ईरान ने मार गिराया US का F-35 जेट... अमेरिका हुआ मजबूर, ट्रंप प्रशासन ने संसद में की 200 अरब डॉलर की फंडिंग मांग
अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ गया है. अमेरिका ने इस संघर्ष के लिए 200 अरब डॉलर की फंडिंग की मांग की है, जबकि ईरान ने अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान को निशाना बनाया.
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Middle East War Update: मिडिल ईस्ट में जारी बीते कई दिनों से जारी जंग ने अब एक नयाऔर खतरनाक मोड़ ले लिया है. अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है. हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अमेरिका ने इस संघर्ष के लिए 200 अरब डॉलर की भारी-भरकम फंडिंग की मांग कर दी है. इस बीच ईरान द्वारा अमेरिकी एफ-35 (F-35) लड़ाकू विमान को निशाना बनाए जाने की खबर ने स्थिति को और अधिक विस्फोटक बना दिया है.
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने अमेरिकी कांग्रेस से इस भारी फंडिंग की मांग की है. रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मांग ऐसे समय पर की गई है जब युद्ध खत्म होने के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे हैं. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा कि बुरे लोगों को खत्म करने के लिए संसाधनों की जरूरत होती है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार इस युद्ध को लंबे समय तक चलने वाली चुनौती के रूप में देख रही है और इसके लिए पर्याप्त वित्तीय तैयारी जरूरी है.
मैं कहीं भी नहीं भेज रहा हूँ सेना :ट्रंप
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान भी काफी चर्चा में है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह किसी भी हालत में अमेरिकी सेना को इस युद्ध में नहीं भेजेंगे. दरअसल, 19 मार्च 2026 को ओवल ऑफिस में जापान के प्रधानमंत्री साने ताकाइची से ट्रंप ने मुलाकात की है. इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अगर वह सेना भेजते भी, तो इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं करते. उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. कुछ जानकार इसे सतर्क रणनीति मान रहे हैं, तो कुछ इसे अनिश्चितता का संकेत भी बता रहे हैं.
ईरान ने किया अमेरिकी F-35 को मार गिराने का दावा
वहीं, दूसरी तरफ इज़रायल और अमेरिका की हर चुनौती को स्वीकार करते हुए ईरान भी ताबड़तोड़ तरीके से जवाबी कार्रवाई करते हुए लगातार अलग-अलग स्थानों पर अमेरिकी एयरबेस पर निशाना है. इसी कड़ी में ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी वायुसेना के अत्याधुनिक एफ-35 (F-35) स्टेल्थ फाइटर जेट को निशाना बनाया है. जानकारी के मुताबिक, यह विमान एक कॉम्बैट मिशन पर था, जब उस पर हमला हुआ. हमले के बाद उसे मिडिल ईस्ट में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी. हालांकि, ईरान का दावा है कि विमान गिर गया है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है. अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह अमेरिकी सैन्य ताकत के लिए बड़ा झटका माना जाएगा.
पश्चिमी देशों ने जारी किया संयुक्त बयान
दूसरी ओर, यूरोप और अन्य पश्चिमी देशों ने भी इस संकट को लेकर चिंता जताई है. ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और नीदरलैंड्स जैसे देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई है. खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर यह चिंता सामने आई है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है. इन देशों ने कहा कि वे इस क्षेत्र में सुरक्षित समुद्री आवाजाही बनाए रखने के लिए हर संभव सहयोग देंगे.
संयम नहीं बरता जाएगा: ईरान
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का बयान भी काफी सख्त रहा है. उन्होंने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा कि अब तक ईरान ने अपनी ताकत का केवल एक छोटा हिस्सा ही इस्तेमाल किया है. उन्होंने साफ किया कि अगर ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर दोबारा हमला हुआ, तो तेहरान किसी भी तरह का संयम नहीं बरतेगा. यह बयान इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में संघर्ष और तेज हो सकता है.
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बहरहाल, मध्य पूर्व में चल रहा यह युद्ध अब केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं रह गया है. इसमें दुनिया की बड़ी ताकतें सीधे या परोक्ष रूप से शामिल होती जा रही हैं. अमेरिका की 200 अरब डॉलर की फंडिंग मांग, ईरान की आक्रामक रणनीति और वैश्विक शक्तियों की बढ़ती चिंता इस बात की ओर इशारा करती है कि यह संकट जल्द खत्म होने वाला नहीं है. आने वाले दिनों में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि कूटनीतिक प्रयास इस आग को शांत कर पाते हैं या दुनिया एक बड़े टकराव की ओर बढ़ रही है.
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