टेक्नोलॉजी ने हमारी जिंदगी को आसान जरूर बनाया है, लेकिन हर चीज़ की अति नुकसान ही पहुंचाती है। टेक्नोलॉजी का ज्यादा इस्तेमाल धीरे-धीरे आदत और फिर लत में तब्दील हो रहा है और बच्चे इसका भारी खामियाज़ा भुगत रहे हैं।
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लाइफस्टाइल29 Apr, 202602:37 PMबच्चों का बढ़ता Screen Time शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को पहुंचा रहा गंभीर नुकसान, समय रहते हो जाएं सावधान
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लाइफस्टाइल29 Apr, 202609:37 AMशरीर के लिए किसी 'अमृत' से कम नहीं चावल का पानी और एक चुटकी काला नमक
चावल के पानी में Prebiotic Effects होते हैं जिससे ज़रूरी गट बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा मिलता है। ये आपके पाचन शक्ति और Gut Health को बेहतर बनाने का एक सरल उपाय है। एक चुटकी काला नमक इस पानी में मिला कर पीने से इसके फायदे कई गुना बढ़ जाते हैं।
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Being Ghumakkad28 Apr, 202610:20 AMरिटायरमेंट के बाद ट्रेनों का क्या होता है? जानिए इनकी 'second life' की दिलचस्प कहानी
रेल के इंजनों और coaches की एक निश्चित कार्य अवधि होती है। हर कोच, इंजन और वैगन को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वह एक तय समय तक ही काम कर सके। जैसे ICF कोच की औसत उम्र 25 से 30 साल होती है। वहीं आधुनिक LHB कोच ज़्यादा टिकने वाले होते हैं और इनकी उम्र लगभग 35 साल तक होती है।
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लाइफस्टाइल27 Apr, 202603:52 PMसावधान! शरीर के इन संकेतों को हल्के में न लें, हो सकते हैं मलेरिया के शुरुआती लक्षण
मलेरिया में सबसे पहले जो लक्षण दिखते हैं, वो है तेज ठंड लगना और शरीर का कांपना। अचानक ऐसा महसूस होता है जैसे बहुत ज्यादा सर्दी लग गई हो और शरीर बुरी तरह कांपने लगता है। इसके बाद तेज बुखार चढ़ता है, जो कभी-कभी बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। कई लोगों को लगता है कि यह सामान्य वायरल फीवर है, लेकिन मलेरिया में बुखार का पैटर्न थोड़ा अलग होता है।
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Being Ghumakkad27 Apr, 202609:50 AMकहाँ है भारत का सबसे ऊंचा डाकघर? एक ऐसा सफर जहाँ वक़्त ठहर जाता है
भारत के एक कोने में बसे इस डाकघर तक पहुँचने के लिए आपको पहाड़ों की ऊँचाइयों को छूना पड़ता है। समुद्र तल से लगभग 4,440 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह डाकघर हिक्किम गाँव की पहचान है। हिमाचल प्रदेश की Spiti Valley में स्थित इस डाकघर ने साल 1983 से गाँव के लोगों को बाहर की दुनिया से जोड़ कर रखा है। यहाँ ऑक्सीजन का स्तर कम है और मौसम की स्थिति अप्रत्याशित है लेकिन फिर भी यह जगह अपनी स्थापना के बाद से ही इस क्षेत्र और बाहरी दुनिया के बीच एक सेतु का काम कर रहा है।
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लाइफस्टाइल24 Apr, 202610:17 AMगर्मी में रोज़ करते हैं शैंपू? जानें हफ्ते में कितनी बार धोने चाहिए बाल | प्राकृतिक चमक रहेगी बरकरार
रोज़ शैंपू करना हर किसी के लिए सही नहीं होता। केमिकल युक्त शैंपू का इस्तेमाल करने से स्कैल्प का प्राकृतिक तेल कम हो सकता है, जिससे बाल कमजोर और रूखे बनने लगते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बाल धोने की संख्या हर व्यक्ति के बालों की प्रकृति पर निर्भर करती है। जिन लोगों के बाल बहुत तैलीय होते हैं, उन्हें हफ्ते में लगभग तीन बार बाल साफ करने की जरूरत पड़ सकती है। जिन लोगों के बाल सूखे या घुंघराले होते हैं, उनके लिए हफ्ते में एक या दो बार शैंपू करना काफी माना जाता है।
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लाइफस्टाइल24 Apr, 202609:04 AMगर्मी से बढ़ रहा है आपका तनाव? जानें मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में 'साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड' कैसे करता है मदद
WHO के अनुसार, साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड संकट की स्थिति में परेशान लोगों को तुरंत मानसिक सहारा देने का एक सरल और प्रभावी तरीका है। साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड कोई दवा या थेरेपी नहीं है। यह उन लोगों के लिए सहायक प्रतिक्रिया है जो किसी संकट, आपदा या तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को सुरक्षित, जुड़ा हुआ, शांत और आशावान महसूस कराना है। यह सुनने, आराम देने और भावनात्मक समर्थन देने पर आधारित है।
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Being Ghumakkad22 Apr, 202602:35 PMहिल स्टेशन्स पर होने वाली भीड़ से हैं परेशान? इस साल बिताएं अपनी गर्मियां उत्तराखंड के छिपे हुए रत्न 'जोहार घाटी' में
पिथौरागढ़ जिले के सुदूर हिमालयी क्षेत्र में स्थित जोहार घाटी, एक ऐसी जगह है जहाँ लोगों की भीड़ अभी तक नहीं पहुँच पाई है। गोरी गंगा नदी के किनारे फैली यह घाटी तिब्बत सीमा के पास मिलम ग्लेशियर तक जाती है। यहाँ की सुंदरता और गगनचुंबी बर्फीली चोटियाँ आपको मंत्रमुग्ध कर देंगी। यहाँ आकर आपको ऐसा लगेगा मानो समय ठहर गया हो।
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लाइफस्टाइल22 Apr, 202609:15 AMसावधान! खाना लपेटने के लिए अखबार या फॉयल का करते हैं इस्तेमाल? ये आपको धीरे धीरे कर रहा है बीमार
अखबार में खाना रखना सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। अखबार छापने में जो स्याही इस्तेमाल होती है, उसमें कई तरह के रसायन होते हैं। वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार, इन स्याहियों में मौजूद रसायन जब गरम या तैलीय खाने के संपर्क में आते हैं तो वे खाने में घुलने लगते हैं। इस तरह ये हानिकारक तत्व हमारे शरीर में पहुंच सकते हैं, जो लंबे समय में पाचन तंत्र पर असर डाल सकते हैं।
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लाइफस्टाइल21 Apr, 202609:42 AMकहीं लाइफस्टाइल की वजह से इस समस्या को तो नहीं दे रहे दावत? इसे न समझें साधारण थकान
यह समस्या रीढ़ की हड्डी के ऊपरी हिस्से से जुड़ी होती है, जिसे सर्वाइकल स्पाइन कहा जाता है। यह हिस्सा सिर को सहारा देने और उसे घुमाने में मदद करता है। वैज्ञानिक रिसर्च बताते हैं कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, इस हिस्से की हड्डियां और डिस्क कमजोर होने लगती हैं। इसके अलावा, लंबे समय तक गलत पोस्चर में बैठना, लगातार स्क्रीन देखना और गर्दन को झुकाकर काम करना इस समस्या को और बढ़ा देता है। धीरे-धीरे यह स्थिति दर्द और अकड़न का कारण बन जाती है।
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लाइफस्टाइल20 Apr, 202601:09 PMलू से बचना है तो पीएं बेल का शरबत, गर्मी में शरीर को अंदर से रखेगा कूल और मिलेंगे जबरदस्त फायदे
बेल में हाई मात्रा में फाइबर होता है जो अपच, गैस, कब्ज और पेट फूलने की समस्या को जड़ से दूर करता है। यह पेट साफ रखता है और पाइल्स में भी राहत देता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, बेल का शरबत गर्मियों में शरीर को स्वस्थ रखने का पुराना और प्रभावी उपाय है।
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राज्य18 Apr, 202610:39 PMपीएम मोदी 29 अप्रैल को करेंगे गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण, प्रदेश की कनेक्टिविटी को मिलेगी रफ्तार
गंगा एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 594 किलोमीटर है, जो मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुडापुर दांदू गांव के पास समाप्त होगा। यह मार्ग पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे पूर्वी हिस्से से जोड़ते हुए प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करेगा और यात्रा को तेज, सुरक्षित व सुगम बनाएगा।
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लाइफस्टाइल18 Apr, 202603:00 PMक्या आपको भी होती है बार बार मीठा खाने की क्रेविंग? इसका मतलब शरीर के अंदर है कोई समस्या
कई बार थकान होने पर या फिर तनाव महसूस करने पर मीठा खाने की इच्छा प्रबल हो जाती है और मीठा खाने के बाद मन को शांति भी मिलती है, लेकिन फिर यह क्रेविंग बढ़ती जाती है। धीरे-धीरे रोजाना मीठा खाने का मन करता है और न खाने पर चिड़चिड़ा महसूस होता है। अगर आपके साथ ऐसा बार बार हो रहा है, तो यह शरीर के असंतुलन के संकेत हैं। जब शरीर के भीतर सभी हार्मोन संतुलित रहते हैं, तो किसी भी स्वाद की तलब नहीं लगती है, चाहे वह मीठा हो या फिर खट्टा। शरीर और मन भूख लगने पर खाने के संकेत देते हैं, किसी एक निश्चित स्वाद के नहीं।
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लाइफस्टाइल18 Apr, 202609:13 AMक्या आपका बच्चा भी पढ़ाई के नाम से चिड़चिड़ा हो जाता है? ये हो सकता है कारण
छोटी उम्र के बच्चे पढ़ाई को लेकर अपनी भावनाएं शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते हैं और ये अक्सर उनके एक्शन्स में दिखता है। जैसे पढ़ाई के नाम पर ही चिड़चिड़ा हो जाना या पढ़ने से बचने के लिए बहुत ज्यादा गुस्सा करना, बहाने बनाना, बार-बार थका हुआ महसूस करना। बहुत से माता-पिता इसे आलस मानते हैं लेकिन यह आलस नहीं बल्कि पढ़ाई का अत्याधिक दबाव है। इसके पीछे बहुत सारे कारण हो सकते हैं, जैसे माता-पिता की बहुत ज्यादा उम्मीदें, बार-बार दूसरे से बच्चे की तुलना करना, बिना ब्रेक लिए पढ़ाई करना, या छोटी गलती पर ज्यादा डांट पड़ना। ऐसे में बच्चा पढ़ाई से भागता नहीं है, बल्कि पढ़ाई के नाम से डरने लगता है।
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राज्य17 Apr, 202612:55 PMजन समस्याओं का त्वरित समाधान कराएं अधिकारी : सीएम योगी
शुक्रवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर में, महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन के दौरान सीएम योगी करीब 200 लोगों से मिले। उनके पास जाकर उनकी बातें सुनीं। उनके प्रार्थना पत्र अपने हाथ में लेकर उसका अवलोकन कर समस्या/शिकायत का संज्ञान लिया।