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शांति वार्ता पर लगा ब्रेक! अमेरिकी डेलिगेशन पाकिस्तान जाने को तैयार, लेकिन ईरान ने बातचीत से किया इनकार

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच शांति वार्ता फिर पटरी से उतर गई है. ईरान ने दूसरे दौर की बातचीत में शामिल होने से इनकार करते हुए अमेरिका पर अव्यवहारिक मांगें, रुख बदलने और समुद्री नाकाबंदी का आरोप लगाया है.

Image Source: IANS- Abbas Araghchi (File Photo)
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ईरान और अमेरिका के बीच बीते 28 फरवरी से चल रहे संघर्ष ने पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है. अमेरिका द्वारा दो हफ्ते का सीजफायर के ऐलान के बाद पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता पूरी तरह से फ़ेल रही. इसके बाद एक बार फिर ईरान और अमेरिका के बीच चल रही कूटनीतिक खींचतान चर्चा में है. शांति वार्ता को लेकर सामने आ रही खबरों के बीच अब बड़ा अपडेट आया है, एक तरफ अमेरिकी डेलीगेशन दूसरे दौर की वार्ता के लिए पाकिस्तान जाने की तैयारी कर रहा था, लेकिन अब ईरान ने बातचीत करने से पूरी तरह से इनकार कर दिया है. जिसने इस पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा गंभीर बना दिया है.

ईरान ने वार्ता से किया इनकार

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने कहा है कि देश ने अमेरिका के साथ होने वाली शांति वार्ता के दूसरे दौर में शामिल होने से इनकार कर दिया है. बताया जा रहा था कि यह वार्ता जल्द ही पाकिस्तान में होने वाली थी. एजेंसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपने अंग्रेजी अकाउंट पर एक पोस्ट में कहा कि वार्ता के दूसरे दौर से ईरान की अनुपस्थिति का कारण अमेरिका की 'बहुत ज्यादा मांगें, अव्यवहारिक उम्मीदें, बार-बार अपने रुख में बदलाव, विरोधाभासी बयान और समुद्री नाकाबंदी' हैं. ईरान का मानना है कि यह नाकाबंदी युद्धविराम का उल्लंघन है.

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वार्ता को लेकर खबरों पर सवाल

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आईआरएनए ने यह भी कहा कि इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता को लेकर जो खबरें सामने आई हैं, वे सही नहीं हैं. सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने फारसी में प्रकाशित एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह जानकारी दी.

'मीडिया का खेल' बताया

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एजेंसी ने अमेरिका की ओर से आई खबरों को 'मीडिया का खेल और दोषारोपण की रणनीति' बताया, जिसका मकसद ईरान पर दबाव बनाना है. उसने कहा कि अमेरिका की 'अत्यधिक, तर्कहीन और अव्यवहारिक मांगें, बार-बार बदलता रुख, विरोधाभासी बयान और कथित समुद्री नाकाबंदी' की वजह से अब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई है. आईआरएनए ने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में बातचीत से किसी अच्छे नतीजे की उम्मीद बहुत कम है.

पहले क्या हुआ था?

28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर तेहरान और ईरान के कई अन्य शहरों पर हमले किए थे. इन हमलों में उस समय के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और आम नागरिक मारे गए थे. इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और मध्य पूर्व में अमेरिका के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कड़ा नियंत्रण कर लिया.

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युद्धविराम और असफल वार्ता

8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम हुआ। इसके बाद 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच लंबी बातचीत हुई. लेकिन यह वार्ता सफल नहीं हो पाई, जिसके बाद अमेरिका ने जलमार्ग पर अपनी नाकाबंदी लागू कर दी. खबरों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच जल्द ही पाकिस्तान में एक और दौर की शांति वार्ता होने की उम्मीद थी.

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बहरहाल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती दूरी ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति में तनाव बढ़ा दिया है. जिस वार्ता से समाधान की उम्मीद थी, वही अब टलती नजर आ रही है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों देश फिर से बातचीत की मेज पर लौटते हैं या हालात और ज्यादा टकराव की ओर बढ़ते हैं.

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