Advertisement

Loading Ad...

‘लोकतंत्र भूल जाओ…’ भारत ने जिस देश को भेजी बड़ी मदद, वहां के राष्ट्रपति ने डेमोक्रेसी को बताया झूठ

इब्राहिम त्राओरे 2022 में तख्तापलट कर सत्ता में आए थे. उन्होंने राष्ट्रपति बनते ही जनता के बीच पहचान बनाई. उनके एंटी फ्रांस और एंटी वेस्ट बयान भी काफी सुर्खियों में रहे.

Image Source: IANS
Loading Ad...

पिछले कुछ सालों में दुनिया के कई देशों में तख्तापलट हुआ. इनमें से एक बुर्किना फासो भी है. तख्तापलट के बाद यहां की जनता को उम्मीद थी कि नई सरकार लोगों को उनका हक, न्याय दिलाते हुए लोकतंत्र का पालन करेगी, लेकिन यहां के राष्ट्रपति इब्राहिम त्राओरे ने तो लोकतंत्र की परिभाषा को ही झुठला दिया. उन्होंने जनता से दो टूक कह दिया कि देश में न तो चुनाव होंगे और न ही देश लोकतंत्र चलेगा.

इब्राहिम त्राओरे 2022 में तख्तापलट कर सत्ता में आए थे. उन्होंने राष्ट्रपति बनते ही जनता के बीच पहचान बनाई. उनके एंटी फ्रांस और एंटी वेस्ट बयान भी काफी सुर्खियों में रहे. जनता को उम्मीद थी कि इब्राहिम त्राओरे जमीन पर देश के हालात बदलेंगे, लेकिन अब उन्होंने देश में लोकतंत्र को आम लोगों की आवाज दबाने का जरिया बताया है. 

इब्राहिम त्राओरे ने लोकतंत्र पर क्या कहा? 

Loading Ad...

एक सरकारी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में बुर्किना फासो के राष्ट्रपति इब्राहिम त्राओरे ने कहा,  ‘हम चुनाव की बात भी नहीं कर रहे. लोगों को लोकतंत्र का सवाल ही भूल जाना चाहिए. सच्चाई यह है कि लोकतंत्र हमारे लिए नहीं है.’ अपने बयान में उन्होंने लोकतंत्र को झूठा करार देते हुए कहा, लोकतंत्र के नाम पर  बच्चों, महिलाओं और आम लोगों की जान ली जाती है.

Loading Ad...

टॉप आतंकवादी देशों में शामिल बुर्किना फासो 

हाल ही में इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस की ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स (GTI) रिपोर्ट में बुर्किना फासो का नंबर दूसरे पायदान पर है. हालांकि इससे पहले वह आतंकवाद में पहले नंबर पर था. इस बार ये खिताब पाकिस्तान ने हासिल किया है. 

Loading Ad...

राष्ट्रपति इब्राहिम त्राओरे ने सैन्य तख्तापलट के बाद खुद का कार्यकाल 2029 तक बढ़ा दिया. बुर्किना फासो में मिलिशिया और अल कायदा जैसे आतंकवादी संगठन एक्टिव है. यहां चरमपंथ और सेना के बीच जनता पिस रही है. दोनों पक्ष के बीच संघर्ष में आम नागरिक मारे जाते रहे हैं. अकेले साल 2023 से 2025 के बीच यहां 1200 से ज्यादा आम नागरिक मारे गए हैं. 

इब्राहिम त्राओरे एक तरफ लोकतंत्र को खारिज कर रहे हैं तो दूसरी ओर हिंसा में आम लोग जानें जा रही है. जबकि लाखों लोग देश छोड़ चुके हैं. यहां सेना और जनता दोनों के राष्ट्रपति इब्राहिम त्राओरे ही हैं, लेकिन वह हालात काबू नहीं कर पा रहे हैं. वहीं, बुर्किना फासो में प्राकृतिक संकट भी एक बड़ी समस्या है. 

भारत और बुर्किना फासो के रिश्ते कैसे हैं? 

Loading Ad...

यह भी पढ़ें

भारत ने हाल ही में बुर्किना फासो के लोगों के लिए मानवीय मदद भेजी थी. इस मदद में भारत की ओर से 1000 मीट्रिक टन चावल भेजे गए थे. चूंकि बुर्किना फासो खनिज संपन्न देश है, इसकी गिनती अफ्रिका के सबसे बड़े गोल्ड उत्पादक देशों में होती है. जो भारत के लिए अच्छी बात है, क्योंकि भारत बुर्किना फासो से बड़े पैमाने पर गोल्ड लेता है. हालांकि खनिज संपन्न होने के बावजूद चरमपंथ ने इस देश की रीढ़ तोड़ दी और आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई. 

Loading Ad...
Loading Ad...