राज्यसभा में बवाल! जया बच्चन और स्पीकर के बीच तीखी नोकझोंक, बोलीं- समय दो या फांसी पर चढ़ा दो
राज्यसभा में ट्रांसजेंडर बिल पर चर्चा के दौरान जया बच्चन नाराज हो गईं. ट्रेजरी बेंच के शोर से उनका ध्यान भटका और स्पीकर से तीखी नोकझोंक हो गई. गुस्से में उन्होंने कहा कि जितना समय देना है दे दीजिए, फांसी पर चढ़ा दीजिए.
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देश की संसद के सर्वोच्च सदन राज्यसभा में बुधवार को ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान माहौल अचानक गर्म हो गया. इस दौरान समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन अपनी बात रखते हुए नाराज नजर आईं और सदन में उनकी स्पीकर से तीखी नोकझोंक हो गई. मामला इतना बढ़ गया कि उन्होंने गुस्से में कह दिया कि जितना समय देना है दे दीजिए, फांसी पर चढ़ा दीजिए.
दरअसल, जब जया बच्चन इस विधेयक पर बोलने के लिए खड़ी हुईं, उसी समय ट्रेजरी बेंच के कुछ सदस्य आपस में बातचीत कर रहे थे. इससे उनका ध्यान भटक गया और उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करनी शुरू कर दी. इसके बाद देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया.
जया बच्चन ने जताई नाराजगी
अपने भाषण की शुरुआत में जया बच्चन ने रामनवमी की बधाई दी, लेकिन तुरंत ही वह रुक गईं. उन्होंने कहा कि जब कोई और बात करता है तो ध्यान वहां चला जाता है और जब वह बोलती हैं तो सबको उनकी बात सुननी चाहिए. इस पर स्पीकर ने उन्हें बोलते रहने को कहा और अन्य सदस्यों को शांत रहने के निर्देश दिए. लेकिन जया बच्चन इससे संतुष्ट नहीं हुईं. उन्होंने नाराजगी भरे लहजे में कहा, 'बच्चे हैं, बैठ जाओ.' इसके बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया. जया बच्चन ने कहा कि समय आपके हाथ में है, जितना देना है दे दीजिए, फांसी पर चढ़ा दीजिए. उनका यह बयान सदन में चर्चा का विषय बन गया.
स्पीकर से सीधी बहस
स्पीकर ने उन्हें समय का सही उपयोग करने की सलाह दी, लेकिन जया बच्चन ने जवाब देते हुए कहा कि उन्हें टोकने के बजाय उन सदस्यों को रोका जाए जो बीच में बात कर रहे हैं. उन्होंने साफ कहा कि अगर सदस्य आपकी बात नहीं सुनते तो उनके खिलाफ कार्रवाई कीजिए. इस पर स्पीकर ने भी कहा कि कभी इधर के सदस्य नहीं सुनते तो कभी उधर के. बातचीत के दौरान जया बच्चन ने यह तक कह दिया कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो वह वेल में चली जाएंगी. यह बयान बताता है कि उस समय सदन का माहौल कितना तनावपूर्ण हो चुका था.
विपक्ष ने विधेयक को बताया अन्यायपूर्ण
इस बीच, विपक्षी दलों ने भी इस विधेयक पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी. कई दलों ने इसे ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ अन्याय करार दिया और इसे प्रवर समिति में भेजने की मांग की. उनका कहना था कि इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा जरूरी है, ताकि सभी पक्षों की राय सामने आ सके. जया बच्चन ने भी विधेयक पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे अभी लाने की क्या जरूरत थी. उन्होंने कहा कि यह बजट सत्र है और इस समय वित्तीय मामलों पर चर्चा होनी चाहिए थी. उन्होंने इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति में भेजने की मांग की, ताकि इसे और विस्तार से समझा जा सके.
ट्रांसजेंडर समुदाय को लेकर उठे सवाल
जया बच्चन ने अपने बयान में कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय सामाजिक रूप से कमजोर और अल्पसंख्यक वर्ग है. उनके साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय परंपरा में इस समुदाय को सम्मान मिला है. भगवान राम के समय से ही इन्हें आशीर्वाद प्राप्त है और शुभ अवसरों पर इन्हें बुलाया जाता रहा है. उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि इस समुदाय की बददुआ नहीं लेनी चाहिए.
सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने
वहीं, सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष सिर्फ राजनीति कर रहा है. उनका कहना था कि जब विपक्ष सत्ता में था, तब उसने इस समुदाय के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया. तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय दबाव के अनुसार काम करती है. उन्होंने यह भी कहा कि देश में ट्रांसजेंडर समुदाय के केवल 32,000 लोग ही रजिस्टर्ड हैं और उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है. उन्होंने विधेयक को जल्दबाजी में लाया गया बताते हुए इसे प्रवर समिति में भेजने की मांग दोहराई.
बताते चलें कि राज्यसभा में यह मुद्दा सिर्फ एक विधेयक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक न्याय, संवेदनशीलता और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन गया. अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या इस विधेयक को आगे विचार के लिए समिति के पास भेजा जाता है या नहीं. फिलहाल, यह साफ है कि इस मुद्दे पर सहमति बनाना आसान नहीं होगा और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी बहस देखने को मिल सकती है.
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