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जन्माष्टमी के पर्व पर भारत के इन प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों के दर्शन ज़रूर करें, भव्यता देख हो जाएंगे मंत्रमुग्ध
जब भी श्री कृष्ण के मंदिर की बात आती है तो उत्तर प्रदेश के वृंदावन में स्थित बांके बिहारी मंदिर का नाम सबसे पहले आता है। वैसे तो बांके बिहारी मंदिर में पूरे साल भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन जन्माष्टमी के अवसर पर यहाँ की भव्यता और रौनक देखते ही बनती है। बांके बिहारी मंदिर में आप जब भी दर्शन करने आएँगे आपको एक अनोखा अनुभव होगा। इस मंदिर में आप लगातार एक टक ठाकुर जी की आँखों में नहीं देख सकते। पुजारी मूर्ति के आगे लगा पर्दा बार-बार गिराते और उठाते रहते हैं। ऐसी मान्यता है की कोई भक्त लगातार उनकी आँखों में ध्यान से देख ले, तो वह अपनी सुध-बुध खो बैठता है।
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हर साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व बेहद हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया जाता है। इस साल जन्माष्टमी 4 सितंबर के दिन देश-दुनिया में धूमधाम से मनाया जाएगा।
जन्माष्टमी वाले दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मध्यरात्रि में श्री कृष्ण का जन्म होने पर उनका स्वागत करते हैं और भव्य रूप से सजे मंदिरों में जाकर दर्शन-पूजन करते हैं। भगवान कृष्ण को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग भी लगाया जाता है। ऐसे में आज हम आपको भारत के कुछ ऐसे मंदिरों के बारे में बताएंगे जहाँ जन्माष्टमी के दिन दूर दूर से भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
बांके बिहारी मंदिर
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जब भी श्री कृष्ण के मंदिर की बात आती है तो उत्तर प्रदेश के वृंदावन में स्थित बांके बिहारी मंदिर का नाम सबसे पहले आता है। वैसे तो बांके बिहारी मंदिर में पूरे साल भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन जन्माष्टमी के अवसर पर यहाँ की भव्यता और रौनक देखते ही बनती है। बांके बिहारी मंदिर में आप जब भी दर्शन करने आएँगे आपको एक अनोखा अनुभव होगा। इस मंदिर में आप लगातार एक टक ठाकुर जी की आँखों में नहीं देख सकते। पुजारी मूर्ति के आगे लगा पर्दा बार-बार गिराते और उठाते रहते हैं। ऐसी मान्यता है की कोई भक्त लगातार उनकी आँखों में ध्यान से देख ले, तो वह अपनी सुध-बुध खो बैठता है।
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द्वारकाधीश मंदिर
द्वारकाधीश मंदिर गुजरात के द्वारका में स्थित है। चार धामों में से एक इस मंदिर का इतिहास बेहद खास है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण ने यहाँ अपनी द्वारका नगरी बसाई थी और राजा के रूप में शासन किया था। जन्माष्टमी वाले दिन भगवान द्वारकाधीश का अत्यंत भव्य और दिव्य श्रृंगार किया जाता है। मध्यरात्रि में जैसे श्री कृष्ण के जन्म का समय होता है, पूरा मंदिर 'जय कन्हैया लाल की' के जयकारों से गूँज उठता है और भक्त बाल गोपाल के जन्म की खुशियां मनाते हैं।
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श्री जगन्नाथ मंदिर
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ओडिशा के पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है जो चार धामों में शामिल है। इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा विराजमान हैं। जगन्नाथ मंदिर की रथ यात्रा तो दुनिया भर में प्रसिद्ध है जिसमें हिस्सा लेने के लिए देश-विदेश से लाखों भक्त आते हैं। यहाँ की जन्माष्टमी भी देखने लायक होती है, इस दिन मंदिर की रौनक और आध्यात्मिक वातावरण और भी अद्भुत हो जाता है। जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण को 56 भोग लगाए जाते हैं और हर्षोल्लास के साथ ये उत्सव मनाया जाता है।