टूटने की कगार पर सीजफायर! बातचीत के दौर के बीच अमेरिका ने 48 घंटे में ईरान पर किए दो बड़े हमले, तेहरान ने दिया अल्टीमेटम
अमेरिका और ईरान के बीच लागू सीजफायर एक बार फिर खतरे में नजर आ रहा है. पिछले 48 घंटों में अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया, जिसके बाद तनाव और बढ़ गया. ईरान ने इसे संघर्षविराम का उल्लंघन बताया, जबकि अमेरिका ने कहा कि यह कार्रवाई IRGC के मिसाइल और ड्रोन हमलों के जवाब में की गई.
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अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच लागू सीजफायर अब टूटने की कगार पर पहुंचता दिखाई दे रहा है. इसकी वजह पिछले 48 घंटों में अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर की गई ताजा सैन्य कार्रवाई और हमले हैं. एक ओर दोनों देशों के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर शांति वार्ता जारी है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के पास स्थित ईरानी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया है. इस हमले ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बड़े सैन्य संघर्ष का रूप ले सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे दोनों देशों के बीच लागू संघर्षविराम का खुला उल्लंघन करार दिया है. दूसरी तरफ अमेरिका का कहना है कि यह हमला ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से पिछले 24 घंटों में किए गए मिसाइल, ड्रोन और समुद्री हमलों के जवाब में किया गया. यह तनाव ऐसे समय में बढ़ा है, जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्कों रुबियो ने भारत दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में कहा कि युद्ध समाप्त करने को लेकर समझौता जल्द अंतिम चरण में पहुंच सकता है. उनके अनुसार, दोनों पक्षों के बीच अब केवल कुछ शब्दों और शर्तों को लेकर मतभेद बाकी हैं. जानकारी देते चलें कि अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद हुई थी. इसके बाद 8 अप्रैल 2026 से अस्थायी सीजफायर लागू किया गया, लेकिन हालिया घटनाओं ने एक बार फिर हालात को तनावपूर्ण बना दिया है.
अमेरिका ने ईरान पर लगाए आरोप
इस हमले को लेकर अमेरिका ने आरोप लगाया है कि ईरान की सेना द्वारा अमेरिकी लड़ाकू विमानों की गतिविधियों के दौरान हवा में मार करने वाली मिसाइलें दागीं. इसके साथ ही अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ईरानी ड्रोन और तेज रफ्तार नावें समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता रखती थीं, जिससे अमेरिकी नौसैनिक जहाजों को बड़ा खतरा पैदा हो सकता था. दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर संघर्षविराम तोड़ने का आरोप लगाया है. ईरान का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में की गई अमेरिकी कार्रवाई पूरी तरह उकसावे वाली है और इसके परिणामों की जिम्मेदारी वॉशिंगटन प्रशासन की होगी. IRGC ने दावा किया है कि उसने एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराया, जबकि एक F-35 लड़ाकू विमान को इलाके से पीछे हटने पर मजबूर कर दिया. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वार्ता में दो नई शर्तें जोड़ने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और ज्यादा बढ़ गया है.
ट्रंप की नई शर्तों से बढ़ा विवाद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कतर, सऊदी अरब और पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से इजरायल के साथ अब्राहम अकॉर्ड्स के तहत शांति समझौते में शामिल होने की अपील की है. हालांकि, अरब देशों के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस प्रस्ताव को फिलहाल अस्वीकार कर दिया. उनका कहना है कि मौजूदा समय में सबसे बड़ी प्राथमिकता युद्ध को रोकना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री मार्ग को सामान्य करना होना चाहिए. इसी बीच ट्रंप प्रशासन ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है. अमेरिका की ओर से मांग की गई है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडार को या तो अमेरिका को सौंप दे या फिर उसे परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC) की निगरानी में पूरी तरह नष्ट किया जाए. इस मांग के सामने आने के बाद दोनों देशों के बीच चल रही वार्ता में तनाव और बढ़ता दिखाई दे रहा है.
मुजतबा खामेनेई की अमेरिका को चेतावनी
अपने पिता के निधन के बाद नेतृत्व संभालने वाले ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई लंबे समय से सार्वजनिक मंचों से दूर रहे हैं, लेकिन हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अमेरिका को कड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि अब हालात पुराने दौर में वापस नहीं जाएंगे और पश्चिम एशिया के देश अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा ढाल बनने के लिए तैयार नहीं हैं. जानकारों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच जारी वार्ता सफल रहती है और दोनों पक्ष किसी समझौते पर पहुंचते हैं, तो मौजूदा युद्ध समाप्त हो सकता है. इसके साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री मार्ग भी दोबारा खोला जा सकता है, जिसे फिलहाल ईरान ने बंद कर रखा है. सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक सहमति बनने के बाद पूर्ण शांति समझौते को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों को करीब 60 दिनों का समय दिया जा सकता है.
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बहरहाल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने एक बार फिर पश्चिम एशिया में बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है. अब पूरी दुनिया की नजर दोनों देशों के बीच चल रही वार्ता पर टिकी है, क्योंकि यही बातचीत तय करेगी कि क्षेत्र में शांति कायम होगी या हालात फिर युद्ध की ओर बढ़ेंगे.