राक्षस के नाम से प्रसिद्ध है उत्तराखंड का ये अनोखा शिव मंदिर...84 गांव चढ़ाते हैं पहली फसल
देव भूमि उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में बसा है तारकेश्वर महादेव मंदिर, जो भगवान शिव को समर्पित है. देवदार और चीड़ के घने जंगलों के बीच स्थित ये मंदिर अपनी अनोखी मान्यता और खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है.
Follow Us:
Tarkeshwar Mahadev Mandir : उत्तराखंड की हसीन वादियों में ऐसे तो कई धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जहां प्रकृति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. इन्हीं में से एक भगवान शिव का ऐसा धाम है जो अद्भुत्त है, अलौकिक है. घने जंगलों और शांत वादियों के बीच बसे इस मंदिर के दर्शन के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं. कहते हैं इस पवित्र स्थान पर भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है.
तारकेश्वर महादेव मंदिर की मान्यता
तारकेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित है. लैंसडौन से लगभग 36 किलोमीटर का सफर तय कर के श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. यह मंदिर जितना प्राकृतिक सुंदरता के बीच बसा है, उतना ही अपनी अनोखी बनावट के लिए प्रसिद्ध है. सिर्फ़ इतना ही नहीं इससे जुड़ी मान्यता का विशेष महत्व है. कहते हैं यही वो स्थान है जहां भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने ताड़कासुर नामक राक्षस का वध किया था. कहते हैं आज भी यहां आसपास के 84 गांवों के लोग भगवान शिव को भेंट के रूप में साल की पहली फसल चढ़ाते हैं.
राक्षस के नाम पर क्यों पड़ा मंदिर का नाम
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस जगह पर ताड़कासुर ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप किया था. जिसके बाद उसे वरदान मिला कि शिव पुत्र के अलावा ताड़कासुर का वध कोई नहीं कर सकता. लेकिन यही वरदान ताड़कासुर के अंत की वजह भी बना. ताड़कासुर अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल करके चारों तरफ हाहाकार मचा रहा था. इससे परेशान होकर देवता, संत और ऋषि-मुनि भगवान शिव की शरण में गए. तब शिव के पुत्र कार्तिकेय ने ताड़कासुर का वध कर दिया. लेकिन मृत्यु से पहले ताड़कासुर ने भगवान शिव से क्षमा मांगी, जिसके बाद ये स्थान ताड़कासुर के नाम से तारकेश्वर महादेव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया.
मुद्रा में विराजमान भगवान शिव की होती है पूजा
यह भी पढ़ें
तारकेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव की पूजा तांडव मुद्रा में की जाती है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार पहले इस स्थान पर शिवलिंग की पूजा-अर्चना की जाती थी. लेकिन अब यहां भगवान शिव की तांडव मुद्रा में मूर्ति स्थापित की गई है और साथ ही उसी स्थान के नीचे मुख्य शिवलिंग भी विराजमान है. उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल की यात्रा पर जो भी निकलता है तारकेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन करना नहीं भूलता. खासकर यहां सावन के महीने और मुख्य आयोजनों के दौरान भक्तों का तांता लगा रहता है.