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पहले दिखाए तेवर, अब फैलाए हाथ… आर्थिक संकट में बुरी तरह फंसा मालदीव, मुइज्जू ने भारत से मांगी मदद

मालदीव की अर्थव्यवस्था इस समय बुरे दौर से गुजर रही है. अब बढ़ते कर्ज, घटते विदेशी भंडार और कमजोर पर्यटन के बीच देश आर्थिक संकट में है और भारत से करेंसी स्वैप सुविधा बढ़ाने की मांग कर रहा है, लेकिन नियमों के कारण फैसला आसान नहीं है.

Image Source: X/ @MMuizzu (File Photo)
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साल 2023 के अंत में मालदीव के राष्ट्रपति बनने के बाद मोहम्मद मुइज्जू ने ‘इंडिया आउट’ (India Out) अभियान के तहत भारत के साथ संबंधों में सख्ती दिखाई, जिसमें भारतीय सैन्य कर्मियों को हटाने और चीन के साथ नजदीकियां बढ़ाने की नीति अपनाई गई. इसके बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनवरी 2024 में लक्षद्वीप दौरे और वहां के पर्यटन को बढ़ावा देने के आह्वान ने मालदीव में खलबली मचा दी. इस तल्खी के कारण पर्यटन और अर्थव्यवस्था चरमराने लगी. अब हालात ऐसे हो गए हैं कि मालदीव गहरे आर्थिक संकट में फंस चुका है और उसे फिर से भारत के सहयोग की जरूरत महसूस हो रही है. 

जानकारी के मुताबिक, मालदीव ने करेंसी स्वैप सुविधा को आगे बढ़ाने के लिए भारत से अनुरोध किया है. हालांकि, मौजूदा नियमों और कूटनीतिक पेचिदगियों के कारण भारत के लिए इस पर तुरंत सकारात्मक फैसला लेना आसान नहीं माना जा रहा है. असल में इस वक्त मालदीव की आर्थिक स्थिति पर जबरदस्त दबाव बना हुआ है. एक तरफ उसका विदेशी कर्ज तेजी से बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर विदेशी मुद्रा भंडार लगातार कम होता जा रहा है. मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष ने हालात को और मुश्किल बना दिया है. पर्यटन, जो देश की अर्थव्यवस्था की मुख्य धुरी है, बुरी तरह प्रभावित हुआ है. वहीं बढ़ती ईंधन कीमतों ने खर्च का बोझ बढ़ाकर आर्थिक हालात को और कमजोर कर दिया है.

क्या भारत करेगा कोई मदद?

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सूत्रों की मानें तो मालदीव ने भारत से करेंसी स्वैप व्यवस्था को आगे बढ़ाने की अपील की है. हालांकि, भारतीय प्रावधानों के अनुसार दो बार निकासी के बीच एक तय अंतराल यानी कूलिंग-ऑफ अवधि अनिवार्य होती है. इसके साथ ही कर्ज की अवधि बढ़ाने, यानी रोल-ओवर, की भी एक सीमा निर्धारित है. इन नियमों के चलते भारत के लिए तुरंत राहत देना आसान नहीं है. अगर इस बार विस्तार नहीं मिल पाता, तो निकट भविष्य में मालदीव की आर्थिक स्थिति और अधिक दबाव में आ सकती है.

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पहले भी भारत ने की थी मदद 

भारत पहले भी कई मौकों पर मालदीव के साथ खड़ा रहा है. अक्टूबर 2024 में भारत ने 400 मिलियन डॉलर की करेंसी स्वैप सुविधा उपलब्ध कराई थी, जिसे कड़े नियमों के बावजूद दो बार आगे बढ़ाया गया. इसके अलावा, 2025 में 50-50 मिलियन डॉलर के दो ब्याज मुक्त ट्रेजरी बिलों की अवधि भी एक-एक साल के लिए बढ़ाई गई. यही नहीं, जुलाई 2025 में उच्चस्तरीय दौरे के दौरान बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 565 मिलियन डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट देने और कर्ज चुकाने की शर्तों को आसान बनाने की भी घोषणा की गई थी.

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वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने जताई गहरी चिंता 

दूसरी ओर, वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने भी मालदीव की आर्थिक हालत को लेकर गंभीर चिंता जताई है. फिच रेटिंग्स ने देश की सॉवरेन रेटिंग को निचले स्तर पर बनाए रखा है, जो संभावित डिफॉल्ट के खतरे की ओर इशारा करता है. मूडिज ने भी अपनी रेटिंग में कोई सकारात्मक बदलाव नहीं किया है. अप्रैल 2026 में मालदीव पर करीब 1 अरब डॉलर के कर्ज का भुगतान करने का दबाव था. इसमें सुकुक बॉन्ड की रकम तो चुका दी गई, लेकिन इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर काफी असर पड़ा है.

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बहरहाल, मालदीव इस समय ऐसे संवेदनशील दौर में है, जहां उसे तुरंत आर्थिक मदद की दरकार है. वहीं भारत के लिए भी स्थिति आसान नहीं है, क्योंकि उसे एक तरफ तय नियमों का पालन करना है और दूसरी ओर रणनीतिक संबंधों को भी संतुलित रखना है. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भारत आगे क्या निर्णय लेता है और मालदीव इस आर्थिक संकट से बाहर निकलने का रास्ता कैसे खोजता है.

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