दुनिया को भा रही ‘मेड इन इंडिया’ EV! Q1 में एक्सपोर्ट उछलकर $369 मिलियन पहुंचा, यूरोप ने जमकर खरीदीं कारें
EV Cars: पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा महज 22.2 मिलियन डॉलर था. यानी एक साल के अंदर इलेक्ट्रिक कारों के निर्यात की कमाई में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है.
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India Eelectric Cars: भारत की इलेक्ट्रिक कारों के लिए विदेशों से मांग तेजी से बढ़ रही है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान भारत से इलेक्ट्रिक कारों का निर्यात कई गुना बढ़ गया. वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में भारत ने करीब 369 मिलियन डॉलर की इलेक्ट्रिक कारें विदेश भेजीं. खास बात यह है कि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा महज 22.2 मिलियन डॉलर था. यानी एक साल के अंदर इलेक्ट्रिक कारों के निर्यात की कमाई में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है.
सिर्फ कमाई ही नहीं, बल्कि विदेश भेजी गई इलेक्ट्रिक कारों की संख्या मे भी बड़ा उछाल आया है. पिछले साल अप्रैल-जून में भारत से सिर्फ 1,309 इलेक्ट्रिक कारें एक्सपोर्ट हुई थीं, जबकि इस बार यह संख्या बढ़कर 10,802 यूनिट हो गई. यानी अब दुनिया के कई देशों में भारतीय इलेक्ट्रिक कारों की मौजूदगी तेजी से बढ़ रही है.
यूरोप बना भारतीय इलेक्ट्रिक कारों का सबसे बड़ा बाजार
भारतीय इलेक्ट्रिक कारों की सबसे ज्यादा मांग इस समय यूरोप से आती दिखाई दे रही है. यूरोप के कई देशों ने भारत से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक गाड़ियां मंगाई हैं और इनमें सबसे आगे स्पेन रहा. पहली तिमाही में भारत ने स्पेन को करीब 146.4 मिलियन डॉलर की इलेक्ट्रिक कारें भेजीं। यह भारत के कुल इलेक्ट्रिक कार निर्यात का लगभग 40 प्रतिशत है.
वॉल्यूम के मामले में भी स्पेन सबसे आगे रहा. इस दौरान भारत से 4,007 इलेक्ट्रिक कारें स्पेन भेजी गई. यानी स्पेन न सिर्फ भारतीय इलेक्ट्रिक कारों के लिए सबसे बड़ा बाजार बना, बल्कि वहां भेजी गई गाड़ियों की संख्या भी बाकी देशों के मुकाबले काफी ज्यादा रही.
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ब्रिटेन में भी भारतीय EV की धूम
स्पेन के बाद ब्रिटेन भारतीय इलेक्ट्रिक कारों का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बनकर सामने आया, पहली तिमाही में ब्रिटेन को करीब 78.7 मिलियन डॉलर की इलेक्ट्रिक गाड़ियां निर्यात की गई. यहां सबसे दिलचस्प बात यह है कि पिछले साल की इसी अवधि में भारत ने ब्रिटेन को सिर्फ एक इलेक्ट्रिक कार भेजी थी.
इस बार तस्वीर पूरी तरह बदल गई. अप्रैल से जून के बीच ब्रिटेन को भारत से 2,646 इलेक्ट्रिक कारें भेजी गईं. इससे साफ है कि ब्रिटेन में भारतीय इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर मांग तेजी से बढ़ी है.
जर्मनी, नॉर्वे और डेनमार्क ने भी बढ़ाया भरोसा
यूरोप में सिर्फ स्पेन और ब्रिटेन ही भारतीय इलेक्ट्रक कारों को पसंद नहीं कर रहे हैं. कई दूसरे यूरोपीय देशों से भी भारतीय EV के लिए अच्छी मांग सामने आई है. पहली तिमाही में जर्मनी को 25.1 मिलियन डॉलर, नॉर्वे को 21.1 मिलियन डॉलर और डेनमार्क को 21 मिलियन डॉलर की इलेक्ट्रिक कारें भेजी गईं.
इसके अलावा बेल्जियम, नीदरलैंड, ग्रीस, इटली, स्वीडन और पोलैंड जैसे देशों में भी भारतीय इलेक्ट्रिक कारों का निर्यात हुआ. इससे संकेत मिलता है कि भारतीय कंपनियां धीरे-धीरे यूरोप के अलग-अलग बाजारों में अपनी जगह बना रही हैं. अगर आपको
यूरोप के बाहर भी बढ़ रहा भारतीय EV का बाजार
भारतीय इलेक्ट्रिक कारों की कहानी सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं है. एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भी भारत ने कई देशों को इलेक्ट्रिक कारों का निर्यात किया. जापान को 13.4 मिलियन डॉलर, इजराइल को 2.8 मिलियन डॉलर और ऑस्ट्रेलिया को 2.7 मिलियन डॉलर की इलेक्ट्रिक गाड़ियां भेजी गईं. इसके अलावा सिंगापुर, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में भी भारतीय इलेक्ट्रिक वाहनों की पहुंच बढ़ी है.
पड़ोसी देशों मे भी भारत का इलेक्ट्रिक कार कारोबार आगे बढ़ रहा है. नेपाल को करीब 8.1 मिलियन डॉलर की इलेक्ट्रिक गाड़ियां निर्यात की गई. इससे पता चलता है कि भारतीय कंपनियां सिर्फ बड़े विकसित बाजारों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि आसपास के देशों में भी अपने लिए बाजार तैयार कर रही हैं.
लैटिन अमेरिका मे भी खुल रहे नए रास्ते
भारत के लिए अच्छी खबर यह भी है कि इलेक्ट्रिक कारों के लिए नए बाजार लगातार जुड़ रहे हैं. लैटिन अमेरिका में ब्राजील, कोलंबिया, चिली और कोस्टा रिका जैसे देशों तक भारतीय इलेक्ट्रिक कारों की पहुंच बनी है. ये बाजार अभी यूरोप जितने बड़े नहीं हैं, लेकिन इन देशों में निर्यात बढ़ना भारतीय EV कंपनियों के लिए भविष्य में बड़ा मौका बन सकता है.
भारत की EV इंडस्ट्री के लिए क्यों खास है ये उछाल?
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इन आंकड़ों को सिर्फ निर्यात बढ़ने के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता. दरअसल, यह भारत के इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए एक बड़ा संकेत है.. कुछ साल पहले तक भारतीय इलेक्ट्रिक कारों का बाजार मुख्य रूप से देश के अंदर की मांग पर टिका हुआ था. अब विदेशी ग्राहक भी भारतीय इलेक्ट्रिक गाड़ियों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं.
एक साल में निर्यातित इलेक्ट्रिक कारों की संख्या का 1,309 से बढ़कर 10,802 यूनिट पहुंचना और निर्यात की कमाई का 22.2 मिलियन डॉलर से बढ़कर 369 मिलियन डॉलर होना बताता है कि भारतीय EV सेक्टर तेजी से अंतरराष्ट्रीय बाजार की तरफ बढ़ रहा है. अगर यही रफ्तार आगे भी बनी रहती है, तो आने वाले समय में भारत सिर्फ इलेक्ट्रिक कारों का बड़ा बाजार ही नही, बल्कि दुनिया के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियां बनाने और एक्सपोर्ट करने वाला अहम देश भी बन सकता है.