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‘जो हमारा है हमें मिल जाना चाहिए’ संभल को लेकर सीएम योगी का बड़ा बयान, विपक्ष में हड़कंप

उत्तर प्रदेश के संभल में मस्जिद विवाद पर सियासी संग्राम छिड़ गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा कि जो हमारा है वो हमें मिलना चाहिए. इस बयान पर विपक्ष ने धर्म पर राजनीति का आरोप लगाया है. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने सरकार पर गलत बयानी का इल्जाम लगाया.

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24 नवंबर को भड़की हिंसा के बाद संभल ने जो रोज़ उगले, उसने पूरी दुनिया को चौंकाकर रख दिया। ना सिर्फ़ शाही जामा मस्जिद पर बात चली, बल्कि खुदाई शुरू हुई और ज़मीन में दबा दिए गए हिंदुओं के आस्था के प्रतीक चिन्ह और निशान सब बाहर आ गए। जांच चल ही रही थी, इसी बीच सीएम योगी ने पहली बार खुलकर संभल पर बड़ा बयान दिया और इशारा कर दिया कि जो हमारा है, वो हमें मिल जाना चाहिए।

संभल को लेकर जिस तरीक़े से सीएम योगी ने हुंकार भरी, उसके मायने विरोधियों की नींद उड़ा रहे हैं। ख़ासकर उन लोगों की जो मुसलमानों के मसीहा बनकर संभल की खुदाई से जल रहे हैं। हिंदुओं से जुड़े सबूत मिलने पर बवाल भी कर रहे हैं और सवाल भी। लेकिन अब बात विधानसभा से निकल गई है, तो दूर तलक जाएगी। अब योगी सरकार संभल में आगे जो कदम उठाएगी, उससे बहुत कुछ बड़ा होगा। क्योंकि अभी तक संभल ने जो राज उगले हैं, वो साबित कर रहे हैं कि कैसे एक वक़्त पर हिंदुओं के साथ अत्याचार हुआ, मंदिरों को बंद किया गया, कूपों को दबाया गया, और सबूतों को रौंदा गया। अब मंदिर भी वापस लिए जाएंगे, कूप भी खोदे जाएंगे और हिंदुओं की वापसी भी होगी। क्योंकि सीएम योगी ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा- अकेले संभल में 68 तीर्थ थे और 19 कूप थे, जिनको एक शरारत के तहत, एक निश्चित समय के अंदर समाप्त कर दिया गया। जिनमें से 68 तीर्थों को ढूंढना, यह तो हमारी विरासत का हिस्सा है।

खैर, योगी आदित्यनाथ जैसे-जैसे संभल को लेकर सख़्ती दिखा रहे हैं, सपा की बैचेनी बढ़ती जा रही है। क्योंकि एक तो संभल हिंसा में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क का नाम भी शामिल है, दूसरा मुसलमानों पर एक्शन सपा के वोट बैंक में हड़कंप जैसा ही है। यही वजह है कि जब शाही जामा मस्जिद में सर्वे हुआ, तब भी सपा ने विरोध जताया और जब दंगाईयों पर एक्शन हुआ, तब भी सपाई बवाल करते नज़र आए। अखिलेश यादव तक संभल में दंगाईयों पर हो रहे एक्शन को मुसलमानों के खिलाफ बताने बैठ गए। लेकिन अखिलेश यादव को ना तो दंगों में हुआ नुक़सान दिखाई दिया, ना ही घायल पुलिसकर्मी नज़र आए, और ना ही प्रशासन को चुनौती देते बवाली दिखाई दिए। बस माहौल बनाया और भड़काने बैठ गए। अब जैसे ही योगी ने बयान दिया, वैसे ही विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष योगी पर वार करने और मुसलमानों के मसीहा बनने मैदान में उतर आए और आरोप लगाया कि इनकी नीयत मस्जिद में मंदिर खोजने की है।

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जिसके बाद भड़के योगी आदित्यनाथ ने संभल केस में सख़्त लहजे में चेतावनी देते हुए पहले ही कह दिया था कि संभल में जिसने भी बवाल भड़काया, क़ानून से जो भी पंगा लेता नज़र आया, किसी को बख्शा नहीं जाएगा। फिर चाहे कोई कितना भी बड़ा नेता हो या राजनेता, जिसने हिमाक़त दिखाई है, उसे अंजाम भुगतना पड़ेगा। यही वजह है कि संभल हिंसा के एक-एक आरोपी को ढूंढ-ढूंढकर सलाख़ों के पीछे डाला जा रहा है। जिन्होंने हिंदुओं की ज़मीनों या मंदिरों पर कब्जा किया हुआ है, उन्हें क़ानूनी पाठ पढ़ाया जा रहा है।

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