कभी पाकिस्तान के कब्जे में था भारत का यह खूबसूरत आखिरी गाँव, जानें इसकी दिलचस्प कहानी
तुर्तुक की सांस्कृतिक पहचान इसे लद्दाख के बाकी क्षेत्रों से बिल्कुल अलग बनाती है। इस गाँव की कुल आबादी लगभग 2,500 के आसपास है। 1971 के युद्ध से पहले इस गाँव को पाकिस्तान में बाल्टिस्तान कहा जाता था। इस जगह का इतिहास तो बदल गया लेकिन यहाँ के कुछ निवासियों ने अपनी प्राचीन जड़ों को संभाल कर रखा है। वो लोग आज भी अपनी 'बाल्टी' भाषा बोलते हैं।
Follow Us:
भारत-पाकिस्तान की सीमा को लेकर आपने कई किस्से सुने होंगे और फिल्में भी देखी होंगी। अमृतसर के पास स्थित वाघा बॉर्डर जैसी जगहें जो दोनों देशों के बीच के विभाजन को दर्शाता है, ये भी दुनिया भर में मशहूर हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत-पाक सीमा पर एक ऐसा गाँव बसा है, जो पहले पाकिस्तान में हुआ करता था, लेकिन आज ये भारत का हिस्सा है और एक बेहद लोकप्रिय टूरिस्ट स्पॉट बन चुका है?
जी हाँ, हम बात कर रहे हैं लद्दाख के लेह जिले में स्थित तुर्तुक गाँव की। आइए जानते हैं तुर्तुक गाँव से जुड़ी दिलचस्प कहानी।
क्या है तुर्तुक गाँव की कहानी?
देश के बंटवारे के बाद खूबसूरत तुर्तुक गाँव पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानि PoK के नियंत्रण में चला गया था। लेकिन साल 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने इस गाँव को पाकिस्तान के कब्जे से छुड़ाया और भारत में शामिल कर लिया। बता दें, ये गाँव अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज़ 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस गाँव के आगे थांग नाम की जगह है जो पाकिस्तानी सेना की स्नाइपर रेंज में आता है।
तुर्तुक गाँव अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ साथ अपने फलों खासकर खुबानी के लिए जाना जाता है।
आज भी बोली जाती है 'बाल्टी' भाषा
तुर्तुक की सांस्कृतिक पहचान इसे लद्दाख के बाकी क्षेत्रों से बिल्कुल अलग बनाती है। इस गाँव की कुल आबादी लगभग 2,500 के आसपास है। 1971 के युद्ध से पहले इस गाँव को पाकिस्तान में बाल्टिस्तान कहा जाता था। इस जगह का इतिहास तो बदल गया लेकिन यहाँ के कुछ निवासियों ने अपनी प्राचीन जड़ों को संभाल कर रखा है। वो लोग आज भी अपनी 'बाल्टी' भाषा बोलते हैं।
इस गाँव में देखने के लिए कई ऐतिहासिक चीज़ें हैं जैसे 16वीं सदी की मस्जिद और आइकॉनिक पोलो ग्राउंड, बाल्टी हेरिटेज होम, बाल्टी म्यूजियम और तुरतुक गोम्पा।
कई परिवारों की बदल गई ज़िंदगी
भारत में शामिल होने के बाद, इस जगह के कई परिवारों की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल गई। एक ही परिवार के आधे लोग भारत के हिस्से में आ गए और आधे लोग पाकिस्तान में ही रह गए। हालाँकि, ऐसे परिवार वीजा लेकर पाकिस्तान में अपने रिश्तेदारों से मिलने जा सकते हैं। लेकिन उससे पहले कुछ कागजी कार्रवाई करना जरूरी है।
यह भी पढ़ें
भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के बेहद करीब स्थित होने की वजह से यहाँ जाने के लिए विशेष अनुमति की ज़रुरत होती है। यहाँ जाने के लिए सबसे पहले आपको लेह जिला प्रशासन से इनर लाइन परमिट लेना होगा जो आपको सिर्फ 5 दिनों के लिए मिलेगा। आप लेह शहर में स्थित एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिस इसे ले सकते हैं या किसी ट्रैवल एजेंसी में भी पता कर सकते हैं। आपको सिर्फ ये ध्यान रखना होगा की वो फर्जी ना हो।