'एक नहीं, कई जंगों में दिया हमारा साथ...', इजरायल से दोस्ती पर सवाल उठा रहा था विपक्ष, जयशंकर ने कर दी बोलती बंद
सर्वदलीय बैठक में मिडिल ईस्ट के हालातों पर चर्चा हुई. इस दौरान विपक्ष ने इजरायल और अमेरिका के साथ भारत की करीबी पर सवाल उठाए. जिस पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक-एक कर कई वजहें बता दीं.
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All Party Meeting: पश्चिम एशिया के भीषण तनाव पर भारत में भी घमासान मचा है. संसद के दोनों सदनों में PM मोदी ईरान-US की जंग और वैश्विक हालातों पर संबोधित कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने भारत की स्थिति, सरकार के कदम और रुख को साफ किया. इस मुद्दे पर विपक्ष और सरकार के बीच खींचतान भी दिखी जिसकी गूंज सर्वदलीय बैठक में साफ दिखी. जिसमें ईरान के साथ रिश्ते और इजरायल के साथ दोस्ती का मुद्दा भी उठा. जिस पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जवाब दिया.
भारत इजरायल के ज्यादा करीब क्यों है? इसी तरह के सवाल पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जवाब दिया. उन्होंने कहा, इजरायल ने कई युद्ध में हमारी मदद की, साथ ही साथ वह भारत का डिफेंस पार्टनर भी है. इजरायल से भारत को रक्षा तकनीक में बड़ी मदद मिलती है.
सांसद सुप्रिया सुले ने उठाया था सवाल
दरअसल, सर्वदलीय बैठक के दौरान NCP (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने पूछा था कि भारत को इजरायल और अमेरिका से रिश्ते बनाए रखने में फायदा क्या है? जिस पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत के कूटनीतिक स्टैंड के बारे में बताया. जयशंकर ने कहा, इजरायल हमारा करीबी साझेदार है जिसने कई जंग में मदद की है. दूसरी ओर अमेरिका भी भारत का कारोबारी पार्टनर है. उसी के जरिए हाई एंड टेक्नॉलजी सपोर्ट मिलता है. इजरायल से भी टेक्निकल सपोर्ट भारत को मिलता है.
माना जा रहा है एस जयशंकर का इशारा पाकिस्तान से युद्ध के दौरान मिली इजरायली मदद की ओर था. हालांकि सवाल के जवाब में उन्होंने साफ तौर पर इजरायल से क्या मदद मिली थी. इसके बारे में नहीं बताया.
ईरान के साथ रिश्तों पर विदेश मंत्री ने क्या कहा?
विदेश मंत्री ने विपक्ष के उन आरोपों को भी खारिज किया. जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत पर दुख न जताने, चुप्पी साधने और देरी से प्रतिक्रिया के दावे किए गए थे. एस जयशंकर ने इन आरोपों को गलत करार दिया. उन्होंने कहा, विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने उनकी मौत को लेकर शोक संवेदना प्रकट की थी और संदेश भी लिखा था. इस दौरान यह भी सवाल विदेश मंत्री से हुआ कि ईरान पर हमले की निंदा ना करने से शिया मुल्क के साथ हमारे रिश्ते कमजोर हुए. इस पर उन्होंने कहा कि सऊदी अरब और UAE में ईरान की ओर से हमले किए गए थे. हमें वहां की भी चिंता थी क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय वहां भी रहते हैं. इन दो देशों में ही करीब 80 लाख भारतीय बसे हैं. ऐसे में वहां ईरानी ड्रोन्स और मिसाइलों से जो हमले हुए, हमें उसे लेकर भी चिंता थी और भारतीयों के लिहाज से हम सोच रहे थे.
उन्होंने कहा, ईरान के साथ हमारे संबंध पहले की तरह कायम हैं. भारत के साथ दोस्ताना संबंधों का ही नतीजा है कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत के जहाजों को गुजरने दिया.
‘पाकिस्तान दलाल, भारत नहीं’
एस जयशंकर ने सर्वदलीय बैठक में जंग के लिए मध्यस्थता न करने के सवाल पर भी जवाब दिया. उन्होंने कांग्रेस नेता तारिक अनवर के उस बयान पर जवाब दिया, जिसमें उन्होंने कहा था, पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जबकि भारत मूकदर्शक बना हुआ है.
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कांग्रेस नेता तारिक अनवर को करारा जवाब देते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जवाब दिया. उन्होंने कहा, भारत पाकिस्तान जैसा दलाल देश नहीं है और हम किसी के लिए भी मध्यस्थता नहीं करते. जयशंकर ने कहा, इस मामले में पाकिस्तान के मध्यस्थता प्रयासों में कुछ भी नया नहीं है क्योंकि उस देश का इस्तेमाल अमेरिका 1981 से लगातार इस्तेमाल कर रहा है. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, हम दलाल राष्ट्र नहीं है.
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