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नेशनल हाईवे पर नया नियम लागू! इन गाड़ियों को अब देना होगा कई गुना टोल, सरकार का बड़ा फैसला
National Highway: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ओवरलोड गाड़ियों के खिलाफ नए नियम लागू कर दिए हैं, जो 15 अप्रैल से पूरे देश के नेशनल हाईवे पर लागू हो चुके हैं.
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National Highway: अगर आप कभी हाईवे पर सफर करते हैं, तो आपने जरूर ऐसी गाड़ियां देखि होंगी जो अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा सामान लेकर चल रही होती हैं. पहली नजर में ये बस एक नियम तोड़ने जैसा लगता हैं, लेकिन असल में ये बहुत बड़ा खतरा हैं. ओवरलोड गाड़ी का संतुलन बिगड़ सकता हैं , ब्रेक सही से काम नहीं करते और अगर हादसा हो जाए तो उसका असर सिर्फ उस गाड़ी तक सिमित नहीं रहता, आसपास चल रहे कई लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं. इन्हीं खतरों को देखते हुआ अब सरकार ने इस मामले को हल्के में लेना बंद कर दिया हैं और सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं.
नए नियम लागू-अब नहीं चलेगी मनमानी
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ओवरलोड गाड़ियों के खिलाफ नए नियम लागू कर दिए हैं, जो 15 अप्रैल से पूरे देश के नेशनल हाईवे पर लागू हो चुके हैं. अब हर वाहन को तय सीमा के अंदर ही वजन लेकर चलना होगा. अब “थोड़ा ज्यादा लोड” जैसी कोई छूट नहीं है. अगर गाड़ी ओवरलोड पाई गई, तो जेब पर सीधा असर पड़ेगा.
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कितना देना होगा जुर्माना?
सरकार ने जुर्माने का सिस्टम भी काफी साफ और सख्त बनाया है. अब ये इस बात पर निर्भर करेगा कि गाड़ी कितनी ओवरलोड है:
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10% तक ओवरलोड - कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं
10% से 40% ओवरलोड - टोल का 2 गुना चार्ज
40% से ज्यादा ओवरलोड - टोल का 4 गुना चार्ज
मतलब अगर कोई गाड़ी बहुत ज्यादा ओवरलोड है, तो उसका सफर काफी महंगा पड़ सकता है
FASTag से ही होगा भुगतान
अब एक और बड़ा बदलाव ये है कि ओवरलोडिंग का पूरा चार्ज सिर्फ FASTag के जरिए ही लिया जाएगा. यानी अब कैश या बहानेबाजी की गुंजाइश कम हो गई है. इसके अलावा, ऐसी गाड़ियों की जानकारी सरकार के डिजिटल रिकॉर्ड यानी “वाहन पोर्टल” में भी दर्ज की जाएगी, जिससे भविष्य में उन पर नजर रखना आसान होगा.
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FASTag नहीं है तो और भी नुकसान
अगर किसी गाड़ी में FASTag नहीं है या वह एक्टिव नहीं है, तो उसे और ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा. ऐसे मामलों में:
सामान्य टोल के अलावा 25% अतिरिक्त चार्ज देना होगा
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यानी नियमों को नजरअंदाज करना अब हर तरफ से भारी पड़ सकता है.
ओवरलोड कैसे पकड़ा जाएगा?
आपके मन में ये सवाल जरूर आया होगा कि आखिर पता कैसे चलेगा कि गाड़ी ओवरलोड है या नहीं? इसके लिए टोल प्लाजा पर वजन मापने वाली मशीनें लगाई गई हैं. जैसे ही गाड़ी वहां से गुजरती है, उसका वजन चेक किया जाएगा. हालांकि, अगर किसी टोल प्लाजा पर ये सुविधा नहीं है, तो वहां ओवरलोडिंग का चार्ज नहीं लिया जाएगा. लेकिन जहां ये सिस्टम लगा है, वहां बचना मुश्किल है.
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आखिर क्यों जरूरी है ये सख्ती?
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सरकार का मकसद सिर्फ जुर्माना वसूलना नहीं है, बल्कि सड़कों को सुरक्षित बनाना है. ओवरलोड गाड़ियां सड़क को भी नुकसान पहुंचाती हैं और हादसों की संभावना कई गुना बढ़ा देती हैं. अगर इन नियमों का सही से पालन हुआ, तो:
सड़क हादसे कम होंगे
ट्रैफिक ज्यादा सुरक्षित होगा
और हर किसी का सफर थोड़ा सुकून भरा होगा