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लोकसभा में वामपंथी विचारधारा पर बरसे अमित शाह, बोले- वामपंथियों ने आदिवासियों को बहकाया

लोकसभा में अमित शाह ने वामपंथी विचारधारा पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि वामपंथियों ने आदिवासियों को गुमराह कर उनका विकास रोका है.

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31 Mar 2026
( Updated: 31 Mar 2026
08:00 AM )
लोकसभा में वामपंथी विचारधारा पर बरसे अमित शाह, बोले- वामपंथियों ने आदिवासियों को बहकाया
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त करने के प्रयासों पर चल रही चर्चा के दौरान सदन को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि वामपंथी विचारधारा के कारण ये नक्सलवाद फैला है, जिसे राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने के लिए इंदिरा गांधी ने भी स्वीकार किया था. उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पूरे देश के सामने स्वीकार किया था कि कश्मीर और नॉर्थ-ईस्ट की तुलना में भी देश में आंतरिक सुरक्षा की सबसे बड़ी समस्या माओवादी हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ. 2014 में परिवर्तन हुआ और नरेंद्र मोदी के शासन में कई सारी वर्षों पुरानी समस्याओं का निराकरण हुआ.

मोदी नेतृत्व में हुए कई बड़े काम- अमित शाह

अमित शाह ने कहा कि धारा 370 हट गई, राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बना, जीएसटी इस देश में आज वास्तविकता बनकर आया है, सीएए (CAA) का कानून आ गया है, विधायी मंडलों में मातृशक्ति को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है. इस तरह कई सारे बड़े काम प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुए हैं.

नक्सलवाद की जड़ वामपंथी विचारधारा और राजनिति

लोकसभा में नियम 193 के तहत वामपंथी उग्रवाद के खात्मे से जुड़ी चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि अब नक्सलवाद से मुक्त भारत की रचना भी नरेंद्र मोदी के शासन के अंदर हो रही है. ये 12 साल, एक प्रकार से, देश के लिए बहुत शुभ साबित हुए हैं. नक्सलवाद की जड़ विकास की मांग नहीं है. यह एक विचारधारा है, वह विचारधारा जिसे इंदिरा गांधी ने 1970 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए अपनाया था. नक्सलवाद ठीक इसी वामपंथी विचारधारा के कारण फैला है.

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गरीबी और नक्सली हिंसा में 12 करोड़ लोग प्रभावित

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार, बंगाल, केरल, कर्नाटक के कुछ हिस्से और उत्तर प्रदेश के तीन जिले, 12 राज्य इससे प्रभावित हुए. एक पूरा 'रेड कॉरिडोर' बन गया और वहां कानून का राज खत्म हो गया. 12 करोड़ लोग वर्षों तक गरीबी में रहे और किसी ने कोई चिंता नहीं दिखाई. हजारों युवा अपनी जानें गंवा बैठे. कई लोग जीवन भर के लिए स्थायी रूप से दिव्यांग या अपंग हो गए. इसके लिए कौन जिम्मेदार है? संवाद की वकालत करने वालों से मैं वही बात दोहराना चाहता हूं जो मैंने बस्तर के सार्वजनिक मंचों से कई बार कही है: अपने हथियार डाल दो, और सरकार तुम्हारा पुनर्वास सुनिश्चित करेगी. लेकिन, वे हथियार डालने से इनकार कर रहे हैं. हमारी सरकार की नीति स्पष्ट है; हम उन लोगों से बातचीत के लिए तैयार हैं जो अपने हथियार डाल देते हैं. हिंसा का रास्ता चुनने वालों को कड़ा जवाब दिया जाएगा.

नक्सली हिंसा और लोकतंत्र पर अमित शाह का कड़ा प्रहार

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि उनका (नक्सलियों का) लोकतंत्र में कोई विश्वास नहीं है. यहां कई लोगों ने कहा कि वे अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं. लेकिन, आपकी लड़ाई का तरीका क्या है? हम अब ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के अधीन नहीं रह रहे हैं. कुछ लोगों ने तो भगत सिंह और बिरसा मुंडा से तुलना करने तक की कोशिश की है. यह कितनी बेशर्मी है? आप भगत सिंह और बिरसा मुंडा जैसे शहीदों की तुलना उन लोगों से कर रहे हैं जो संविधान का उल्लंघन करते हैं, हथियार उठाते हैं और निर्दोष लोगों का कत्लेआम करते हैं? ऐसे गंभीर मामलों पर विचार करते समय संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठना जरूरी है.

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