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जलीय जीवों का पंसदीदा ठिकाना बना चंबल! डॉल्फिन का कुनबा बढ़ा तो मगरमच्छ का हुआ विस्तार, प्रवासी पक्षी भी खुश

चंबल अभयारण्य जलीय जीवों से गुलजार है यहां डॉल्फिन और घड़ियालों की संख्या में अप्रत्याशित इजाफा देखा गया है. जो प्रकृति के लिए बेहद सुखद माना जा रहा है.

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21 Mar 2026
( Updated: 21 Mar 2026
06:23 PM )
जलीय जीवों का पंसदीदा ठिकाना बना चंबल! डॉल्फिन का कुनबा बढ़ा तो मगरमच्छ का हुआ विस्तार, प्रवासी पक्षी भी खुश
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चंबल अभयारण्य से एक सुखद खबर आई है. प्रकृति की गोद में बसा यह केंद्र अब जलीय जीवों से संपन्न हो गया है. हालिया सर्वे में यहां 440 नन्हें मगरमच्छों के जन्म के बाद उनकी संख्या बढ़कर 1512 हो गई है, जबकि घड़ियालों की संख्या 2938 तक पहुंच गई है. 

मुरैना जिले से गुजरने वाली चंबल नदी एक बार फिर जीवन से लबालब दिखाई दे रही है. जलीय जीवों और प्रवासी पक्षियों की वार्षिक गणना 2025/26 पूरी हो चुकी है और इस बार के आंकड़े उत्साह बढ़ाने वाले हैं. 

कब हुआ सर्वे और क्या है खुशखबरी? 

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बताया जा रहा है डॉल्फिन और दुर्लभ इंडियन स्कीमर की मौजूदगी भी बढ़ी है. खास बात यह कि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में मुरैना से पचनदा तक का इलाका सबसे सुरक्षित पाया गया है. 
4 से 16 फरवरी के बीच सर्वे किया गया था. जिसमें चंबल के स्वस्थ पर्यावरण की मजबूत तस्वीर पेश की. 

435 किलोमीटर क्षेत्र में फैले राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में 12 दिन चले सर्वे ने साफ कर दिया कि नदी का पारिस्थितिक तंत्र लगातार मजबूत हो रहा है. मुरैना से NMF न्यूज के संवाददाता सन्तोष शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे की शुरुआत बड़ौदिया-बिंदी घाट से हुई और अटारघाट, राजघाट होते हुए पचनदा तक पूरी की गई. घड़ियालों के फैलाव को देखते हुए सर्वे टीम पार्वती नदी में भी करीब 60 किलोमीटर अंदर तक पहुंची. साफ मौसम और बेहतर विजिबिलिटी के कारण इस बार गणना अपेक्षाकृत आसान रही, जिससे आंकड़ों की सटीकता भी बढ़ी. 

डॉल्फिन पर आई ये सुखद खबर 

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राष्ट्रीय चम्बल अभ्यारण्य घड़ियाल पुनर्वास केन्द्र के प्रभारी ज्योति डन्डौतिया ने बताया कि सुखद खबर राष्ट्रीय जलीय जीव गंगेटिक डॉल्फिन को लेकर सामने आई है. जहां पहले की अपेक्षा इस बार इनकी संख्या में रिकॉर्ड छलांग लगी और पहले से बढ़कर कुल संख्या 155 तक पहुंच गई. वहीं घड़ियालों की संख्या पहले से बढ़कर 2938 हो गई, जबकि दुर्लभ इंडियन स्कीमर की संख्या बढ़कर 1055 तक पहुंच गई. 

ड्रॉन कैमरा, दूरबीन और हाई क्वालिटी कैमरों का इस्तेमाल

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इस सर्वे में पानी की सतह, रेत के टापुओं और किनारों पर बैठे जीवों की बारीकी से गिनती की गई. जिसमें ड्रॉन कैमरा, दूरबीन और हाई क्वालिटी कैमरों का इस्तेमाल किया गया. वहीं इस अभियान में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी और वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट के विशेषज्ञ भी शामिल रहे. कुल मिलाकर चंबल का यह बढ़ता जलीय संसार सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि स्वच्छ और संतुलित प्रकृति की जिंदा तस्वीर है. यहां बहती धारा अब जीवन का भरोसा भी बहा रही है. 

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