उत्तराखंड में अवैध मजारों और मदरसों पर चला धामी सरकार का बुलडोजर, उधम सिंह नगर में सरकारी जमीन पर था सालों से कब्जा
उत्तराखंड में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज है. उधम सिंह नगर के गूलरभोज-दिनेशपुर में प्रशासन ने सिंचाई विभाग की जमीन पर बनी कई अवैध धार्मिक संरचनाओं को तड़के ध्वस्त कर दिया. पहले नोटिस दिए गए थे, लेकिन दस्तावेज न मिलने और कोर्ट से राहत न मिलने पर यह कार्रवाई की गई.
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देवभूमि उत्तराखंड में अवैध निर्माण के खिलाफ सरकार का सख्त रुख अब जमीन पर साफ नजर आ रहा है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर पूरे प्रदेश में बुलडोजर एक्शन लगातार जारी है. इसी क्रम में उधम सिंह नगर जिले के गूलरभोज-दिनेशपुर क्षेत्र में प्रशासन ने तड़के बड़ी कार्रवाई करते हुए कई अवैध धार्मिक संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया.
सुबह-सुबह चला प्रशासन का बुलडोजर
जानकारी के मुताबिक ये संरचनाएं सिंचाई विभाग की भूमि पर अवैध कब्जा करके बनाई गई थीं. प्रशासन ने करीब तीन महीने पहले सर्वे के बाद संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर जमीन और निर्माण से जुड़े दस्तावेज मांगे थे. तय समय सीमा के भीतर कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं किए गए, जिसके बाद कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया.
कोर्ट से राहत नहीं, फिर कार्रवाई तेज
सिंचाई विभाग ने ठंडा नाले क्षेत्र में भी अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस दिए थे. कुछ कब्जेदारों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली. बाद में सुप्रीम कोर्ट से स्थगन आदेश मिला, हालांकि यह राहत सभी संरचनाओं पर लागू नहीं थी. जिन धार्मिक ढांचों पर कोई रोक नहीं थी, उन्हें प्रशासन ने पुलिस बल के साथ तड़के हटवा दिया.
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— NMF NEWS (@NMFNEWS2) April 18, 2026
सरकार की प्राथमिकता बना अतिक्रमण हटाना
जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने साफ कहा कि सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराना सरकार की प्राथमिकता है. एडीएम पंकज उपाध्याय के अनुसार जिन तीन धार्मिक संरचनाओं को हटाया गया, उनके लिए न तो कोई अनुमति ली गई थी और न ही भूमि स्वामित्व के कागज दिखाए गए. पूरी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार की गई है.
अब तक सैकड़ों ढांचे हो चुके ध्वस्त
धामी सरकार राज्यभर में अवैध मजारों और अन्य अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चला रही है. अब तक 580 से ज्यादा अवैध संरचनाओं को कानूनी प्रक्रिया के तहत हटाया जा चुका है. सरकार का कहना है कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक स्वरूप को बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है.
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बता दें कि उत्तराखंड की प्रदेश सरकार के सख्त रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज हो सकता है. प्रशासन का संदेश साफ है कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. ऐसे में राज्य में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई का दायरा और बढ़ने की संभावना है.
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