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'TMC के पत्र में दिखती है गुजरात विरोधी मानसिकता, ममता बनर्जी की पार्टी पर भड़के BJP नेता सुवेंदु अधिकारी

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा से भाजपा विधायक और नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए एक पत्र शेयर करते हुए उन्होंने TMC को गुजरात विरोधी मानसिकता वाला बताया है.

'TMC के पत्र में दिखती है गुजरात विरोधी मानसिकता, ममता बनर्जी की पार्टी पर भड़के BJP नेता सुवेंदु अधिकारी
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पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी गुरुवार को टीएमसी के एक पत्र को लेकर भड़क उठे हैं. उन्होंने एक पत्र साझा कर ममता बनर्जी की पार्टी की मानसिकता पर कई बड़े सवाल खड़े किए. पश्चिम बंगाल विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने इस पत्र पर गुजरात विरोधी मानसिकता का आरोप लगाया. 

भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी पर लगाया बड़ा आरोप

पश्चिम बंगाल विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर टीएमसी का पत्र शेयर करते हुए लिखा कि 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का 18 जून 2025 का पत्र, जिसमें उन्होंने 80-कालीगंज विधानसभा उपचुनाव के लिए वेबकास्टिंग एजेंसी के चयन पर सवाल उठाया है, जो स्पष्ट रूप से गुजरात विरोधी मानसिकता को दर्शाता है. पत्र में अहमदाबाद, गुजरात की एक एजेंसी के चयन पर चिंता जताई गई है और बार-बार इसके गुजरात मूल को रेखांकित किया गया है, जो गुजरातियों के खिलाफ क्षेत्रीय भेदभाव को दर्शाता है.'

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गुजरात भारत का हिस्सा है - सुवेंदु अधिकारी 

भाजपा नेता ने टीएमसी आरोप लगाते हुए  कहा कि 'गुजरात भारत का हिस्सा है और वहां की कोई भी कंपनी कानूनी तौर पर किसी भी टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा ले सकती है. एजेंसी का चयन सभी मानदंडों को पूरा करने के बाद हुआ होगा, लेकिन टीएमसी इसे निशाना बना रही है, क्योंकि यह उनकी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है. वह अपने विरोधियों को 'बाहरी' करार देकर हमला करते हैं, जब यह उनके लिए सुविधाजनक होता है. मगर, जब योग्य और कुशल बंगाली अधिकारियों को चुनने की बारी आती है, तो टीएमसी सरकार उन्हें नजरअंदाज कर 'बाहरी' लोगों को चुनती है, जो उनके इशारों पर काम करें.'

'योग्य बंगाली अधिकारियों को नजरंदाज क्यों किया गया?' 

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सुवेंदु अधिकारी ने इस पोस्ट में कई नामों का भी जिक्र किया है. उन्होंने लिखा कि 'अत्री भट्टाचार्य (आईएएस, 1989 बैच) अप्रैल 2026 में रिटायर हो रहे हैं, वहीं मनोज पंत (आईएएस, 1991 बैच, उत्तराखंड) जून 2025 में रिटायर हो रहे हैं. इनके बावजूद अत्री भट्टाचार्य और सुब्रत गुप्ता (आईएएस, 1990 बैच) जैसे योग्य बंगाली अधिकारियों को नजरअंदाज कर मनोज पंत को मुख्य सचिव क्यों बनाया गया, जो दो बंगाली अधिकारियों से जूनियर हैं? मनोज पंत का कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव क्यों भेजा गया, जबकि भट्टाचार्य के पास अभी 10 महीने की सेवा बाकी है और वह मुख्य सचिव बन सकते हैं?" भाजपा नेता ने यह भी कहा कि "संजय मुखर्जी (आईपीएस, 1989 बैच), पश्चिम बंगाल के सबसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को नजरअंदाज कर उनके जूनियर राजीव कुमार (आईपीएस, उत्तर प्रदेश) को डीजीपी क्यों बनाया गया?"

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