जिसका डर था वही हुआ! भारत के सबसे बड़े गैस सप्लायर पर ईरान का मिसाइल हमला, LPG पर महंगाई का डबल अटैक
Middle East War: पहले ईरान केवल खाड़ी देशों में अमेरिकी एयरबेस और मिलिट्री ठिकानों को निशाना बनाता था, लेकिन अब उसने कदम बढ़ाया है और सीधे ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले शुरू कर दिए हैं.
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Middle East War: पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट अब पूरी तरह युद्ध के रंग में रंग गया है. भले ही यह जंग सीधे तौर पर ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच हो रही है, लेकिन इसका असर पूरी दुनिया पर महसूस हो रहा है. भारत भी इससे अछूता नहीं है. पहले ईरान केवल खाड़ी देशों में अमेरिकी एयरबेस और मिलिट्री ठिकानों को निशाना बनाता था, लेकिन अब उसने कदम बढ़ाया है और सीधे ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले शुरू कर दिए हैं.
सबसे ताजा घटना कतर में हुई. रास लफान एलएनजी कॉम्प्लेक्स ( Ras Laffan LNG Complex ), जो कतर की सबसे अहम गैस फैसिलिटी है उस पर मिसाइल हमला हुआ. इसके बाद पूरे मिडिल ईस्ट और वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई. ईरान ने कतर के अलावा सऊदी अरब और यूएई में भी तेल और गैस के ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है.
ईरान अब “घायल शेर” बन चुका है
ईरान ने अपने साउथ पार्स गैस फील्ड (South Pars Gas Field) पर हुए इजरायली हमले का बदला लेने की ठानी है. इस हमले के बाद ईरान की प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया कि अब केवल धमकी नहीं, बल्कि कार्रवाई भी हो रही है. इसका मतलब यह है कि खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ढांचे पर हमले का सिलसिला बढ़ सकता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी ऐसे महत्वपूर्ण ऊर्जा हब पर हमला होता है, तेल और गैस की कीमतें बढ़ने लगती हैं. और इसका असर सीधे देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.
🇸🇦🇮🇷 BREAKING:
There are reports of a major fire in Riyadh, which some reports are linking to an Iranian missile attack.
Official confirmation is awaited. pic.twitter.com/SeHFb8E4S0— Iran Force (@IranArmystan_) March 18, 2026
भारत पर सबसे बड़ा असर
अब सवाल यह उठता है कि इसका भारत पर क्या असर होगा. भारत अपने एलएनजी (LNG) आयात का लगभग 47 फीसदी हिस्सा कतर से ही लेता है. यानी सालाना करीब 12-13 मिलियन टन गैस कतर से आती है.
अगर कतर की गैस फैसिलिटी पर हमला लगातार होता रहा और उत्पादन प्रभावित हुआ, तो भारत को महंगी गैस खरीदनी पड़ सकती है. घरेलू सिलेंडर और उद्योगों के लिए भी कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है.
इसके अलावा, होर्मुज की खाड़ी में तनाव बढ़ने से कई गैस टैंकर फंसे हुए हैं. भारत लगातार ईरान से बातचीत कर इन्हें वापस मंगाने की कोशिश कर रहा है. फिलहाल फौरन बड़ा असर नहीं हुआ है, लेकिन अगर स्थिति बिगड़ी, तो घरेलू गैस और एलएनजी की कीमतें बढ़ सकती हैं.
भारत कहाँ से आयात करता है गैस?
भारत का गैस इंपोर्ट इस तरह बंटा हुआ है:
कतर: 47%
यूएई: 24%
अमेरिका: 11%
बाकी: ओमान, अंगोला, नाइजीरिया आदि
होर्मुज के आस-पास तनाव बढ़ने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा बढ़ता जा रहा है. कतर से गैस आने में रुकावट से कीमतें सीधे महंगी हो सकती हैं.
भविष्य में क्या हो सकता है?
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अगर ईरान के हमले जारी रहे और कतर की रास लफान फैसिलिटी पूरी तरह ठप हो जाए, तो भारत को दूसरे देशों से महंगी गैस खरीदनी पड़ेगी. इसका असर घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों पर भी पड़ेगा.
अभी स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन यह केवल शुरुआत है. विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में जो कुछ भी हो रहा है, उसका असर भारत और पूरी दुनिया की ऊर्जा मार्केट पर लंबे समय तक दिखाई देगा.
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