी बड़ी निराशा हाथ नहीं लगती. 

भाई से हाथ मिलाना, घाटे का सौदा!

बीएमसी चुनाव में शिवसेना-यूबीटी ने महाविकास अघाड़ी को छोड़कर राज ठाकरे के मनसे से हाथ मिलाया. यही फैसला उद्धव ठाकरे के लिए ग़लत साबित हुआ. उद्धव ठाकरे को लगा कि राज ठाकरे के मराठियों को लेकर राजनीति का फायदा मिलेगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) सिर्फ 6 सीटों पर सिमट गई. वहीं, कांग्रेस ने इस चुनाव में अकेले दम पर 24 सीटें जीती. अगर उद्धव ठाकरे कांग्रेस को मनाने में कामयाब रहते और महाविकास अघाड़ी को फिर से एकजुट करते, तो शायद नतीजा कुछ और होता. 

वोटों की गणित से समझिए कैसे बदल सकता था खेल

227 सीटों पर हुए बीएमसी चुनाव में कुल वोटों की बात करें तो बीजेपी को 1,179,273 (45.22%) वोट मिले, वहीं, शिवसेना-यूबीटी को 717,736 (27.52%) और कांग्रेस को 242,646 (4.44%) वोट मिले. अगर उद्धव ठाकरे और कांग्रेस साथ होते तो उनके वोट कुल 960,382 हो जाते, जो भाजपा के क़रीब पहुंचते. इसके अलावा नतीजों से पता चलता है कि जहां-जहां महायुति जीती, वहां उद्धव और कांग्रेस के उम्मीदवारों को अलग-अलग वोट पड़े, जिसका फायदा महायुति को हुआ. इसके अलावा उद्धव अगर मनसे के बावजूद कांग्रेस के साथ जाते, तो मराठी वोट के साथ अल्पसंख्यक और सेकुलर वोट भी मिलते. 

इस हार का असर क्या होगा?

बीएमसी चुनाव में उद्धव की हार अभेद किले के ढहने के समान है. क्योंकि लगभग 25 सालों से भी ज्यादा समय से बीएमसी की कुर्सी पर ठाकरे परिवार का कब्जा था. लेकिन अब वो दबदबा खत्म हो गया. कुल मिलाकर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में हार के बाद उद्धव ठाकरे के पास एक बीएमसी का हथियार ही था, लेकिन अब वो भी हाथ से चला गया. धीरे-धीरे उद्धव ठाकरे का प्रभाव कम हो रहा है. ऐसे में फिर से महाराष्ट्र के अंदर अपना राजनीतिक दबदबा हासिल करना शिवसेना-यूबीटी के लिए बहुत बड़ी चुनौती होगी.  


 

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