×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

UGC सचिव मनीष जोशी का इस्तीफा, UGC Equity विवाद के बाद पहला बड़ा एक्शन! श्यामा रथ को मिला अतिरिक्त प्रभार

UGC रेगुलेशन विवाद के बाद प्रो. मनीष जोशी को कार्यमुक्त कर दिया गया है. भले सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद मामला ठंठा पड़ गया था, लेकिन सरकार भूली नहीं थी कि इक्विटी नोटिफिकेशन के बाद उसकी काफी किरकिरी हुई थी. इसके बाद ही सरकार ने कड़ा एक्शन लिया है

Author
11 Apr 2026
( Updated: 11 Apr 2026
10:10 AM )
UGC सचिव मनीष जोशी का इस्तीफा, UGC Equity विवाद के बाद पहला बड़ा एक्शन! श्यामा रथ को मिला अतिरिक्त प्रभार
Prof. Manish Joshi Resigns (File Photo)
Advertisement


UGC के सचिव प्रोफेसर मनीष जोशी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्हें कार्यमुक्त कर भी दिया गया है, जो कि 25 अप्रैल से प्रभावी होगा. उन्हें सरकार और शिक्षा मंत्रालय की बिना मंजूरी के समता विनियम 2026 को लेकर नोटिफिकेशन जारी करना भारी पड़ गया. इस पूरे मामले ने सरकार की काफी किरकिरी कराई और उसे बैकफुट पर जाना पड़ा. पूरे देश में इसके बाद विरोध-प्रदर्शन हुए, जिससे कि सरकरा की छवि को धक्का लगा. इसी के बाद उन पर कार्रवाई की तलवार लटक रही थी. हालांकि कोर्ट के आदेश के बाद मामला ठंडा पड़ा और सरकार मे उच्च स्तर पर सफाई देकर विवाद को शांत किया, लेकिन प्रो. जोशी का इन सब से बचकर निकलना मुश्किल लग रहा था. हुआ भी वही, उन्हें निजी कारणों से पद छोड़ना पड़ गया.

प्रो. श्यामा रथ को UGC सचिव का अतिरिक्त प्रभार

UGC विवाद ने सराकर को इतना परेशान किया था कि इस कारण सामाजिक और राजनीतिक लेवल तक पर उसे काफी परेशानी हुई और सूत्रों के हवाले से सामने आई खबर के मुताबिक RSS तक ने भी अपनी नाराजगी जताई थी. अब जोशी की जगह अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की सदस्य सचिव प्रो. श्यामा रथ को यह अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है.

UGC Equity रेगुलेशन पर खड़ा हुआ था विवाद

आपको बता दें कि शुक्रवार को यह निर्णय यूजीसी के सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से लिया गया है. हालांकि यह निर्णय 25 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा. यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब देश में उच्च शिक्षा व्यवस्था, विशेषकर यूजीसी की नीतियों और नियमों को लेकर व्यापक बहस चल रही है. प्रो. मनीष जोशी के कार्यकाल के दौरान यूजीसी ने कई महत्वपूर्ण पहलें कीं, जिनमें विश्वविद्यालयों में समानता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के प्रयास शामिल थे. हालांकि, हाल ही में जारी यूजीसी के नए नियमों ने देशभर में विवाद खड़ा कर दिया है.

Advertisement

दरअसल, जनवरी 2026 में यूजीसी ने उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा के नाम पर नए नियम लागू किए थे. इन नियमों के तहत सभी संस्थानों में 'इक्विटी कमेटी' बनाने और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने का प्रावधान किया गया. लेकिन इन नियमों को लेकर कई पक्षों ने आपत्ति जताई. कुछ याचिकाओं में कहा गया कि नियमों की परिभाषाएं अस्पष्ट हैं और ये सभी वर्गों के लिए समान रूप से लागू नहीं होते. यही नहीं छात्रों समेत समाज के कई वर्गों का मानना था कि इन नियमों से उल्टा भेदभाव की स्थिति पैदा हो सकती है.

सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था बड़ा फैसला

इस विवाद ने कानूनी रूप ले लिया और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. मामले की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने इन नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी. कोर्ट में प्रारंभिक सुनवाई के दौरान कहा गया कि नियमों की भाषा अस्पष्ट है और इनके दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इसके बाद फिलहाल पुराने 2012 के नियमों को फिलहाल लागू रखने का निर्देश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा गया कि ऐसे नियम समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं और इनके संवैधानिक पहलुओं की गहराई से जांच आवश्यक है.

इसके अलावा, यह मामला 2019 से जुड़ी याचिकाओं से उत्पन्न हुआ था, जिसमें उच्च शिक्षा संस्थानों में कथित भेदभाव के मामलों को लेकर सख्त नियमों की मांग की गई थी. वर्तमान में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और इसकी अगली सुनवाई के आधार पर इन नियमों का भविष्य तय होगा. इस बीच, देशभर में छात्र संगठनों, शिक्षकों और सामाजिक समूहों के बीच इस मुद्दे पर लगातार बहस जारी है.

यह भी पढ़ें

ऐसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण समय में प्रो. श्यामा राठ को यूजीसी के सचिव का अतिरिक्त प्रभार मिलना महत्वपूर्ण माना जा रहा है. नई सचिव के सामने अब न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियां होंगी, बल्कि इस विवादित नीति को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने, सभी पक्षों को साथ लेकर चलने और उच्च शिक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने की भी बड़ी चुनौती होगी.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें