×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

UP में कहां है भगवान हनुमान का ये अद्भुत मंदिर, बजरंगबली की आंखों में एक बार देख लेने से दूर होते हैं जीवन के सारे कष्ट

मंदिर को लेकर मान्यता है कि हनुमान जी प्रसाद ग्रहण कर लेते हैं, जिसे भक्त अपनी भेंट की स्वीकृति का संकेत भी मानते हैं. भक्तों का विश्वास है कि यहां दर्शन करने वाले व्यक्ति के जीवन में कभी कष्ट नहीं आते. हनुमान जी की आंखों में एक बार देख लेने से कई परेशानियां अपने आप दूर हो जाती हैं.

UP में कहां है भगवान हनुमान का ये अद्भुत मंदिर, बजरंगबली की आंखों में एक बार देख लेने से दूर होते हैं जीवन के सारे कष्ट
Advertisement

देश-दुनिया में श्रीराम दूत हनुमान के कई मंदिर हैं, जहां भक्ति की शक्ति के साथ ही उनकी निराली लीला भी देखने को मिलती है. उत्तर प्रदेश के इटावा में बजरंगबली का ऐसा ही मंदिर है, जहां वह मोदक खाते और पानी पीते हैं. मान्यता है कि आज तक उनके मुखारविंद को कोई नहीं भर सका है और मंदिर का यह रहस्य आज तक बना हुआ है. 

कहां ये हनुमान दी का ये रहस्यमय मंदिर 

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, राज्य के इटावा में यमुना नदी के किनारे एक ऐसा अनोखा हनुमान मंदिर है, जहां भक्तों की आस्था और चमत्कार की कहानियां सदियों से जुड़ी हुई हैं. मंदिर का नाम श्री पिलुआ महावीर हनुमान मंदिर है. यहां हनुमान जी की स्वयंभू मूर्ति लेटी हुई मुद्रा में विराजमान है, और सबसे बड़ी खासियत यह है कि भक्तों द्वारा चढ़ाया गया प्रसाद, खासकर लड्डू, दूध या पानी, मूर्ति के मुखारविंद में डालते ही रहस्यमयी तरीके से गायब हो जाता है. आज तक इस रहस्य का भेद कोई नहीं जान पाया कि यह प्रसाद आखिर कहां जाता है?

दर्शन करने वाले व्यक्ति के जीवन में कभी कष्ट नहीं आते

Advertisement

मंदिर को लेकर मान्यता है कि हनुमान जी प्रसाद ग्रहण कर लेते हैं, जिसे भक्त अपनी भेंट की स्वीकृति का संकेत भी मानते हैं. भक्तों का विश्वास है कि यहां दर्शन करने वाले व्यक्ति के जीवन में कभी कष्ट नहीं आते. हनुमान जी की आंखों में एक बार देख लेने से कई परेशानियां अपने आप दूर हो जाती हैं.

किसने इस मंदिर का निर्माण करवाया था

किंवदंतियों के अनुसार, करीब 300 साल पहले यह क्षेत्र प्रतापनेर के राजा हुक्म चंद्र प्रताप सिंह चौहान के अधीन था. एक रात राजा को सपने में श्रीराम भक्त के दर्शन हुए. उन्होंने राजा को बताया कि एक खास जगह पर उनकी मूर्ति प्रकट हुई है. सपने के अनुसार राजा उस स्थान पर पहुंचे तो मूर्ति को पाया. राजा ने सोचा कि इस मूर्ति को अपने महल में स्थापित कर लेंगे, लेकिन जब उन्होंने मूर्ति को हिलाने की कोशिश की तो वह नहीं हिली. राजा ने बहुत प्रयास किए, लेकिन अंत में समझ गए कि भगवन यहीं रहना चाहते हैं. इसके बाद राजा ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाया.

कैसे इसका नाम ‘पिलुआ महावीर’ मंदिर पड़ा?

Advertisement

इसका नाम ‘पिलुआ महावीर’ मंदिर इसलिए पड़ा क्योंकि इस जगह पर पहले पिलुआ नाम का एक जंगली पेड़ था. स्थानीय कथा के अनुसार, उसी पेड़ की जड़ के नीचे से यह स्वयंभू मूर्ति मिली थी. 

मंदिर में सालों से कौनसा चमत्कार देखा जा रहा है

यमुना नदी के सुंदर किनारे होने के कारण मंदिर का वातावरण बेहद शांत और दिव्य है. मंदिर को लेकर विशेष मान्यताएं हैं, जिनके अनुसार मूर्ति के मुखारविंद में जितना भी लड्डू, दूध या पानी डाला जाए, वह भरता नहीं है और धीरे-धीरे गायब हो जाता है. पुजारी और भक्त बताते हैं कि यह चमत्कार वर्षों से लगातार देखा जा रहा है. 

Advertisement

कैसे करें इस मंदिर के दर्शन

श्रीरामदूत का अद्भुत मंदिर इटावा जिला मुख्यालय से लगभग 10-12 किलोमीटर दूर थाना सिविल लाइन क्षेत्र के रूरा गांव के पास यमुना नदी के किनारे स्थित है. यहां पहुंचने के लिए इटावा शहर से सड़क मार्ग उपलब्ध है. निजी वाहन, ऑटो या कैब से मंदर तक पहुंचा जा सकता है. 

मंदिर में कब भक्तों की विशेष भीड़ लगती है 

यह भी पढ़ें

भक्तों का मानना है कि इस मंदिर में आने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन की समस्याएं दूर होती हैं. जो भी व्यक्ति यहां सच्चे मन से आता है, उसे हनुमान जी की कृपा अवश्य प्राप्त होती है. मंदिर में आम दिनों के अलावा, मंगलवार और शनिवार को भक्तों की विशेष भीड़ लगती है. बड़ा मंगल, हनुमान जन्मोत्सव और अन्य पर्वों पर श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचते हैं. यहां भक्त अक्सर हनुमान चालीसा का पाठ, राम नाम जप और सुंदरकांड और रामचरितमानस का पाठ करते हैं. सुबह-शाम आरती का विशेष आयोजन होता है. 

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें