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एक ही चट्टान से बना 7वीं शताब्दी का चमत्कारी मंदिर, यहां विराजते हैं भगवान वराह

महाबलीपुरम में वराह गुफा मंदिर के अलावा कई अन्य ऐतिहासिक स्थल भी मौजूद हैं. यहां से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित शोर मंदिर पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है. इसके अलावा पंच रथ, अर्जुन की तपस्या और टाइगर गुफा जैसे स्थल भी प्राचीन भारतीय वास्तुकला के शानदार उदाहरण हैं.

एक ही चट्टान से बना 7वीं शताब्दी का चमत्कारी मंदिर, यहां विराजते हैं भगवान वराह
Image Credits: Incredibleindia/Portal
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भगवान विष्णु को अति प्रिय पुरुषोत्तम मास या अधिक मास चल रहा है. इस महीने नारायण के दर्शन-पूजन का विशेष विधान है. देश भर में ऐसे कई देवालय हैं, जो अध्यात्म के साथ ही भारतीय वास्तुकला और प्राचीन संस्कृति को दिखाते हैं. ऐसा ही एक मंदिर तमिलनाडु में है, जिसे 7वीं शताब्दी में एक ही विशाल चट्टान को काटकर बनाया गया. तमिलनाडु के महाबलीपुरम में स्थित वराह गुफा मंदिर भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित है. 

नारायण के वराह अवतार को समर्पित 7वीं शताब्दी का भव्य मंदिर

यह ऐतिहासिक स्थल न केवल श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति देता है, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी अपनी प्राचीन कला और रहस्यमयी इतिहास से अचंभित करता है. यूनेस्को ने भी इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए इसे विश्व धरोहर स्थलों में शामिल किया है.

महाबलीपुरम, जिसे मामल्लापुरम भी कहा जाता है, पल्लव राजाओं के समय का एक प्रसिद्ध समुद्री नगर था. यहां मौजूद वराह गुफा मंदिर पल्लव राजवंश की शानदार शिल्पकला और स्थापत्य कौशल का बेहतरीन उदाहरण है. मंदिर की दीवारों और छतों पर की गई बारीक नक्काशी उस दौर के कलाकारों की प्रतिभा को दिखाती है. जैसे ही पर्यटक मंदिर के भीतर प्रवेश करते हैं, उन्हें ऐसा महसूस होता है, मानो वे किसी पुराने युग में पहुंच गए हों.

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मंदिर का मुख्य आकर्षण भगवान विष्णु के वराह अवतार की विशाल प्रतिमा है. पौराणिक कथा के अनुसार, जब राक्षस हिरण्याक्ष पृथ्वी को समुद्र की गहराइयों में ले गया था, तब भगवान विष्णु ने वराह यानी सूअर का रूप धारण कर पृथ्वी को बचाया था. मंदिर में बनी प्रतिमा में भगवान वराह को पृथ्वी देवी भूदेवी को अपनी गोद में उठाए हुए दिखाया गया है. यह मूर्ति बुराई पर अच्छाई की जीत और संसार में संतुलन की फिर से स्थापना का प्रतीक भी मानी जाती है.

एक ही चट्टान से तराशा गया चमत्कार

वराह गुफा मंदिर केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि यह भारतीय कला और संस्कृति का भी बड़ा केंद्र है. मंदिर की दीवारों पर भगवान विष्णु, शिव, दुर्गा और गणेश सहित कई देवी-देवताओं की सुंदर नक्काशी है. इसके अलावा पल्लव काल के सामाजिक जीवन और पौराणिक कथाओं को भी मूर्तियों के माध्यम से उकेरा गया है. हर आकृति अपने भीतर एक अलग कहानी समेटे हुए दिखाई देती है.

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यह मंदिर अपने शांत और आध्यात्मिक वातावरण के लिए भी प्रसिद्ध है. समुद्र के किनारे स्थित होने के कारण यहां का वातावरण बेहद सुकून देने वाला महसूस होता है. मंदिर परिसर में गूंजते मंत्र और भजन श्रद्धालुओं को मानसिक शांति का अनुभव कराते हैं. यही वजह है कि यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु व पर्यटक आते हैं.

वराह गुफा मंदिर के अलावा कई अन्य ऐतिहासिक स्थल

महाबलीपुरम में वराह गुफा मंदिर के अलावा कई अन्य ऐतिहासिक स्थल भी मौजूद हैं. यहां से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित शोर मंदिर पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है. इसके अलावा पंच रथ, अर्जुन की तपस्या और टाइगर गुफा जैसे स्थल भी प्राचीन भारतीय वास्तुकला के शानदार उदाहरण हैं. इन सभी स्मारकों में पल्लव राजाओं के काल की कला और शिल्प की झलक साफ दिखाई देती है.

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महाबलीपुरम घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है. इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और समुद्र किनारे स्थित इन ऐतिहासिक स्थलों को आराम से देखा जा सकता है. सुबह और शाम के समय मंदिर परिसर का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है.

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