खुलने वाला है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज! US-ईरान नई डील का ड्राफ्ट तैयार, अब ट्रंप की मंजूरी का इंतजार
फरवरी से जारी अमेरिका-ईरान तनाव के बीच दोनों देशों ने शुरुआती शांति समझौते के फ्रेमवर्क पर सहमति बनाई है. इस 60 दिवसीय प्रस्ताव का मकसद सीजफायर बनाए रखना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर फिर से बातचीत शुरू करना है.
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अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई महीनों से जारी तनाव के बीच अब एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है. फरवरी से जारी संघर्ष और लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बाद दोनों देशों ने कथित तौर पर एक प्रारंभिक शांति समझौते के फ्रेमवर्क पर सहमति बना ली है. इस खबर ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है क्योंकि इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और मध्य पूर्व की स्थिरता पर पड़ सकता है.
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह 60 दिनों का प्रारंभिक सहमति पत्र (MoU) है, जिसका मकसद युद्धविराम को बनाए रखना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर फिर से बातचीत शुरू करना है. हालांकि अभी इस समझौते पर अंतिम मुहर लगना बाकी है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है. इसके बावजूद इस खबर ने दुनिया के कई देशों को राहत की उम्मीद जरूर दी है.
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है दुनिया के लिए अहम?
सबसे ज्यादा चर्चा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर हो रही है. यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक रास्तों में से एक माना जाता है. वैश्विक तेल और गैस व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. युद्ध और प्रतिबंधों के कारण यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिससे पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट गहरा गया था. भारत जैसे देशों पर इसका सीधा असर पड़ा क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और पेट्रोल-डीजल महंगे हो गए. अब अगर यह समझौता सफल होता है तो होर्मुज में फिर से सामान्य गतिविधियां शुरू हो सकती हैं. एक्सिओस की रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्तावित समझौते में इस समुद्री रास्ते को दोबारा पूरी तरह खोलने की बात शामिल है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जहाजों को बिना किसी रुकावट के गुजरने दिया जाएगा. यहां किसी तरह का टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा और जहाजों को सुरक्षा संबंधी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा.
समुद्री रास्तों से हटेंगी बारूदी सुरंगें
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान अगले 30 दिनों के भीतर समुद्री रास्तों में बिछाई गई सभी बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए तैयार हो सकता है. दूसरी तरफ अमेरिका भी ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नाकेबंदी को धीरे-धीरे खत्म करने पर सहमत हुआ है. अगर ऐसा होता है तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बड़ी राहत मिल सकती है.
परमाणु कार्यक्रम पर क्या बनी सहमति?
इस समझौते का सबसे संवेदनशील हिस्सा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार मसौदे में ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने की प्रतिबद्धता जताई है. अगले 60 दिनों के दौरान दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर विस्तृत बातचीत होगी. पहले चरण में ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार के भविष्य पर चर्चा की जाएगी.
ट्रंप के फैसले पर टिकी दुनिया की नजर
अमेरिका भी इस बातचीत के दौरान कुछ नरमी दिखाने के संकेत दे रहा है. बताया जा रहा है कि वॉशिंगटन ईरान पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में राहत देने, जब्त की गई ईरानी संपत्तियों को वापस करने और मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए एक योजना तैयार करने पर विचार कर रहा है. इससे ईरान की कमजोर होती अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है. हालांकि हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कैबिनेट बैठक के दौरान साफ संकेत दिए कि अगर समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई और तेज हो सकती है. ट्रंप ने मजाकिया लेकिन सख्त अंदाज में कहा कि अगर डील नहीं बनी तो उनके साथ बैठे युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ईरान को खत्म कर देंगे. वहीं विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि कुछ प्रगति जरूर हुई है लेकिन अंतिम फैसला आने वाले घंटों में ही स्पष्ट होगा.
ईरान के लिए बड़ा आर्थिक मौका
जानकारों का मानना है कि यह समझौता ईरान के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने का बड़ा मौका साबित हो सकता है. लंबे समय से लगे आर्थिक प्रतिबंधों ने ईरान की आर्थिक स्थिति को काफी कमजोर किया है. ऐसे में अगर प्रतिबंधों में ढील मिलती है तो ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिर से मजबूती मिल सकती है.
भारत को कैसे मिलेगा फायदा?
भारत के नजरिए से भी यह घटनाक्रम बेहद अहम माना जा रहा है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर खाड़ी देशों पर निर्भर है. ऐसे में होर्मुज में तनाव कम होने और तेल सप्लाई सामान्य होने से भारत को राहत मिलने की उम्मीद है. अगर तेल की कीमतों में गिरावट आती है तो आम लोगों को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है.
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बहरहाल, पूरी दुनिया की नजरें डोनाल्ड ट्रंप के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं. अगर यह समझौता साइन हो जाता है तो यह केवल अमेरिका और ईरान के रिश्तों में बदलाव नहीं लाएगा बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है.