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LPG का सस्ता विकल्प तैयार... CM योगी ने अधिकारियों को दिया आदेश, UP की 7527 गौशालाओं से शुरू होगा बड़ा मिशन

यूपी की योगी सरकार ईंधन संकट को देखते हुए 7527 गौशालाओं में गोबर गैस प्लांट लगाने की तैयारी कर रही है. इसका उद्देश्य एलपीजी का सस्ता विकल्प तैयार करना और पर्यावरण संरक्षण करना है.

LPG का सस्ता विकल्प तैयार... CM योगी ने अधिकारियों को दिया आदेश, UP की 7527 गौशालाओं से शुरू होगा बड़ा मिशन
Yogi Adityanath (File Photo)
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मिडिल में ईस्ट में चल रही जंग ने वैश्विक तनाव को बढ़ा दिया है. ऐसे में ईंधन संकट की चर्चाओं को लेरक  उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है. पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति पर मंडराते खतरे को देखते हुए अब राज्य में बड़े पैमाने पर गोबर गैस प्लांट लगाने की योजना बनाई गई है. इस पहल का मकसद एलपीजी गैस का सस्ता और स्थानीय विकल्प तैयार करना है, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके और भविष्य के संकट से निपटा जा सके.

7527 गौशालाओं से होगी योजना की शुरुआत

सरकार की योजना के तहत प्रदेश की 7527 गौशालाओं से इस मिशन की शुरुआत की जाएगी. फिलहाल करीब 80 बड़ी गौशालाओं में गोबर गैस प्लांट पहले से ही काम कर रहे हैं और सफल माने जा रहे हैं. इन्हीं मॉडल्स को अब बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा. आने वाले समय में पशुपालकों को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा, जिससे गांव-गांव तक इसका फायदा पहुंचे.

गांवों को मिलेगा सीधा लाभ

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उत्तर प्रदेश में इस समय 12.39 लाख से ज्यादा गोवंशीय पशु विभिन्न गौशालाओं में पाले जा रहे हैं. अब तक इनसे मिलने वाला गोबर सिर्फ खाद या कम्पोस्ट तक सीमित था, लेकिन अब इसे ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी है. इससे ग्रामीण इलाकों में सस्ती गैस उपलब्ध होगी और एलपीजी पर निर्भरता कम हो सकती है. यह कदम खासतौर पर उन परिवारों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है, जो बढ़ती गैस कीमतों से परेशान हैं.

सरकार की रणनीति और मिशन मोड में काम

उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, यह योजना संकट के समय लोगों को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद करेगी. उन्होंने बताया कि योगी आदित्यनाथ ने इस योजना को मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका लाभ मिल सके.

गोवंश की बड़ी ताकत

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प्रदेश में 7,527 गो-आश्रय स्थल हैं, जहां लाखों गोवंश पाले जा रहे हैं. इनमें अस्थायी और स्थायी दोनों तरह के केंद्र शामिल हैं. इसके अलावा मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत हजारों पशुपालकों को भी गोवंश सौंपे गए हैं. यह पूरी व्यवस्था अब ऊर्जा उत्पादन का एक मजबूत आधार बन सकती है.

गोरक्ष पीठ बना उदाहरण

गोरक्ष पीठ में पहले से ही गोबर गैस प्लांट का सफल उपयोग किया जा रहा है, जहां इससे भोजन बनाने और खेतों के लिए खाद तैयार की जा रही है. यही मॉडल अब पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी है. इससे न सिर्फ सस्ती ऊर्जा मिलेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी बड़ा योगदान होगा.

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बहरहाल, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का यह कदम सिर्फ ईंधन संकट से निपटने का उपाय नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल भविष्य की ओर एक मजबूत पहल माना जा रहा है.

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