जंग के माहौल में भारत की बड़ी पहल... जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अराघची को किया फोन, जानें क्या हुई चर्चा
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से पश्चिम एशिया के हालात पर बातचीत की. 28 फरवरी के बाद यह दोनों नेताओं के बीच तीसरी चर्चा है.
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India-Iran Talks: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक संपर्क लगातार जारी है. इसी क्रम में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर (S. Jaishankar) ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची (Syed Abbas Araghchi) से अहम बातचीत की. इस बातचीत में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष पर विस्तार से चर्चा हुई. यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पूरे इलाके में सुरक्षा और स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ गई है.
सोशल मीडिया पर दी जानकारी
विदेश मंत्री जयशंकर ने इस बातचीत की जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की. उन्होंने बताया कि शाम के समय ईरान के विदेश मंत्री अराघची से क्षेत्र की ताजा स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई. दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि हालात को देखते हुए भारत और ईरान के बीच लगातार संपर्क बनाए रखना जरूरी है.
A detailed conversation this evening with Foreign Minister @araghchi of Iran on the latest developments regarding the ongoing conflict. We agreed to remain in touch.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) March 10, 2026
पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव
दरअसल पिछले कुछ समय से पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ गया है. फरवरी के आखिर में United States और Israel द्वारा ईरान पर हमले के बाद स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई. इसके बाद इलाके के कई देशों में जवाबी कार्रवाई और हमलों की खबरें सामने आईं. इसी वजह से क्षेत्र में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है और कई देशों के नागरिक वहां से सुरक्षित निकलने की कोशिश कर रहे हैं.
भारतीयों की सुरक्षा पर सरकार की नजर
भारत सरकार भी इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है. खास तौर पर ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों और छात्रों की सुरक्षा को लेकर सरकार काफी सतर्क है. उम्मीद जताई जा रही है कि भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच हुई बातचीत से वहां फंसे भारतीयों की मदद के लिए रास्ते आसान हो सकते हैं. इससे पहले भारत सरकार ने एक ट्रैवल एडवाइजरी जारी की थी. इसमें बताया गया था कि अगर छात्र चाहें तो वे आर्मीनिया बॉर्डर के रास्ते भारत लौट सकते हैं. हालांकि भारतीय दूतावास ने यह भी साफ किया था कि यह यात्रा छात्रों को अपने जोखिम पर करनी होगी. इसके बावजूद कई भारतीय छात्र और नागरिक सुरक्षित वापसी के विकल्प तलाश रहे हैं.
पहले भी हो चुकी है बातचीत
जानकारी देते छल्लेन कि 28 फरवरी के बाद से दोनों विदेश मंत्रियों के बीच यह तीसरी बातचीत है. इससे पहले 28 फरवरी और 5 मार्च को भी दोनों नेताओं के बीच हालात को लेकर चर्चा हो चुकी है. लगातार हो रही इन बातचीतों से यह साफ संकेत मिलता है कि भारत इस संकट को लेकर सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है.
अन्य देशों के विदेश मंत्रियों से भी चर्चा
इसी बीच विदेश मंत्री जयशंकर ने अन्य देशों के नेताओं से भी संपर्क किया है. उन्होंने जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल (Johann Wadephul) और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून (Cho Hyun) से भी बातचीत की. इन चर्चाओं में पश्चिम एशिया की स्थिति, ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ने वाले असर और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने जैसे मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ.
विदेश मंत्री जयशंकर ने संसद में दिया था बयान
इससे पहले संसद में दिए गए अपने बयान में जयशंकर ने पश्चिम एशिया के हालात को लेकर भारत की नीति भी स्पष्ट की थी. उन्होंने कहा था कि भारत हमेशा शांति और बातचीत के रास्ते को ही सबसे बेहतर मानता है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है और ऊर्जा सुरक्षा भी देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है. जयशंकर ने संसद में यह जानकारी भी दी कि संघर्ष शुरू होने के बाद से लगभग 67 हजार भारतीय नागरिक संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों से वापस भारत लौट चुके हैं. इसके अलावा ईरान ने फरवरी के अंत में तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर डॉक करने की अनुमति भी मांगी थी, जिसे भारत ने 1 मार्च को मंजूरी दे दी थी.
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बहरहाल, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत लगातार कूटनीतिक प्रयासों के जरिए हालात पर नजर बनाए हुए है. भारत की कोशिश है कि क्षेत्र में शांति बनी रहे और वहां रह रहे भारतीय नागरिक सुरक्षित अपने घर लौट सकें.
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