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भारत से एकतरफा दरियादिली की अपेक्षा मत करना...एस जयशंकर ने बांग्लादेश को बता दी हद, पाकिस्तान को भी संदेश
भारत की दरियादिली को उसकी कमजोरी समझ रहे बांग्लादेश को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उसकी हद बता दी है. उन्होंने दो टूक कहा कि द्विपक्षीय रिश्तों में दोनों तरफ से आपसी हितों का ध्यान रखना जरूरी होता है. वहीं उन्होंने पाकिस्तान को भी सुना दिया है.
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बांग्लादेश में नई BNP की सरकार आने के बाद से भारत लगातार संबंधों में बेहतरी की कोशिशें कर रहा है. इसी कारण दिल्ली की ओर से खालिदा जिया को श्रद्धांजलि देने के लिए विदेश मंत्री जयशंकर को भेजा गया. द्विपक्षीय रिश्तों को अपग्रेड करने और प्राथमिकता देने के मकसद से ढाका में लीक से हटकर किसी पॉलिटिकल शख्स दिनेश त्रिवेदी को उच्चायुक्त बनाकर भेजा गया. इतना ही नहीं रॉ चीफ के नेतृत्व में एक दल की बांग्लादेशी गृह मंत्री और पीएम तारिक रहमान से मुलाकात हुई, लेकिन बांग्लादेशी सरकार ने भारत की इन कोशिशों को कमजोरी समझ ली. अब उसकी ओर से ब्लैकमेलिंग और शर्तें थोपी जानी शुरू हो गई हैं. इसी कड़ी में विदेश मंत्री जयशंकर ने बांग्लादेश को रिश्तों का पाठ पढ़ा दिया है, उसकी अहमियत बताई है और दूरगामी कूटनीतिक संदेश दिया है.
भारत ने बांग्लादेश को बता दी उसकी हद!
आपको बता दें कि भारत ने बड़ा दिल दिखाते हुए ब्रिक्स सम्मेलन के लिए बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान को भी न्योता दिया गया है. हालांकि बांग्लादेश की ओर से इसे भारत की कमजोरी समझी गई और इस दौरे के लिए शर्तें थोप दी गईं. बांग्लादेश ने मांग की कि रहमान तभी जाएंगे जब भारत शेख हसीना को सौंपने की गारंटी दे और ऐलान करे. भारत की ओर से ऐसी कोई भी गारंटी नहीं दी जा सकती. हसीना भारत की मेहमान हैं और कोई अपने मेहमान को ऐसे नहीं किसी के हाथ में सौंपता है या घर से जबरदस्ती निकालता है. भारत ने दलाई लामा के लिए चीन से युद्ध झेला, आज तक रिश्तों में तनाव है, लेकिन लाख दबाव के बावजूद उन्हें चीन के हवाले नहीं किया तो शेख हसीना को मौजूदा बांग्लादेशी सरकार को सौंपने का सवाल ही नहीं उठता. वो भी तब जब बांग्लादेश में कट्टरपंथियों का प्रभाव बढ़ गया है. सरकार बदला लेने पर उतारू है और मौत की सजा पक्की है.
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जयशंकर ने बांग्लादेश को तगड़ा संदेश दे दिया!
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इन्हीं सब कूटनीतिक रस्साकशी के बीच भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने बांग्लादेश को पड़ोसी के साथ रिश्तों का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि ये द्विपक्षीय होता है, दोनों तरफ से पहल की जाती है. जब बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान ने अपने पहले विदेश दौरे के लिए चीन जाना ठीक समझा, जिसके भारत के साथ तल्ख कूटनीतिक संबंधों का इतिहास है, फिर वो कैसे भारत से एकतरफा दरियादिली की अपेक्षा करता है. चीन की तुलना में उसके रिश्ते और हित भारत से ज्यादा बंधे हैं, बॉर्डर भी उसी से ज्यादा मिलते हैं.
शेख हसीना को भूल जाए बांग्लादेश!
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विदेश मंत्री ने ET वर्ल्ड लीडर्स फोरम में बोलते हुए एस. जयशंकर ने दो टूक शब्दों में कहा कि आपसी संबंधों में साझा हितों (म्यूचुअल इंटेरेस्ट) का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. उन्होंने भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर कहा आगे कहा कि कोई भी रिश्ता तभी बनता है, सफलत होता है जब वह दोनों देशों के साझा हितों की कसौटी पर खरा उतरे. विदेश मामलों के जानकारों की मानें तो बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा को लेकर लग रही अटकलों और उहापोह की स्थिति के बीच उनकी ये टिप्पणी अहम मानी जा रही है. सांकेतिक तौर पर देखें तो एक तरह से भारत ने भी कह दिया कि जब भारत से कुछ की मांग करते हो तो भारत की चिंताओं का भी ध्यान रखो और उसका हल करो. मसलन भारत लगातार बांग्लादेश में बढ़ रही कट्टरपंथी गतिविधियां, ISI-पाकिस्तान के प्रभाव, भारत विरोधी बयानों, नॉर्थ ईस्ट पर गंदी नज़र, घुसपैठ और चीन को बार्गेन के तौर पर इस्तेमाल.
तारिक रहमान के दौरे से पहले जयशंकर का बड़ा बयान!
जयशंकर ने साफ कहा कि भारत यह अपेक्षा नहीं करता कि पड़ोसी देश केवल उसके हितों के मुताबिक काम करें, बल्कि संबंधों के लिए दोनों पक्षों के हितों के बीच साझा जमीन तैयार करना जरूरी है. आपको बता दें कि विदेश मंत्रालय पहले ही तारिक रहमान को द्विपक्षीय यात्रा के लिए भारत आने का निमंत्रण दे चुका है. हालांकि, उनकी यात्रा की तारीख को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है.
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वहीं पाकिस्तान के साथ संबंध और पड़ोसी वाले एंगल को लेकर हुए सवाल पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत के ख़िलाफ़ पाकिस्तान की ओर से लगातार आतंकवाद का इस्तेमाल इस बात पर सीधा असर डालता है कि भारतीय इन रिश्तों को कैसे देखते हैं, और देश की विदेश नीति तय करते समय जनता की भावनाओं को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. वर्ल्ड लीडर्स फोरम में बोलते हुए, जयशंकर ने आगे कहा कि पाकिस्तान के साथ वॉशिंगटन के लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों के बावजूद भारत ने अमेरिका के साथ अपने संबंध विकसित किए हैं.
जयशंकर ने पाकिस्तान को भी सुनाया!
"देखिए, जैसा कि आप जानते हैं, अमेरिका और पाकिस्तान का एक लंबा इतिहास रहा है. अब, काफी हद तक हमने अमेरिका के साथ अपने संबंध विकसित कर लिए हैं," उन्होंने कहा.
जयशंकर ने इस दौरान पाकिस्तान को अनोखा पड़ोसी करार देते हुए कहा कि भारत के नज़रिए से पाकिस्तान की खासियत यह है कि वह पड़ोसी देश के ख़िलाफ़ लगातार और सुनियोजित तरीके से आतंकवाद का इस्तेमाल करता है.
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जनता की भावनाओं का विदेश नीति निर्धारण में होगा सम्मान!
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान इसलिए खास नहीं है कि वह भारत का पड़ोसी है. हमारे और भी पड़ोसी हैं. दूसरे देशों को भी समस्याएं हैं." "वह इसलिए खास है क्योंकि आज के दौर में, कोई दूसरा देश ऐसा नहीं है जो किसी पड़ोसी पर हमला करने और उस पर दबाव बनाने के लिए इतने सुनियोजित और लगातार इन तरीके से आतंकवाद का इस्तेमाल करता हो, और जिसका असर इस देश की जनता की राय पर भी पड़ता हो."
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वहीं पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय रिश्तों और कूटनीतिक चैनलों की बहाली जैसे मुद्दों पर विदेश मंत्री ने कहा कि विदेश नीति बनाते समय सरकार जनता की भावनाओं को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती. उन्होंने इस दौरान कहा कि, 'वो एक लोकतांत्रिक व्यवस्था (डेमोक्रेटिक सेटअप देश जैसे कि भारत) का मंत्री हैं. वो अपने देश की जनता की राय को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते." उन्होंने आगे कहा, "अगर मेरे देश की जनता को लगता है कि आतंकवाद एक ऐसा मुद्दा है जिस पर कोई दूसरा देश हमारे साथ सहानुभूति नहीं रखता, हमारा नज़रिया नहीं समझता, या इससे भी बुरा बर्ताव करता है, तो ज़ाहिर है कि समय के साथ इसका असर दिखेगा. इसलिए, अगर जनता की ऐसी राय है, तो मुझे उसे ध्यान में रखना ही होगा."