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बड़बोले ट्रंप ने अपने बयान पर मारा यू-टर्न... पहले भारत को कहा ‘नरक’, अब बताने लगे महान देश; जानें सरकार ने क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप के ‘हेलहोल’ बयान से भारत में विवाद खड़ा हो गया, जिसमें भारत-चीन को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी. विरोध बढ़ने पर अमेरिकी दूतावास ने सफाई दी कि ट्रंप भारत को महान देश मानते हैं और उसके साथ अच्छे संबंध बताते हैं.
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने भारत में सियासी हलचल तेज कर दी है. ट्रंप द्वारा शेयर किए गए एक ट्रांसक्रिप्ट में भारत, चीन और कुछ अन्य देशों को ‘हेलहोल’ यानी 'नरक का द्वार' कहा गया, जिसके बाद देशभर में विरोध शुरू हो गया. खासकर विपक्षी दलों ने इस बयान को भारत का अपमान बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
विवाद बढ़ा तो ट्रंप ने दी सफाई
मामला तूल पकड़ने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से सफाई भी सामने आई. नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के जरिए जारी बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत को एक महान देश मानते हैं. दूतावास के प्रवक्ता के मुताबिक, ट्रंप ने भारत को शानदार देश बताते हुए कहा कि उनके भारत के साथ अच्छे संबंध हैं. हालांकि, इस सफाई के बावजूद विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ है.
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क्या है पूरा मामला?
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दरअसल, रेडियो होस्ट माइकल सेवेज ने एक लेटर सोशल मीडिया पर शेयर किया था, जिसमें उन्होंने भारत और चीन को ‘नरक का द्वार’ बताया. इस लेटर में बर्थराइट सिटिजनशिप कानून को लेकर भी सवाल उठाए गए. अमेरिका में इस कानून के तहत जन्म लेने वाला बच्चा स्वतः नागरिक बन जाता है, चाहे उसके माता-पिता किसी भी देश के हों. सेवेज ने दावा किया कि कुछ लोग इस नियम का फायदा उठाने के लिए गर्भावस्था के आखिरी समय में अमेरिका पहुंचते हैं, ताकि उनके बच्चे को नागरिकता मिल सके. इसी संदर्भ में भारत और चीन के लिए विवादित शब्दों का इस्तेमाल किया गया.
ट्रंप के रीपोस्ट से बढ़ा विवाद
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माइकल सेवेज के इसी लेटर को डोनाल्ड ट्रंप ने रीपोस्ट कर दिया, जिसके बाद मामला और संवेदनशील हो गया. ट्रंप का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब वह पहले से ही महंगाई और नागरिकता कानून को लेकर अपने बयानों के कारण चर्चा में हैं. ऐसे में उनके इस रुख ने राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
भारत में राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज
ट्रंप के इस बयान पर भारत में कई नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस पार्टी ने इसे देश का अपमान बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मुद्दे को अमेरिका के सामने उठाने की मांग की. कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह की भाषा किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जा सकती और यह हर भारतीय का अपमान है.
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सरकारी प्रतिक्रिया सतर्क
वहीं, भारत सरकार की ओर से इस मामले पर फिलहाल सतर्क रुख अपनाया गया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में रिपोर्ट्स देखी हैं, लेकिन इस पर फिलहाल ज्यादा टिप्पणी नहीं की जा सकती. इससे साफ है कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर संतुलित प्रतिक्रिया देना चाहती है.
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बताते चलें कि ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भाषा और मर्यादा को लेकर बहस छेड़ दी है. भले ही सफाई दे दी गई हो, लेकिन यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है. खासकर भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में इस तरह के बयान का असर नजर आ सकता है. फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि आगे इस विवाद का क्या रुख होता है.