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हरियाणा में जमीन लेन-देन पर सख्ती, सरकार ने बदले नियम, अब ऐसे होगी रजिस्ट्री

Haryana: नए नियमों के तहत अब शहरी निकायों और नगर परिषद क्षेत्रों में आने वाली अधिसूचित जमीन का एक्सचेंज बिना अनुमति नहीं हो सकेगा. इसके लिए संबंधित प्राधिकरण से मंजूरी लेना जरूरी कर दिया गया है.

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23 Jun 2026
( Updated: 23 Jun 2026
03:59 PM )
हरियाणा में जमीन लेन-देन पर सख्ती, सरकार ने बदले नियम, अब ऐसे होगी रजिस्ट्री
Image Source: IANS/CMO
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हरियाणा सरकार ने शहरी क्षेत्रों के आसपास जमीन से जुड़े लेन- देन को लेकर नियमों को और सख्त करने की तैयारी कर ली है..इसका सीधा मकसद जमीन के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी और तेजी से फ़ैल रही अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाना है. सरकार चाहती है की जमीन का हर सौदा पूरी तरह पारदर्शी हो और किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे...

अब जमीन एक्सचेंज पर भी लेनी होगी मंजूरी

नए नियमों के तहत अब शहरी निकायों और नगर परिषद क्षेत्रों में आने वाली अधिसूचित जमीन का एक्सचेंज (यानी जमीन की अदला-बदली) बिना अनुमति नहीं हो सकेगा. इसके लिए संबंधित प्राधिकरण से मंजूरी लेना जरूरी कर दिया गया है.
अगर जमीन का क्षेत्रफल एक एकड़ से कम है, तो ऐसी स्थिति में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के निदेशक या अधिकृत अधिकारी की अनुमति लेना अनिवार्य होगा. अब जमीन बदलने या अदला-बदली करने की प्रक्रिया पहले से ज्यादा निगरानी के दायरे में आ जाएगी.

अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाने की कोशिश

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सरकार का मानना है कि पिछले कुछ समय में जमीन एक्सचेंज की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल किया जा रहा था. कई मामलों में कम कीमत की जमीन देकर ज्यादा कीमत की जमीन हासिल कर ली जाती थी, जिससे नियमों को दरकिनार किया जाता था.
इसी तरह की गड़बड़ियों के कारण अवैध कॉलोनियों का विस्तार भी बढ़ रहा था. नए नियमों के जरिए सरकार इस पूरे सिस्टम को कंट्रोल में लाना चाहती है ताकि बिना अनुमति के कॉलोनियां न बस सकें.

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कानून में बदलाव, एक्ट में किया गया संशोधन

इस बदलाव को Haryana Urban Area Development and Regulation Act, 1975 की धारा 7-A में संशोधन के जरिए लागू किया गया है. इस संशोधन के बाद अब जमीन एक्सचेंज को भी पूरी तरह रेगुलेटरी सिस्टम के तहत लाया जाएगा.
हालांकि यह बिल विधानसभा के बजट सत्र में पास हो चुका है, लेकिन अभी इसे राज्यपाल की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है. इसी वजह से फिलहाल इसका नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है.

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पहले से लागू नियम क्या कहते थे?

पहले से ही शहरी अधिसूचित क्षेत्रों में एक एकड़ से कम जमीन की बिक्री, लीज या ट्रांसफर के लिए NOC लेना जरूरी था.  इसका मकसद था कि शहरी विकास को सही दिशा में रखा जाए और जमीन का इस्तेमाल नियमों के हिसाब से ही हो.
अब नए बदलाव के बाद यह निगरानी और ज्यादा सख्त हो जाएगी, खासकर जमीन एक्सचेंज जैसे मामलों में.

गड़बड़ियों का खुलासा और सरकार का सख्त रुख

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लोग जमीन एक्सचेंज को एक तरीके के “शॉर्टकट” की तरह इस्तेमाल कर रहे थे. यानी कागजों पर अदला-बदली दिखाकर असल में जमीन की खरीद-फरोख्त की जा रही थी.
छोटे प्लॉट देकर बड़े और महंगे प्लॉट हासिल करने जैसे मामलों ने नियमों की कमजोरियों को उजागर किया. इसी को रोकने के लिए सरकार अब पूरी व्यवस्था को मजबूत करना चाहती है.

पारदर्शी सिस्टम की ओर कदम

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सरकार का कहना है कि इस संशोधन से जमीन से जुड़े सभी लेन-देन ज्यादा पारदर्शी होंगे. इससे न सिर्फ धोखाधड़ी पर रोक लगेगी, बल्कि शहरी इलाकों के आसपास अनियंत्रित विकास और अवैध कॉलोनियों पर भी लगाम लग सकेगी.

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