इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खामोशी अब नहीं बनेगी खतरा, सरकार ला रही EV के लिए नया नियम

सरकार का यह फैसला पैदल यात्रियों और सड़क पर चलने वाले सभी लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ भविष्य हैं, लेकिन उनके साथ सेफ्टी भी उतनी ही जरूरी है. AVAS सिस्टम से EVs की खामोशी अब खतरा नहीं बनेगी, बल्कि सड़क पर सभी लोग पहले से ज्यादा सुरक्षित रहेंगे.

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24 Jan 2026
( Updated: 24 Jan 2026
04:29 PM )
इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खामोशी अब नहीं बनेगी खतरा, सरकार ला रही EV के लिए नया नियम
Image Source: Social Media

भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है. पेट्रोल-डीजल के मुकाबले ये गाड़ियाँ कम खर्च वाली होती हैं, प्रदूषण नहीं करतीं और चलाने में भी काफी स्मूद होती हैं. यही वजह है कि अब लोग इलेक्ट्रिक कारों को ज्यादा पसंद करने लगे हैं. लेकिन इन गाड़ियों के साथ एक बड़ी परेशानी भी सामने आई है. दरअसल, इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ कम रफ्तार पर लगभग बिना आवाज के चलती हैं. यही खामोशी कई बार पैदल चलने वालों, साइकिल सवारों, बुजुर्गों और खासकर दृष्टिबाधित लोगों के लिए खतरा बन जाती है.

EV की खामोशी क्यों बन रही है खतरा?

पेट्रोल और डीजल गाड़ियों में इंजन की आवाज अपने आप लोगों को सतर्क कर देती है. सड़क पर चलते समय हमें दूर से ही गाड़ी की आवाज सुनाई दे जाती है और हम संभल जाते हैं. लेकिन इलेक्ट्रिक गाड़ियों में न तो इंजन की आवाज होती है और न ही कम स्पीड पर टायर से ज्यादा साउंड निकलती है. ऊपर से आजकल लोग मोबाइल फोन, ईयरफोन या हेडफोन लगाए रहते हैं, जिससे सामने से आती गाड़ी का अंदाजा ही नहीं लग पाता. इसी वजह से कई बार EVs की वजह से छोटे-बड़े हादसे हो जाते हैं.

सरकार का बड़ा फैसला: अक्टूबर से लागू होगा नया नियम

इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर एक अहम फैसला लिया है. ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के मुताबिक, अक्टूबर 2026 से भारत में सभी इलेक्ट्रिक चार पहिया गाड़ियों में एक खास सेफ्टी सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा. इस सिस्टम का नाम है Acoustic Vehicle Alerting System (AVAS). यह नियम खास तौर पर लोगों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए लाया जा रहा है.

क्या है AVAS सिस्टम और कैसे करता है काम?

AVAS यानी अकॉस्टिक व्हीकल अलर्टिंग सिस्टम एक ऐसा सेफ्टी फीचर है, जो इलेक्ट्रिक गाड़ियों में कम स्पीड पर हल्की-सी आवाज पैदा करता है. जब EV की स्पीड 0 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच होती है, तब यह सिस्टम अपने आप एक्टिव हो जाता है. इस दौरान गाड़ी से हल्की इंजन जैसी आवाज आती है, जिससे आसपास मौजूद लोगों को पता चल जाता है कि कोई वाहन आ रहा है.

किन जगहों पर सबसे ज्यादा काम आएगा AVAS?

जब इलेक्ट्रिक गाड़ी पार्किंग एरिया में होती है, तंग गलियों से गुजरती है, ट्रैफिक सिग्नल के पास चल रही होती है या रिवर्स मोड में होती है, तब AVAS सिस्टम बहुत मददगार साबित होता है. यह आवाज इतनी तेज नहीं होती कि शोर लगे, लेकिन इतनी जरूर होती है कि लोग सतर्क हो जाएं और हादसे से बचा जा सके.

अभी किन गाड़ियों पर लागू होगा यह नियम?

फिलहाल यह नया नियम सिर्फ इलेक्ट्रिक चार पहिया गाड़ियों (Electric Cars) के लिए लागू किया जाएगा. हालांकि ARAI ने यह संकेत जरूर दिए हैं कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर के लिए भी ऐसे ही सेफ्टी सिस्टम पर विचार किया जा सकता है.

EV खरीदने वालों के लिए क्या बदलेगा?

अक्टूबर 2026 के बाद जो भी नई इलेक्ट्रिक कारें बाजार में बिकेंगी, उनमें AVAS सिस्टम पहले से ही फैक्ट्री फिटेड होगा. यानी ग्राहकों को इसके लिए अलग से कुछ नहीं करवाना पड़ेगा. पुराने इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों के लिए इस सिस्टम को बाद में लगवाने (रेट्रोफिट) को लेकर अभी कोई साफ जानकारी नहीं दी गई है.

सुरक्षा की दिशा में एक जरूरी कदम

सरकार का यह फैसला पैदल यात्रियों और सड़क पर चलने वाले सभी लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ भविष्य हैं, लेकिन उनके साथ सेफ्टी भी उतनी ही जरूरी है. AVAS सिस्टम से EVs की खामोशी अब खतरा नहीं बनेगी, बल्कि सड़क पर सभी लोग पहले से ज्यादा सुरक्षित रहेंगे.

 

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