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पंजाब में संजीवनी बनकर उभरी ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’, ऑर्थोपेडिक उपचार की भारी डिमांड, 45 लाख से ज्यादा लोगों ने कराया रजिस्ट्रेशन

पंजाब में CM भगवंत मान की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' का असर दिखने लगा है. लोगों ने इसके तहत भारी संख्या में हड्डियों एवं जोड़ों संबंधी इलाज के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है. इससे पता चलता है कि कैसे ये योजना लोगों के लिए संजीवनी बनकर उभरी है.

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03 Jun 2026
( Updated: 03 Jun 2026
01:09 PM )
पंजाब में संजीवनी बनकर उभरी ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’, ऑर्थोपेडिक उपचार की भारी डिमांड, 45 लाख से ज्यादा लोगों ने कराया रजिस्ट्रेशन
Image Source: @BhagwantMann/ X
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पंजाब में हड्डियों, जोड़ों और दुर्घटना से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' के आंकड़ों के अनुसार, ऑर्थोपेडिक उपचार राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरे हैं.

पंजाब में हड्डी और जोड़ों संबंधी इलाज के लिए भारी रजिस्ट्रेशन

इस स्थिति को उजागर करते हुए राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों से पता चला है कि योजना के तहत अब तक हड्डी, जोड़ और ट्रॉमा से संबंधित उपचारों पर ₹84 करोड़ से अधिक ख़र्च किया जा चुका है. यह बढ़ती सर्जिकल ज़रूरतों और सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ ऑर्थोपेडिक सेवाओं तक विस्तारित पहुँच को दर्शाता है.

नी रिप्लेसमेंट इलाज का लोगों ने उठाया सबसे ज्यादा फायदा

आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत सबसे अधिक घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) किए गए हैं, इसके बाद कूल्हे की सर्जरी और प्लेट, नेल्स व अन्य इम्प्लांट्स के माध्यम से फ्रैक्चर फिक्सेशन के मामले बड़ी संख्या में सामने आए हैं. ये प्रक्रियाएँ अब जिला और बड़े सरकारी अस्पतालों में कैशलेस उपचार के तहत नियमित रूप से की जा रही हैं.

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सेहत योजना के लिए 45 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन

मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पंजाब में अब तक 45 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं, जो कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक उपयोग को दर्शाता है. लुधियाना जिले में 4.8 लाख से अधिक और पटियाला में लगभग 4.1 लाख लाभार्थी योजना के तहत दर्ज किए गए हैं.

ऑर्थोपेडिक मामलों में बढ़ोतरी, जनस्वास्थ्य में आ रहे व्यापक बदलाव को भी दर्शाती है. विशेष रूप से बढ़ती उम्र की आबादी में जोड़ों के घिसाव, लगातार दर्द और चलने-फिरने में दिक्कत जैसी समस्याएँ अधिक देखने को मिल रही हैं. सरकारी अस्पतालों में घुटनों और कूल्हों की ख़राबी, पुराना जोड़ दर्द और चलने-फिरने में कठिनाई वाले मरीज़ों की संख्या लगातार बढ़ रही है.

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महंगे ऑर्थोपेडिक उपचार में लोगों का सहारा बन रही सेहत योजना

ऑर्थोपेडिक उपचारों में अक्सर महँगे इम्प्लांट्स, लंबा इलाज और पुनर्वास की आवश्यकता होती है, जो परिवारों पर परंपरागत रूप से भारी आर्थिक बोझ डालते रहे हैं. राजपुरा के निकट खेड़ा गज्जू निवासी 43 वर्षीय गुलशन तनेजा के लिए यह स्थिति व्यक्तिगत रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुई.

लोगों के सुखद अनुभव योजना की सफलता की कहानी कर रही बयां

फैक्ट्री में काम करते समय 'तनेजा' के साथ एक हादसा हो गया था. इसके बाद चलना उनके लिए मुश्किल होता गया. अचानक उठने वाला दर्द उन्हें बीच कदम पर रोक देता था और दीवार का सहारा लेने पर मजबूर कर देता था. घुटने के आसपास सूजन लगातार बनी रही और जकड़न ने सामान्य गतिविधियों को भी कठिन बना दिया. कई बार खड़े होने से पहले उन्हें रुककर सोचना पड़ता था कि उनका पैर उनका भार सह पाएगा या नहीं.

उन्हें 6 मई को राजिंदरा अस्पताल, पटियाला में भर्ती करवाया गया और अगले दिन लिगामेंट टियर का उपचार किया गया. डॉक्टरों ने गंभीर जोड़ दर्द, सूजन, अस्थिरता और वजन सहने में कठिनाई जैसे लक्षण दर्ज किए.

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मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत उन्हें ₹86,750 का उपचार पूरी तरह कैशलेस उपलब्ध करवाया गया. 12 मई को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली और वे घर लौटे, बिना उस भारी मेडिकल बिल की चिंता के जो उनकी बीमारी के बोझ को और बढ़ा सकता था.

गुलशन तनेजा ने कहा, “मैं अब धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहा हूँ. सेहत कार्ड का शुक्रिया कि मुझे अपने इलाज के लिए कोई पैसा नहीं देना पड़ा. यह योजना हमारे जैसे परिवारों के जेब से होने वाले ख़र्च को कम कर रही है और महँगे इलाज को सुलभ बना रही है.”

सेहत योजना के तहत क्या कर रही सर?

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “ऑर्थोपेडिक बीमारियों का बोझ लगातार तेज़ी से बढ़ रहा है, जिससे पंजाब में सुलभ और किफायती सर्जिकल देखभाल को और मज़बूत करने की आवश्यकता सामने आई है." उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत सरकार हज़ारों मरीज़ों को कैशलेस घुटना, कूल्हा और ट्रॉमा उपचार उपलब्ध करवा रही है, जिससे आर्थिक बोझ कम हो रहा है और मरीज़ों की गतिशीलता, रिकवरी तथा जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो रही है.

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उन्होंने कहा कि महज चार महीनों में ₹84 करोड़ से अधिक का ख़र्च केवल बढ़ते स्वास्थ्य उपयोग को ही नहीं दर्शाता, बल्कि यह राज्य में गतिशीलता बहाल करने, विकलांगता कम करने और मरीज़ों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़े बदलाव का संकेत है.

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