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शिवसेना में फिर छिड़ी जंग! 6 सांसदों के शिंदे गुट में जाने पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे उद्धव ठाकरे, जानें पूरा मामला
शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों के शिंदे गुट में विलय का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. उद्धव गुट ने तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि स्पीकर के फैसले से संसद में उनकी पार्टी का कामकाज प्रभावित होगा. चीफ जस्टिस ने मामले को जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आश्वासन दिया.
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महाराष्ट्र की शिवसेना को लेकर एक बार फिर से हलचल देखने को मिल रही है. शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. मंगलवार को शिवसेना (UBT) की ओर से वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने अदालत में इस मामले पर तत्काल सुनवाई की मांग की. इस पर चीफ जस्टिस ने जल्द सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध कराने का आश्वासन दिया. संसद सत्र के चलते यह घटनाक्रम काफी अहम माना जा रहा है.
उद्धव गुट ने फैसले पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उद्धव ठाकरे गुट की ओर से कहा गया कि दोनों गुटों के बीच का विवाद पहले से ही अदालत में लंबित है. ऐसे में लोकसभा स्पीकर द्वारा 6 सांसदों के विलय को मान्यता देना उनकी पार्टी के संसदीय अधिकारों को प्रभावित करता है. देवदत्त कामत ने दलील दी कि इस फैसले के बाद संसद में पार्टी का प्रभाव और कामकाज गंभीर रूप से प्रभावित होगा. उनका मानना है कि संसद के मौजूदा सत्र के चलते यह राजनीतिक संतुलन बदलने वाला फैसला साबित हुआ है.
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शिंदे गुट की ताकत हुई दोगुनी
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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पहले ही इस विलय को मान्यता दे चुके हैं. इसके बाद यवतमाल से संजय देशमुख, परभणी से संजय जाधव, मुंबई उत्तर-पूर्व से संजय दीना पाटिल, हिंगोली से नागेश पाटिल-अष्टिकार, धाराशिव से ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और शिर्डी से भाऊसाहेब वाकचौरे आधिकारिक रूप से शिंदे गुट का हिस्सा बन गए हैं. इस बदलाव के बाद लोकसभा में शिवसेना (शिंदे) के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई है, जबकि शिवसेना (UBT) के पास अब केवल 3 सांसद बचे हैं. ये उद्धव ठाकरे के लिए आने वाले समय में चिंता बढ़ाने वाला साबित हो सकता है.
पार्टी ने क्या रखी अपनी दलील?
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शिवसेना (UBT) का कहना है कि उसकी सहमति के बिना निर्वाचित सांसद किसी प्रतिद्वंद्वी दल में विलय नहीं कर सकते. पार्टी का आरोप है कि स्पीकर का आदेश संसद सत्र शुरू होने से ठीक पहले जारी किया गया, जिससे उसके संसदीय अधिकारों पर सीधा असर पड़ा है. इसी आधार पर उसने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है.
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बताते चलें कि यह विवाद 2022 में शुरू हुआ था, जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना में बड़ी बगावत हुई और उद्धव ठाकरे सरकार गिर गई. इसके बाद फरवरी 2023 में चुनाव आयोग ने शिवसेना का मूल चुनाव चिन्ह 'तीर-धनुष' और पार्टी पर शिंदे गुट का दावा स्वीकार कर लिया था. उस फैसले को भी उद्धव गुट ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर अब तक अंतिम फैसला नहीं आया है. ऐसे में 6 सांसदों के विलय का नया विवाद महाराष्ट्र की राजनीति को फिर से अदालत के दरवाजे तक ले आया है.