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ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर मंडरा रहा गिरफ्तारी का खतरा, 6 साल पुराने केस में MP पुलिस कर सकती है कार्रवाई; जानें पूरा मामला
पश्चिम बंगाल में टीएमसी की हार के बाद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. छह साल पुराने मानहानि मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक हटा दी है, जिससे उनकी गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है.
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पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों काफी उथल-पुथल भरे दौर से गुजर रही है. विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी नेतृत्व पर लगातार दबाव बढ़ता नजर आ रहा है. एक तरफ पार्टी के भीतर असंतोष और नेताओं के बगावती तेवर लगातार जारी हैं, तो दूसरी तरफ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की कानूनी मुश्किलें भी बढ़ गई हैं. अब एक पुराने मानहानि मामले में उनकी गिरफ्तारी की आशंका ने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है.
दरअसल, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अभिषेक बनर्जी के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक हटा दी है. इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश पुलिस के लिए कार्रवाई का रास्ता खुल गया है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है.
हाई कोर्ट ने हटाई राहत
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अभिषेक बनर्जी को पहले इस मामले में राहत मिली हुई थी. हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगा रखी थी. लेकिन अब अदालत ने उनकी याचिका खारिज करते हुए यह राहत वापस ले ली है. जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से मामले में पर्याप्त रुचि नहीं दिखाई गई. अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि पहले चरण की सुनवाई में भी याचिकाकर्ता की तरफ से कोई पेश नहीं हुआ. इसी आधार पर कोर्ट ने पहले दिया गया स्टे ऑर्डर समाप्त कर दिया. इस फैसले के बाद कानूनी स्थिति पूरी तरह बदल गई है और अब मामले की सुनवाई निचली अदालत में आगे बढ़ सकेगी.
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क्या हो सकती है गिरफ्तारी?
अदालत के आदेश के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी हो सकती है. कानूनी जानकारों का मानना है कि गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. हालांकि इससे पहले बनर्जी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं और अंतरिम राहत की मांग कर सकते हैं. यदि शीर्ष अदालत से तत्काल राहत नहीं मिलती है तो मध्य प्रदेश पुलिस आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी. यही वजह है कि इस फैसले को राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है.
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आखिर क्या है पूरा मामला?
यह विवाद करीब छह साल पुराना बताया जा रहा है. आरोप है कि नवंबर 2020 में एक चुनावी सभा के दौरान अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी नेता आकाश विजयवर्गीय के लिए कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. इसी बयान को लेकर मानहानि का मामला दर्ज कराया गया था. मामला विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट तक पहुंचा, जहां से अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया. इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती देकर राहत हासिल कर ली थी. अब वही राहत समाप्त हो चुकी है.
बंगाल में भी दर्ज हुए नए मामले
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अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं हैं. इसी बीच पश्चिम बंगाल में भी उनके खिलाफ दो नई एफआईआर दर्ज किए जाने की खबर सामने आई है. भाजपा नेता अभिजीत दास की शिकायत के आधार पर दक्षिण 24 परगना जिले में ये मामले दर्ज किए गए हैं. इन घटनाओं ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है. विपक्ष इसे कानून के दायरे में होने वाली कार्रवाई बता रहा है, जबकि टीएमसी समर्थक इसे राजनीतिक दबाव की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं.
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बहरहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अभिषेक बनर्जी अगला कानूनी कदम क्या उठाते हैं. यदि वह सुप्रीम कोर्ट से राहत पाने में सफल रहते हैं तो उन्हें अस्थायी राहत मिल सकती है. लेकिन यदि ऐसा नहीं होता, तो मध्य प्रदेश पुलिस की कार्रवाई तेज हो सकती है. ऐसे में आने वाले दिन न सिर्फ अभिषेक बनर्जी बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं.