इस ताल में नहाने आती हैं देव परियाँ! नैनीताल की इस झील का क्या है रहस्य?
'परीताल' झील जितनी खूबसूरत और शांत दिखती है, उतनी ही अपने अंदर सदियों पुराने रहस्य और लोककथाएं समेटे हुए है। कहा जाता है कि यहाँ लगभग 60 छोटे-बड़े ताल मौजूद हैं जिसमें से आपने भीमताल, राम ताल, लक्ष्मण ताल, सीता ताल और गरुड़ ताल जैसी झीलों के नाम तो ज़रूर सुने होंगे। इन्हीं झीलों के बीच परीताल एक ऐसी झील है जो अपनी सुंदरता के साथ-साथ अपने रहस्यों के लिए भी जानी जाती है।
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देवभूमि उत्तराखंड में है 'झीलों का शहर' नैनीताल जो अपनी मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए दुनिया भर में मशहूर है। हर साल लाखों पर्यटक नैनी झील, भोवाली और आसपास के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर घूमने के लिए यहाँ आते हैं। लेकिन इसी खूबसूरती के बीच है एक ऐसी रहस्यमयी जगह, जिसके बारे में आज भी बहुत कम लोग जानते हैं।
हम बात कर रहे हैं 'परीताल' की। ये प्राकृतिक झील जितनी खूबसूरत और शांत दिखती है, उतनी ही अपने अंदर सदियों पुराने रहस्य और लोककथाएं समेटे हुए है। कहा जाता है कि यहाँ लगभग 60 छोटे-बड़े ताल मौजूद हैं जिसमें से आपने भीमताल, राम ताल, लक्ष्मण ताल, सीता ताल और गरुड़ ताल जैसी झीलों के नाम तो ज़रूर सुने होंगे। इन्हीं झीलों के बीच परीताल एक ऐसी झील है जो अपनी सुंदरता के साथ-साथ अपने रहस्यों के लिए भी जानी जाती है।
नैनीताल शहर से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर 'चाफी' नाम का एक गाँव है जहाँ से होकर आप परीताल पहुँच सकते हैं। चाफी गाँव से 3-4 किलोमीटर के पैदल रास्ते पर है परीताल झील।
क्या है इस झील का रहस्य?
इस झील से जुड़ी लोककथाओं के अनुसार हर पूर्णिमा की रात जब आसमान में पूरा चाँद चमकता है और उसकी रोशनी इस झील पर पड़ती है, तब देव परियाँ यहाँ नहाने आती हैं और यहीं वजह है की इस झील का नाम 'परीताल' पड़ा। इस मान्यता की वजह से स्थानीय लोग पूर्णिमा के समय डुबकी लगाने या इसके पानी को छूने से सख्त परहेज करते हैं। सबसे हैरान कर देने वाली बात ये है की इतना पुराना होने के बाद भी इस झील की गहराई का आज तक कोई सटीक पता नहीं लगा पाया है। इस झील के आस पास जो चट्टानें मौजूद हैं उन्हें शिलाजीत की चट्टानें माना जाता है।
इस जगह तक पहुँचने के लिए नैनीताल से आपको भीमताल-पदमपुरी मार्ग पर आगे बढ़ना होगा। भीमताल पार करने के बाद 'खुटानी' नामक जगह से मुक्तेश्वर की तरफ जाने वाले रास्ते पर चाफी गाँव स्थित है जहाँ से आपको लगभग 3 किलोमीटर की पैदल ट्रेकिंग करनी होगी। यहाँ से कलशा नदी को पार करके आप परीताल पहुँच जाएंगे।
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