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Budget 2026: EV सेक्टर को मिल सकता है बड़ा बूस्ट, ऑटो इंडस्ट्री ने ड्यूटी कट की उठाई मांग

EV: इंडस्ट्री लीडर्स का कहना है कि EV से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन को देश के भीतर मजबूत करना बहुत जरूरी है. इससे लागत कम होगी और मैन्युफैक्चरिंग ज्यादा स्थिर और लचीली बनेगी.

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31 Jan 2026
( Updated: 31 Jan 2026
10:32 AM )
Budget 2026: EV सेक्टर को मिल सकता है बड़ा बूस्ट, ऑटो इंडस्ट्री ने ड्यूटी कट की उठाई मांग
Image Source: Social Media
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भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी EV का बाजार बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है. पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और पर्यावरण को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच लोग अब इलेक्ट्रिक गाड़ियों की ओर ज्यादा रुख कर रहे हैं. ऐसे में आने वाले केंद्रीय बजट 2026 से इस सेक्टर को मजबूत सरकारी समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. ऑटोमोबाइल कंपनियां चाहती हैं कि सरकार ऐसी नीतियां बनाए, जिससे EV की लागत कम हो और आम लोगों के लिए ये गाड़ियां खरीदना आसान हो सके.

EV कंपोनेंट्स पर ड्यूटी घटाने की मांग

ऑटो इंडस्ट्री का मानना है कि EV से जुड़े कई पार्ट्स और कंपोनेंट्स पर लगने वाली ड्यूटी अभी ज्यादा है, जिससे गाड़ियों की कीमत बढ़ जाती है. कंपनियां चाहती हैं कि सरकार इन ड्यूटी को तर्कसंगत बनाए, ताकि मैन्युफैक्चरिंग की लागत कम हो सके. इससे कंपनियों को राहत मिलेगी और इसका सीधा फायदा ग्राहकों तक पहुंचेगा, क्योंकि EV की कीमतें नीचे आ सकती हैं.

ग्राहकों को इंसेंटिव देने पर जोर

JSW MG मोटर इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अनुराग मेहरोत्रा का कहना है कि EV को तेजी से अपनाने के लिए ग्राहकों को सीधे मिलने वाले इंसेंटिव को और मजबूत करने की जरूरत है. उनका मानना है कि अगर सरकार सब्सिडी और खास योजनाओं के जरिए ग्राहकों को प्रोत्साहित करे, तो लोग ज्यादा संख्या में इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने के लिए आगे आएंगे. इससे EV की मांग तेजी से बढ़ सकती है और बाजार को नई रफ्तार मिल सकती है.

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी बड़ी चुनौती

हालांकि भारत में चार्जिंग स्टेशनों की संख्या पहले के मुकाबले बढ़ी है, लेकिन यह अभी भी EV के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के रास्ते में एक चुनौती बना हुआ है. इंडस्ट्री चाहती है कि बजट 2026 में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ज्यादा फंड और योजनाएं लाई जाएं. अगर शहरों और हाईवे पर पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन होंगे, तो लोगों का भरोसा EV पर और बढ़ेगा.

लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की जरूरत

EV सेक्टर में लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना भी इंडस्ट्री की बड़ी मांग है. इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता भी मजबूत होगी . EV टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन का लोकलाइजेशन लंबे समय में सेक्टर को ज्यादा मजबूत और आत्मनिर्भर बना सकता है.

ग्रीन मोबिलिटी के लिए स्थिर और साफ पॉलिसी

टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के वरिष्ठ अधिकारी विक्रम गुलाटी का मानना है कि ऑटोमोबाइल और EV सेक्टर के लंबे समय के विकास के लिए पॉलिसी में निरंतरता बेहद जरूरी है. उनका कहना है कि सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर लगातार ध्यान देना चाहिए और अलग-अलग ग्रीन एनर्जी विकल्पों को सपोर्ट करना चाहिए. इससे भारत न सिर्फ अपनी एनर्जी सुरक्षा मजबूत कर पाएगा, बल्कि नेट-जीरो एमिशन जैसे बड़े लक्ष्यों की ओर भी तेजी से बढ़ सकेगा.

EV सप्लाई चेन को मजबूत बनाने की जरूरत

इंडस्ट्री लीडर्स का कहना है कि EV से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन को देश के भीतर मजबूत करना बहुत जरूरी है. इससे लागत कम होगी और मैन्युफैक्चरिंग ज्यादा स्थिर और लचीली बनेगी. साथ ही भारत वैश्विक EV बाजार में भी ज्यादा मजबूती से मुकाबला कर पाएगा. JK टायर के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रघुपति सिंघानिया के मुताबिक, अगर बजट 2026 दूरदर्शी सोच और निवेश पर आधारित हुआ, तो यह ऑटो और EV इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है.

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