ड्राइवर की सुरक्षा को देखते हुए कारों में हो सकता है बड़ा बदलाव, टचस्क्रीन सिस्टम पर बैन की तैयारी!

Driving Safety Rules: इन संभावित जोखिमों को देखते हुए चीन में सख्त नियमों की तैयारी की जा रही है. अगर ये नियम लागू होते हैं, तो कई कंपनियों को अपने वाहनों के इंटीरियर डिजाइन में बदलाव करना पड़ेगा.

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16 Feb 2026
( Updated: 16 Feb 2026
03:51 PM )
ड्राइवर की सुरक्षा को देखते हुए कारों में हो सकता है बड़ा बदलाव, टचस्क्रीन सिस्टम पर बैन की तैयारी!
Image Source: Social Media

Driving Safety Rules: आजकल ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में कार और अन्य वाहनों के केबिन डिज़ाइन में बहुत बदलाव देखने को मिल रहा है. पहले जहां गाड़ी में फिजिकल बटन होते थे - जैसे एसी, म्यूजिक, क्लाइमेट कंट्रोल और अन्य जरूरी फीचर्स अब वहां बड़े टचस्क्रीन पैनल आ रहे हैं. अब लगभग सभी कंट्रोल्स स्क्रीन के जरिए किए जा सकते हैं.

कुछ लोगों को यह नया डिजाइन मॉडर्न और प्रीमियम लगता है, लेकिन कई लोग इसे असुविधाजनक और सुरक्षा के लिहाज से खतरे वाला मानते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेफ्टी एक्सपर्ट्स का कहना है कि जरूरी और अहम कंट्रोल्स के लिए फिजिकल बटन ज्यादा भरोसेमंद होते हैं. स्क्रीन पर अगर प्रतिक्रिया धीमी हो जाए या तकनीकी दिक्कत आ जाए, तो यह ड्राइविंग के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.

चीन की सरकार भी हुई सचेत

चीन की सरकार ने इस ट्रेंड को गंभीरता से देखा है.  सरकार का उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तय कर रहा है कि जरूरी फीचर्स के लिए अलग फिजिकल बटन अनिवार्य हो. प्रस्तावित नियमों के मुताबिक टर्न सिग्नल, हैजर्ड लाइट, गियर सिलेक्शन और इमरजेंसी कॉल जैसे अहम कंट्रोल्स के लिए कम से कम 10×10 मिमी आकार के अलग बटन होने चाहिए. इसका मकसद साफ है -  ड्राइवर का ध्यान सड़क से हटने न पाए और सड़क पर सुरक्षा बनी रहे.

सॉफ्टवेयर सिस्टम और इलेक्ट्रिक वाहन

हाल के वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों में मिनिमलिस्ट डिजाइन का चलन बढ़ गया है. कंपनियां जैसे टेस्ला, BYD और Xiaomi के कुछ लोकप्रिय मॉडल पूरी तरह स्क्रीन-आधारित कंट्रोल्स के साथ आते हैं. कुछ मॉडल में तो हैजर्ड लाइट जैसे जरूरी फीचर भी सिर्फ टचस्क्रीन में ही मौजूद हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह सॉफ्टवेयर सिस्टम का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल है, जो सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं है.

ड्राइवर का ध्यान भटकने का खतरा

विशेषज्ञों का तर्क है कि ड्राइविंग के दौरान टचस्क्रीन का इस्तेमाल ड्राइवर का ध्यान सड़क से हटा सकता है. हाईवे पर तेज रफ्तार में थोड़ी सी देरी भी ब्रेक लगाने के समय को बढ़ा सकती है, जिससे रुकने की दूरी लंबी हो जाती है और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है. अगर स्क्रीन धीमी प्रतिक्रिया दे या तकनीकी समस्या आ जाए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.

सुरक्षा के लिए सख्त नियमों की तैयारी

इन संभावित जोखिमों को देखते हुए चीन में सख्त नियमों की तैयारी की जा रही है. अगर ये नियम लागू होते हैं, तो कई कंपनियों को अपने वाहनों के इंटीरियर डिजाइन में बदलाव करना पड़ेगा. उद्देश्य साफ है - ड्राइवर का ध्यान सड़क पर रहे और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो.

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